शैक्षणिक संस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण करने की होड़


संजय गांधी महाविद्यालय की बन गये दर्जनों मकान, अतिक्रमणकारियों की सूची बनने के बाद भी कार्यवाई ठंडे बस्ते में

सीधी : जिले के शासकीय शैक्षणिक संस्थानों की खाली भूमि पर अतिक्रमण करने की होड़ मची हुई है। यह सिलसिला कई दशकों से चल रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही सार्थक तरीके से नहीं हो पा रही है।जिला मुख्यालय में ही संजय गांधी महाविद्यालय की करीब पांच एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। इसको राजस्व अमले द्वारा चिन्हित भी किया गया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। कई बार महाविद्यालय की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन कार्यवाही को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी वजह से करोड़ों की बेशकीमती भूमि पर आलीशान इमारते बनी हुई हैं।

अतिक्रमणकारियों में महाविद्यालय के कई सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं जिनके द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान से ही खाली भूमि पर अतिक्रमण जमा लिया गया था। इसके अलावा कई दबंगों द्वारा महाविद्यालय की कीमती भूमि पर सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण किया गया है। कुछ लोग तो अतिक्रमण करने के लिए अस्थाई साधन अपनाए गए हैं तो कुछ लोगों द्वारा पक्के निर्माण कार्य कर लिए गए हैं। जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय संजय गांधी महाविद्यालय की बेशकीमती भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा कई बार कॉलेज की भूमि का सीमांकन कर अतिक्रमण का चिन्हांकन भी कराया गया है। लोगों द्वारा कॉलेज की भूमि पर अतिक्रमण कर आलीशन ईमारते तान ली गई हैं। सीमांकन के लिए जिला स्तरीय टीम का भी गठन किया गया था।

अपर कलेक्टर के नेतृत्व में करीब एक वर्ष पूर्व राजस्व अमले द्वारा सीमांकन की कार्यवाही की गई थी। लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार वह फाइल ही गायब हो गई है। राजस्व अमला कई बार अतिक्रमण का चिन्हांकन भी कर चुका है लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही किसी न किसी कारण से ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। यही स्थिति सीएम राइज स्कूल के रूप में चिन्हित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीधी की भी है। उक्त विद्यालय के पास साढ़े सात एकड़ भूमि थी जिसमें से दो एकड़ भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। जिसमें दबंगों द्वारा आलीशान मकान भी बना लिए गए हैं। सीएम राइज स्कूल के रूप में चिन्हांकन होने के बाद इस स्कूली की भूमि का सीमांकन राजस्व विभाग द्वारा किया गया था जिसमें 9 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए थे।

जिनके द्वारा स्कूल की भूमि में अतिक्रमण कर आलीशान इमारते खड़ी कर ली गई हैं। इनमें से दो लोगों के विरूद्ध न्यायालय से डिक्री पारित हो चुका है। शेष 7 अतिक्रमणकारियों को तहसीलदार गोपद बनास द्वारा करीब 5 माह पूर्व अतिक्रमण के संबंध में नोटिस जारी की गई थी। जिसमें जवाब संतोष जनक नहीं होने पर बेदखली का आदेश जारी किया जा चुका है। फिर भी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नहीं की जा रही है। दरअसल राजस्व अमले की इसी लापरवाही के चलते जिले में शासकीय महाविद्यालयों एवं स्कूलों की भूमि पर अतिक्रमण करने में दबंग पीछे नहीं रहते। इसके अलावा जिला मुख्यालय के तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों की भी खाली भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उनके द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने के बाद उस पर पक्के निर्माण कार्य भी कर लिए गए हैं।

ठंडे बस्ते में कैद हो जाती है कार्यवाई
जिले के शासकीय शैक्षणिक संस्थानों को शासन द्वारा आवश्यकतानुसार काफी भूमि आवंटित की गई थी जिससे भवन एवं अन्य निर्माण कार्य के बाद भविष्य में भी जरूरतों के अनुसार यहां पर निर्माण कार्य होते रहे। वर्षों पहले शैक्षणिक संस्थानों की आवश्यकता के अनुसार भवन बनाए गए थे। बड़े शैक्षणिक संस्थानों के बाद खेल मैदान की सुविधा भी है। सालों साल तक शैक्षणिक संस्थानों की भूमियों के खाली होने के कारण दबंगों की नीयत खराब हो गई और उनके द्वारा सांठगांठ बनाकर बेशकीमती भूमियों पर अतिक्रमण करना शुरु कर दिया गया।

इस संबंध में कुछ शैक्षणिक संस्थानों के प्रभारियों द्वारा राजस्व अमले के पास लिखित रूप से शिकायत भी की गई लेकिन दबंगों की पकड़ के आगे उसमें कोई कार्यवाही करने की बजाय शिकायत को ही ठंडे बस्ते में कैद करने का सिलसिला वर्षों से शुरू है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जिले के अग्रणी महाविद्यालय संजय गांधी महाविद्यालय की करीब 5 एकड़ भूमि में वर्षों से किया गया अतिक्रमण है। यहां दबंगों द्वारा आलीशान हवेली भी शासकीय भूमि में बनाने में कोई गुरेज नहीं किया। इसी तरह जिला मुख्यालय में संचालित सीएम राइज स्कूल शा.कन्या उच्च.माध्य. विद्यालय की करीब दो एकड़ भूमि में दबंगों द्वारा आलीशान भवन बना लिए गए हैं।


नव भारत न्यूज

Next Post

पांच साल बाद हटा भूमियों के क्रय,विक्रय एवं नामांतरण पर प्रतिबंध

Sat Dec 3 , 2022
मामला ग्राम पिपराकुरंद का, सवालों के घेरे में जिला प्रशासन सिंगरौली :अक्टूबर 2018 के महीने में बैढऩ ब्लाक स्थित पिपराकुरंद गांव के भूमियों के अंतरण एवं नामांतरण पर तत्कालीन कलेक्टर ने रोक लगा दिया था। करीब 5 साल बाद भूमियों के क्रय, विक्रय,नामांतरण, विभाजन एवं रजिस्ट्री पर प्रतिबंध को जिला […]