Breaking News :

ऋण घोटाले में मददगार थी तहसील

2017/12/30



आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने दर्ज किया आपराधिक प्रकरण नवभारत न्यूज भोपाल, किसी की भूमि के कूटरचित किश्तबंदी खतौनी, खसरा एवं ऋण पुस्तिका के आधार पर ऋण लेने का मामला सामने आया है. लेकिन जानकर हैरानी होगी कि यह काम करने वाले आरोपी गिरोह में न केवल किसान बल्कि तहसील के तहसीलदार और बैंकों के प्रबंधक भी शामिल थे. देवास से जुड़े मामले का खुलासा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल ने जांच के बाद निकले निष्कर्ष पर संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से हुआ. बताया जाता है कि ग्राम लसुडिय़ा ब्राह्मण और सम्मनखेड़ी तहसील खुर्द के किसानों की भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार करवा कर 5 व्यक्ति लगभग 52 लाख रुपये के ऋण अलग-अलग 4 बैंकों से प्राप्त करने में सफल रहे हैं. लेकिन यह दस्तावेज बनवाने में तत्कालीन तहसीलदार रमेश चंद्र खतेडिया, पटवारी अमित शर्मा तथा कम्प्यूटर डाटा ऑपरेटर सुश्री मनीषा त्यागी मददगार के रूप में सामने आये हैं. हालांकि इसमें सर्चकर्ता एडवोकेट के.पी. कुरैशी और दुर्गाशंकर गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है. लेकिन एचडीएफसी बैंक सिहोरा के शाखा प्रबंधक रमाकांत शर्मा, देवास सेन्ट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक एस.वी. श्रीवास्तव और आईसीआईसीआई बैंक के मंदीप जैन के साथ यूनियन बैंक के वरिष्ठï शाखा प्रबंधक सी.डी.एस. चौहान भी मिलीभगत के लिये जिम्मेदार ठहराये गये हैं. जबकि मुख्य आरोपी माखन ङ्क्षसह गुर्जर, भेरू सिंह गुर्जर, मोती सिंह गुर्जर, निर्भय सिंह गुर्जर, चंदर सिंह सम्मनखेड़ी और छापरिया निवासी बताये गये हैं. इस घटना को वर्ष 2012 से 2015 के बीच अंजाम दिया गया है.


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts