भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता प्रभावी;पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार हो सकता है दोगुना


नयी दिल्ली, (वार्ता) भारतीय उद्योग जगत भारत आस्ट्रेलिया व्यापार समझौते के प्रभावी होने से उत्साहित है और उसे पूरा यकीन है कि पांच साल में दोनों देशों के बीच व्यापार 45 अरब डालर तक पहुंच जाएगा।
यह व्यापार के वर्तमान स्तर का दो गुना होगा।

प्रमुख उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने बुधवार को कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (भारत-आस्ट्रेलिया एक्टा) के क्रियान्वयन से माल और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार पांच वर्षों में दो गुना हो कर 45 अरब अमेरिकी डालर तक जा सकता है।

समझौते के त्वरित समापन के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बधाई देते हुए, सीआईआई ने कहा कि 29 दिसंबर 2022 से लागू होने जा रहे भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के बाजार में माल शून्य-शुल्क पर भेजने की छूट तुरंत उपलब्ध
होगी।

सीआईआई की निर्यात-आयात समिति के अध्यक्ष और पैटन इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय बुधिया ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया और भारत रणनीतिक और आर्थिक भागीदारों के रूप में तेजी से एक साथ काम कर रहे हैं।
भारत ऑस्ट्रेलिया एकटा एक नयी राह खोलने वाला समझौता है जिससे दोनों देशों में उद्योगों को विशाल अप्रयुक्त क्षमताओं को भुनाने का मौका मिलेगा।

श्री बुधिया ने कहा कि न केवल इस समझौते से निवेश, बाजार में आसन प्रवेश, अतिरिक्त रोजगार सृजित करने की उम्मीद है बल्कि यह भारत-प्रशांत क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला है।
इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया ने अपने यहां आयात होने वाले सभी प्रकार के उत्पादों में से 98.3 प्रतिशत पर शुल्क पहले दिन से शून्य कर दिया है तथा शेष 1.7 प्रतिशत पर धीरे-धीरे पांच वर्षों में भारत को शून्य शुल्क पर निर्यात करने का लाभी मिलने लगेगा।

भारत अपने यहां आयात होने वाले उत्पवादों में से 70.3 प्रतिशत के लिए ऑस्ट्रेलिया को शून्य-शुल्क पर प्रवेश देगा।
इनमें से 40.3 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क पहले दिन से और शेष 30 पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
भारत ने कोयले, एल्यूमिना कैलक्लाइंड, मैंगनीज अयस्क, कॉपर कॉन्संट्रेट, बॉक्साइट, भेड़ का मांस, रॉक लॉबस्टर, मैकाडामिया नट्स, चेरी और ऊन पर शून्य शुल्क पहुंच की पेशकश की है।

सीआईआई ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया से स्टील और एल्युमीनियम सहित कई क्षेत्रों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने के अलावा, ईसीटीए ऑस्ट्रेलिया से निवेश बढ़ाने की सुविधा भी देगा और भारतीय विनिर्माण का समर्थन करेगा।

भारत के लिए श्रम-गहन क्षेत्रों के उत्पादों में फायदा होगा जिन पर वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में 4-5 प्रतिशत का शुल्क लगता है।
इनमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, फर्नीचर, खेल के सामान, आभूषण, मशीनरी, रेलवे वैगन और चुनिंदा कृषि और समुद्री उत्पाद तत्काल लाभान्वित होंगे।

कोलकाता में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवधन परिषद (ईईपीसी) के क्षेत्रीय निदेशक बी डी अग्रवाल ने भी कहा कि आस्ट्रेलिया के साथ उदार व्यापार के समझौते से स्टील, एल्युमिनियम और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार 45-50 अरब डालर तक पहुंच जाएगा।

नोएडा एसईजेड के विकास आयुक्त बिपिन मेनन ने कहा कि भारत ऑस्ट्रेलिया का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में 106.5 प्रतिशत की छलांग के साथ 25.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ऑस्ट्रेलिया में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 54.9 प्रतिशत बढ़कर 2021-22 में 1.24 अरब डालर रहा।
यह दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों के महत्व को रेखांकित करता है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि पांच साल के भीतर आस्ट्रेलिया के साथ माल में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक और सेवाओं में व्यापार 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगा।

कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूतावास रोवन एन्सवर्थ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता ऑस्ट्रेलियाई निर्माताओं को उनकी आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन को मजबूत करने, व्यापार विविधीकरण को बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों को दूर करने में मदद करेगा, जबकि हमारे दोनों पूरक को बेहतर ढंग से जोड़ेंगे।

विदेश व्यापार उप-महानिदेशक कोलकाता, आनंद मोहन मिश्रा ने कहा कि हाल के वर्षो में भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों ने परिवर्तनकारी विकास के नए आयाम तय किए हैं।

जीजेईपीसी के पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष, ईआर पंकज पारेख ने कहा कि आस्ट्रेलिया के साथ समझौता भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की एक बड़ी उपलब्धि है।

प्लास्टिक निर्यातकों के मंच प्लेक्सकॉनसिल की क्षेत्रीय समिति के सदस्य ललित अग्रवाल ने कहा भारत से संयुक्त अरब अमीरात के लिए प्लास्टिक की निर्यात क्षमता पांच अरब डालर और ऑस्ट्रेलिया के लिए छह अरब डालर है।

भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भी व्यापाक आर्थिक समझौता किया है जो एक मई से लागू हो गया है।


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