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नयी दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने की आधिकारिक घेाषणा करते हुए कल कहा था कि यह समझौता उनके देश के हितों के खिलाफ है। संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंतोनियो गुतरेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निबटने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया के निर्माण के प्रयास प्रभावित होंगे। उन्हाेंने कहा कि पेरिस समझौते को वर्ष 2015 में दुनिया के सभी देशो ने अंगीकार किया था क्योंकि वे जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभावों से अच्छी तरह वाकिफ हैं अौर इससे निबटने के उपायों के महत्व को भी भलीभांति समझते हैं। श्री गुतरेस ने कहा, “ पेरिस समझौते में निहित संकल्पनाओं ने हकीकत का रूप लेना शुरु कर दिया है। ऐसे में मैं उम्मीद करता हूं कि अन्य देशों के साथ ही अमेरिका के सभी शहर,राज्य और उद्योग भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऐसे आर्थिक विकास में सहयोग करते रहेंगे जिसमें 21 वीं शताब्दी की समृद्ध दुनिया के लिए राेजगार अौर बाजारों के लिए प्रचुर संभावनाएं होंगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का नेतृत्व बहुत जरुरी है इसलिए वह दुनिया भर के देशों के साथ ही अमेरिकी सरकार से भी एक ऐसे विश्व के निर्माण में सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो सके।"/> नयी दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने की आधिकारिक घेाषणा करते हुए कल कहा था कि यह समझौता उनके देश के हितों के खिलाफ है। संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंतोनियो गुतरेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निबटने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया के निर्माण के प्रयास प्रभावित होंगे। उन्हाेंने कहा कि पेरिस समझौते को वर्ष 2015 में दुनिया के सभी देशो ने अंगीकार किया था क्योंकि वे जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभावों से अच्छी तरह वाकिफ हैं अौर इससे निबटने के उपायों के महत्व को भी भलीभांति समझते हैं। श्री गुतरेस ने कहा, “ पेरिस समझौते में निहित संकल्पनाओं ने हकीकत का रूप लेना शुरु कर दिया है। ऐसे में मैं उम्मीद करता हूं कि अन्य देशों के साथ ही अमेरिका के सभी शहर,राज्य और उद्योग भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऐसे आर्थिक विकास में सहयोग करते रहेंगे जिसमें 21 वीं शताब्दी की समृद्ध दुनिया के लिए राेजगार अौर बाजारों के लिए प्रचुर संभावनाएं होंगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का नेतृत्व बहुत जरुरी है इसलिए वह दुनिया भर के देशों के साथ ही अमेरिकी सरकार से भी एक ऐसे विश्व के निर्माण में सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो सके।"/> नयी दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने की आधिकारिक घेाषणा करते हुए कल कहा था कि यह समझौता उनके देश के हितों के खिलाफ है। संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंतोनियो गुतरेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निबटने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया के निर्माण के प्रयास प्रभावित होंगे। उन्हाेंने कहा कि पेरिस समझौते को वर्ष 2015 में दुनिया के सभी देशो ने अंगीकार किया था क्योंकि वे जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभावों से अच्छी तरह वाकिफ हैं अौर इससे निबटने के उपायों के महत्व को भी भलीभांति समझते हैं। श्री गुतरेस ने कहा, “ पेरिस समझौते में निहित संकल्पनाओं ने हकीकत का रूप लेना शुरु कर दिया है। ऐसे में मैं उम्मीद करता हूं कि अन्य देशों के साथ ही अमेरिका के सभी शहर,राज्य और उद्योग भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऐसे आर्थिक विकास में सहयोग करते रहेंगे जिसमें 21 वीं शताब्दी की समृद्ध दुनिया के लिए राेजगार अौर बाजारों के लिए प्रचुर संभावनाएं होंगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का नेतृत्व बहुत जरुरी है इसलिए वह दुनिया भर के देशों के साथ ही अमेरिकी सरकार से भी एक ऐसे विश्व के निर्माण में सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो सके।">

अमेरिका का पेरिस जलवायु समझौते से हटना दुर्भाग्यपूर्ण : संयुक्त राष्ट्र

2017/06/02



नयी दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने की आधिकारिक घेाषणा करते हुए कल कहा था कि यह समझौता उनके देश के हितों के खिलाफ है। संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंतोनियो गुतरेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निबटने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया के निर्माण के प्रयास प्रभावित होंगे। उन्हाेंने कहा कि पेरिस समझौते को वर्ष 2015 में दुनिया के सभी देशो ने अंगीकार किया था क्योंकि वे जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभावों से अच्छी तरह वाकिफ हैं अौर इससे निबटने के उपायों के महत्व को भी भलीभांति समझते हैं। श्री गुतरेस ने कहा, “ पेरिस समझौते में निहित संकल्पनाओं ने हकीकत का रूप लेना शुरु कर दिया है। ऐसे में मैं उम्मीद करता हूं कि अन्य देशों के साथ ही अमेरिका के सभी शहर,राज्य और उद्योग भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऐसे आर्थिक विकास में सहयोग करते रहेंगे जिसमें 21 वीं शताब्दी की समृद्ध दुनिया के लिए राेजगार अौर बाजारों के लिए प्रचुर संभावनाएं होंगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का नेतृत्व बहुत जरुरी है इसलिए वह दुनिया भर के देशों के साथ ही अमेरिकी सरकार से भी एक ऐसे विश्व के निर्माण में सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो सके।


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