डिजिटल पेमेंट में भारत सिरमौर


डिजिटल पेमेंट के मामले में भारत दुनिया में नंबर एक की स्थिति में आ गया है. दूसरे नंबर पर चीन और तीसरे नंबर पर अमेरिका है. भारत में प्रतिदिन औसतन 28.4 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन किया जा रहा है जो विश्व भर में सबसे अधिक है.डिजिटल भुगतान के मामले में सिर्फ विकासशील देशों के लिए ही भारत उदाहरण नहीं बना है बल्कि विकसित देश भी भारत से सीख ले रहे हैं. इस मामले में भारत का भीम एप और यूपीआई प्रणाली गेमचेंजर साबित हो रही है. दुनिया के 50 देश यूपीआई प्रणाली अपनाने की कोशिश कर रहे है. गत वित्त वर्ष 2021-22 में 8800 करोड़ डिजिटल भुगतान का ट्रांजेक्शन किया गया. जबकि इस साल 24 जुलाई तक 3300 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन किया गया. चालू वित्त वर्ष में 566 लाख करोड़ रुपए का डिजिटल ट्रांजेक्शन किया जा चुका है. नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक यूनिफायड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से इस साल अगस्त माह में 10.72 लाख करोड़ रुपए का 6.57 अरब डिजिटल ट्रांजेक्शन किया गया, जो इस साल जुलाई के मुकाबले ट्रांजेक्शन टर्म में 4.62 फीसद अधिक है.

मोबाइल भुगतान वर्ष 2025 तक 7,092 हजार अरब रुपये के कुल डिजिटल भुगतान का लगभग 3.5 प्रतिशत होगा, जो अभी एक प्रतिशत है. अभी मोबाइल भुगतान का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 16 करोड़ है, जिनके इस अवधि में बढक़र करीब 80 करोड़ हो जाने का अनुमान है. वॉलेट यूजर्स आधार और भुगतान की आवृत्ति दोनों में निरंतर इजाफा में अहम भूमिका निभाते रहेंगे. वर्ष 2025 तक वॉलेट की पैठ बढऩे की उम्मीद है और कम आय छोटे लेन-देन को बढ़ावा देगी. डिजिटल भुगतान से भारतीय रिजर्व बैंक को कम नोट छापने पड़ रहे हैं. इस बार दिवाली में भी देखा गया कि कैश की बजाय लोगों ने डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी. एक समय देश में नकदी में भुगतान का चलन 84 फ़ीसदी तक बढ़ गया था. रिजर्व बैंक और अनेक अर्थशास्त्रियों ने इस पर चिंता जताई थी,लेकिन 2016 के नोट बंदी के बाद डिजिटल पेमेंट का उपयोग बढा़ और अब यह स्थिति है कि डिजिटल पेमेंट 70 फ़ीसदी तक हो रहा है. भविष्य में इसके 85 फ़ीसदी तक बढऩे की संभावना है.डिजिटल पेमेंट के अनेक फायदे हैं. इससे वैध मुद्रा का चलन बढ़ता है और कालाबाजारी कम होती है. डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड पर होने से सरकार को पता चल जाता है कि कहां, किस ने, कितना खर्च किया ? इससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है. डिजिटल पेमेंट का सबसे अधिक उपयोग केंद्र सरकार को डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के तहत हो रहा है. सरकार डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के 9:50 करोड़ लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करती है. इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है. डिजिटल पेमेंट को सबसे अधिक युवाओं ने अपनाया है. माना जा रहा है कि 90 फ़ीसदी तक युवा आजकल सारा पेमेंट ऑनलाइन करते हैं. डिजिटल पेमेंट बढऩे के कारण जीएसटी संग्रहण भी लगातार बढ़ रहा है. कुल मिलाकर इससे सरकार के राजस्व में वृद्धि हुई है और हिसाब किताब में आसानी हुई है. जाहिर है डीजल डिजिटल पेमेंट ने देश में एक तरह से क्रांति कर दी है. प्रधानमंत्री ने जब डिजिटल पेमेंट की आवश्यकता पर लोकसभा में संबोधन दिया था, तो अनेक विपक्षी सांसदों ने उनकी हंसी उड़ाई थी और कहा था कि गरीब निरक्षर ग्रामीण जन इसका उपयोग कैसे करेंगे ? चिदंबरम ने कहा था कि क्या सब्जी वाले को डिजिटली पेमेंट दिया जाएगा ? आज यह सब आशंकाएं निर्मूल साबित हुई हैं. चाय वाले,सब्जी वाले और ठेले खोमचे पर सामान बेचने वाले भी आसानी से डिजिटल पेमेंट लेने लगे हैं. यूपीआई का इस्तेमाल गरीब भी कर रहा है.जाहिर हैडिजिटल पेमेंट ने पूरा परिदृश्य बदल दिया है.आज दुनिया इसको मान रही है.


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