Breaking News :

सचिन ने विशेष बच्चों के साथ बिताया दिन नई दिल्ली, भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर आज एक नये अवतार में नजर आये और उन्होंने अपना दिन विशेष बच्चों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा कर तथा उनके साथ क्रिकेट मैच खेलकर बिताया. राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स काम्पलैक्स में जमा हुये सैंकड़ों विशेष बच्चों के लिये आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया जहां उन्होंने सचिन के साथ रूबरू होकर अपने मन की बात की. सचिन भी लगातार इन बच्चों के साथ जुड़े रहे और उन्हें कुछ न कुछ बताते रहे. यूनीसेफ के ब्रांड एम्बेसेडर सचिन ने विशेष तथा अन्य बच्चों को जीवन में आगे बढऩे और कुछ बनने के लिये मूलमंत्र देते हुये कहा कि मैं भी बचपन में शरारती था. लेकिन एक समय पर मैंने अपने लिये लक्ष्य तय किये और उन्हें हासिल करने के लिये जीजान से जुट गया. मेरी शरारतें पीछे छूटती गयीं और मैं अनुशासित होता चला गया. क्रिकेट लीजेंड ने कहा कि मेरा एक सपना था कि मैं भारत के लिये क्रिकेट खेलूं. मेरा यह सपना 16 साल की उम्र में पूरा हुआ जिसके बाद मैंने 24 साल तक क्रिकेट खेला. मेरे करियर में भी उतार-चढ़ाव आये क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जीवन के उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है. ऐसा प्रत्येक के करियर में होता है. 43 वर्षीय सचिन ने बच्चों से कहा कि मैंने भी सपना देखा था कि मैं देश की विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनूं. वर्ष 2011 में मेरा यह सपना पूरा हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में 22 साल लगे. आप भी सपने देखा करो और जीवन में कभी घबराना नहीं. आपके सपने भी पूरे होंगे. सचिन ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों पर करियर के लिये कोई दबाव न डालें. उन्होंने कहा कि मेरे पिता प्रोफेसर थे लेकिन उन्होंने मुझपर लेखक बनने के लिये कोई दबाव नहीं बनाया. उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने दिया जिससे मैं आज यहां तक पहुंच पाया हूं. मास्टर ब्लास्टर ने बच्चों को जीवन का उपदेश देने के बाद त्यागराज काम्पलैक्स के इंडोर स्टेडियम में ही क्रिकेट मैच खेला. एक तरफ सचिन की टीम थी तो दूसरी ओर दूसरी टीम. सचिन ने अपनी टीम के लिये एक ओवर बल्लेबाजी भी की और खेल के दौरान वह खिलाडिय़ों को कुछ न कुछ समझाते रहे. सचिन की टीम ने अंत में यह पांच-पांच ओवर का मैच जीता."/> सचिन ने विशेष बच्चों के साथ बिताया दिन नई दिल्ली, भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर आज एक नये अवतार में नजर आये और उन्होंने अपना दिन विशेष बच्चों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा कर तथा उनके साथ क्रिकेट मैच खेलकर बिताया. राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स काम्पलैक्स में जमा हुये सैंकड़ों विशेष बच्चों के लिये आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया जहां उन्होंने सचिन के साथ रूबरू होकर अपने मन की बात की. सचिन भी लगातार इन बच्चों के साथ जुड़े रहे और उन्हें कुछ न कुछ बताते रहे. यूनीसेफ के ब्रांड एम्बेसेडर सचिन ने विशेष तथा अन्य बच्चों को जीवन में आगे बढऩे और कुछ बनने के लिये मूलमंत्र देते हुये कहा कि मैं भी बचपन में शरारती था. लेकिन एक समय पर मैंने अपने लिये लक्ष्य तय किये और उन्हें हासिल करने के लिये जीजान से जुट गया. मेरी शरारतें पीछे छूटती गयीं और मैं अनुशासित होता चला गया. क्रिकेट लीजेंड ने कहा कि मेरा एक सपना था कि मैं भारत के लिये क्रिकेट खेलूं. मेरा यह सपना 16 साल की उम्र में पूरा हुआ जिसके बाद मैंने 24 साल तक क्रिकेट खेला. मेरे करियर में भी उतार-चढ़ाव आये क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जीवन के उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है. ऐसा प्रत्येक के करियर में होता है. 43 वर्षीय सचिन ने बच्चों से कहा कि मैंने भी सपना देखा था कि मैं देश की विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनूं. वर्ष 2011 में मेरा यह सपना पूरा हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में 22 साल लगे. आप भी सपने देखा करो और जीवन में कभी घबराना नहीं. आपके सपने भी पूरे होंगे. सचिन ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों पर करियर के लिये कोई दबाव न डालें. उन्होंने कहा कि मेरे पिता प्रोफेसर थे लेकिन उन्होंने मुझपर लेखक बनने के लिये कोई दबाव नहीं बनाया. उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने दिया जिससे मैं आज यहां तक पहुंच पाया हूं. मास्टर ब्लास्टर ने बच्चों को जीवन का उपदेश देने के बाद त्यागराज काम्पलैक्स के इंडोर स्टेडियम में ही क्रिकेट मैच खेला. एक तरफ सचिन की टीम थी तो दूसरी ओर दूसरी टीम. सचिन ने अपनी टीम के लिये एक ओवर बल्लेबाजी भी की और खेल के दौरान वह खिलाडिय़ों को कुछ न कुछ समझाते रहे. सचिन की टीम ने अंत में यह पांच-पांच ओवर का मैच जीता."/> सचिन ने विशेष बच्चों के साथ बिताया दिन नई दिल्ली, भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर आज एक नये अवतार में नजर आये और उन्होंने अपना दिन विशेष बच्चों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा कर तथा उनके साथ क्रिकेट मैच खेलकर बिताया. राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स काम्पलैक्स में जमा हुये सैंकड़ों विशेष बच्चों के लिये आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया जहां उन्होंने सचिन के साथ रूबरू होकर अपने मन की बात की. सचिन भी लगातार इन बच्चों के साथ जुड़े रहे और उन्हें कुछ न कुछ बताते रहे. यूनीसेफ के ब्रांड एम्बेसेडर सचिन ने विशेष तथा अन्य बच्चों को जीवन में आगे बढऩे और कुछ बनने के लिये मूलमंत्र देते हुये कहा कि मैं भी बचपन में शरारती था. लेकिन एक समय पर मैंने अपने लिये लक्ष्य तय किये और उन्हें हासिल करने के लिये जीजान से जुट गया. मेरी शरारतें पीछे छूटती गयीं और मैं अनुशासित होता चला गया. क्रिकेट लीजेंड ने कहा कि मेरा एक सपना था कि मैं भारत के लिये क्रिकेट खेलूं. मेरा यह सपना 16 साल की उम्र में पूरा हुआ जिसके बाद मैंने 24 साल तक क्रिकेट खेला. मेरे करियर में भी उतार-चढ़ाव आये क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जीवन के उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है. ऐसा प्रत्येक के करियर में होता है. 43 वर्षीय सचिन ने बच्चों से कहा कि मैंने भी सपना देखा था कि मैं देश की विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनूं. वर्ष 2011 में मेरा यह सपना पूरा हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में 22 साल लगे. आप भी सपने देखा करो और जीवन में कभी घबराना नहीं. आपके सपने भी पूरे होंगे. सचिन ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों पर करियर के लिये कोई दबाव न डालें. उन्होंने कहा कि मेरे पिता प्रोफेसर थे लेकिन उन्होंने मुझपर लेखक बनने के लिये कोई दबाव नहीं बनाया. उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने दिया जिससे मैं आज यहां तक पहुंच पाया हूं. मास्टर ब्लास्टर ने बच्चों को जीवन का उपदेश देने के बाद त्यागराज काम्पलैक्स के इंडोर स्टेडियम में ही क्रिकेट मैच खेला. एक तरफ सचिन की टीम थी तो दूसरी ओर दूसरी टीम. सचिन ने अपनी टीम के लिये एक ओवर बल्लेबाजी भी की और खेल के दौरान वह खिलाडिय़ों को कुछ न कुछ समझाते रहे. सचिन की टीम ने अंत में यह पांच-पांच ओवर का मैच जीता.">

आप भी सपना देखा करो, घबराओ नहीं

2017/11/21



सचिन ने विशेष बच्चों के साथ बिताया दिन नई दिल्ली, भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर आज एक नये अवतार में नजर आये और उन्होंने अपना दिन विशेष बच्चों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा कर तथा उनके साथ क्रिकेट मैच खेलकर बिताया. राजधानी के त्यागराज स्पोर्ट्स काम्पलैक्स में जमा हुये सैंकड़ों विशेष बच्चों के लिये आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन बन गया जहां उन्होंने सचिन के साथ रूबरू होकर अपने मन की बात की. सचिन भी लगातार इन बच्चों के साथ जुड़े रहे और उन्हें कुछ न कुछ बताते रहे. यूनीसेफ के ब्रांड एम्बेसेडर सचिन ने विशेष तथा अन्य बच्चों को जीवन में आगे बढऩे और कुछ बनने के लिये मूलमंत्र देते हुये कहा कि मैं भी बचपन में शरारती था. लेकिन एक समय पर मैंने अपने लिये लक्ष्य तय किये और उन्हें हासिल करने के लिये जीजान से जुट गया. मेरी शरारतें पीछे छूटती गयीं और मैं अनुशासित होता चला गया. क्रिकेट लीजेंड ने कहा कि मेरा एक सपना था कि मैं भारत के लिये क्रिकेट खेलूं. मेरा यह सपना 16 साल की उम्र में पूरा हुआ जिसके बाद मैंने 24 साल तक क्रिकेट खेला. मेरे करियर में भी उतार-चढ़ाव आये क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जीवन के उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है. ऐसा प्रत्येक के करियर में होता है. 43 वर्षीय सचिन ने बच्चों से कहा कि मैंने भी सपना देखा था कि मैं देश की विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा बनूं. वर्ष 2011 में मेरा यह सपना पूरा हो गया. लेकिन यहां तक पहुंचने में 22 साल लगे. आप भी सपने देखा करो और जीवन में कभी घबराना नहीं. आपके सपने भी पूरे होंगे. सचिन ने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों पर करियर के लिये कोई दबाव न डालें. उन्होंने कहा कि मेरे पिता प्रोफेसर थे लेकिन उन्होंने मुझपर लेखक बनने के लिये कोई दबाव नहीं बनाया. उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने दिया जिससे मैं आज यहां तक पहुंच पाया हूं. मास्टर ब्लास्टर ने बच्चों को जीवन का उपदेश देने के बाद त्यागराज काम्पलैक्स के इंडोर स्टेडियम में ही क्रिकेट मैच खेला. एक तरफ सचिन की टीम थी तो दूसरी ओर दूसरी टीम. सचिन ने अपनी टीम के लिये एक ओवर बल्लेबाजी भी की और खेल के दौरान वह खिलाडिय़ों को कुछ न कुछ समझाते रहे. सचिन की टीम ने अंत में यह पांच-पांच ओवर का मैच जीता.


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts