सीएमएचओ ऑफिस पहुंची एसआईटी ने जप्त की 50 फाइलें


आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा: किडनी अस्पताल भी धमकी, खंगाले दस्तावेज
जबलपुर: सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत हुई गड़बड़ी की जांच के लिए गठित एसआइटी शुक्रवार को सीएमएचओ ऑफिस पहुंची जहां सीएमएचओ संजय मिश्रा ने प्रकरण से जुड़ी 50 मरीजों की फाइलें जांच टीम को उपलब्ध कराई है। यह फाइलें उन मरीजों की है जिनका आयुष्मान योजना के तहत किडनी अस्पताल में इलाज हुआ। सभी फाइलें एसआईटी जप्त करने के बाद एक बार फिर किडनी अस्पताल पहुंची और यहां दस्तावेजों एवं अन्य फाइलों को खंगाला। करीब 2 घंटे तक एसआईटी की टीम ने अस्पताल में डेरा डाला। इस दौरान लंबी छानबीन की गई जिसमें नई जानकारियां भी एसआईटी के हाथ लगी है।
कर्मचारियों ने खोल दिए राज
बताया जाता है कि अस्पताल के कर्मचारियों से भी एसआईटी ने पूछताछ की। जांच में यह बात भी सामने आई कि अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों को मरीज बनाकर आयुष्मान योजना के तहत कागजों में उपचार किया गया। अस्पताल में उन्हें पांच दिन भर्ती बताया गया था। इसके बाद शासन से जो राशि मिली, उसमें से भी कुछ अंश उन्हें दिया गया था। इतना ही नहीं इन कर्मचारियों को उसी माह अस्पताल से वेतन भी दिया गया। जब जांच टीम ने इन कर्मचारियों से पूछताछ की तो उन्होंने नई जानकारियां एसआईटी को दी है। कर्मचारियों से जुड़े दस्तावेज भी जप्त किए गए। जिस पर जांच चल रही है।
कई सवालों पर चुप्पी साधे थे पाठक दंपत्ति
जेल में बंद डॉ. पाठक दंपत्ति से एसआईटी ने कल लंबी पूछताछ की। आयुष्मान कार्ड धारकों और अकाउंट समेत अन्य बिन्दुओं को लेकर पूछताछ हुई है। अस्पताल की संचालक डा. दुहिता पाठक और उसके पति डा. अश्विनी पाठक से एसएआइटी ने कोर्ट के निर्देश पर पूछताछ की थी। काफी देर तक डा. दंपती से एसआइटी के सवाल किए। पूछताछ के दौरान एसआईटी के कई ऐसे सवाल थे, जिनका जवाब नहीं मिल सका। पूछताछ के दौरान किए गए कई सवालों पर पाठक दंपत्ति ने चुप्पी साध रखी थी।
क्या है मामला
विदित हो कि पुलिस की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर विगत 26 अगस्त को सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में छापा मारा था। उस समय अस्पताल के अलावा बाजू में होटल वेगा में भी छापा मारा गया था। जांच के दौरान होटल वेगा और अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी मरीज भर्ती पाए गए थे। अस्पताल संचालक दुहिता पाठक और उसके पति डा.अश्विनी कुमार पाठक ने कई लोगों को फर्जी मरीज बनाकर यहां रखा था। जांच का दायरा बढ़ा तो यह बात सामने आई कि किडनी हॉस्पिटल में दो से ढाई साल में योजना के तहत चार हजार मरीजों का इलाज हुआ था जिसके एवज में सरकार द्वारा तकरीबन 13 बारह करोड़ रुपये का भुगतान अस्पताल को किया गया था। प्रकरण में डॉक्टर दंपत्ति वर्तमान में दोनों जेल में बंद हैं।


नव भारत न्यूज

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