जम्मू कश्मीर में चुनाव जरूरी


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हाल ही में जम्मू कश्मीर के 2 दिन के दौरे पर थे, जहां उन्होंने लंबे समय तक आतंकवाद से ग्रस्त रहे राज्य में अनेक घोषणाएं की. इनमें सबसे महत्वपूर्ण घोषणा गुज्जर बकरवाल और पहाड़ी समाज को आरक्षण देने की थी. अमित शाह ने जम्मू कश्मीर की आर्थिक तरक्की के लिए पैकेज भी घोषित किए. अमित शाह ने बारामुला में एक रैली को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि इस समय निर्वाचन आयोग परिसीमन और मतदाता सूची में संशोधन का काम कर रहा है. जैसे ही यह काम पूर्ण हो जाएगा, राज्य में चुनाव करा लिए जाएंगे. माना जा रहा है कि जम्मू कश्मीर में अगले वर्ष अप्रैल तक चुनाव करा लिए जाएंगे. चुनाव की घोषणा होते ही जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा और वहां विधानसभा स्थापित की जाएगी. फिलहाल जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा है तथा लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा राज्य की कमान संभाले हुए हैं. अमित शाह द्वारा चुनाव कराने की घोषणा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में स्थाई बहाली तभी आ सकती है जब जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी सरकार चलाएं. केंद्रीय मंत्री अमित शाह के दौरे का कथित गुपकार नेताओं ने विरोध किया है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 बहाल करने की बार-बार मांग की है. जम्मू कश्मीर के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने हाल ही में अपनी नई पार्टी स्थापित की है. उन्होंने इस दौरान संवाददाताओं से कहा कि मैं राज्य की जनता को किसी तरह का गलत आश्वासन नहीं देना चाहता और ना ही जनता को धोखे में रखना चाहता हूं. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह हकीकत है कि अब राज्य में फिर से धारा 370 बहाल नहीं हो सकती. दरअसल, जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद से राज्य में नजारा बदल गया है. वहां विकास कार्य हो रहे हैं, सडक़ें बन रही हैं, बिजली गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है, रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा है. साथ ही पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश हो रही है. इसी का नतीजा है कि इस साल के अंत तक जम्मू कश्मीर में 75 लाख सैलानियों के आने का अनुमान है, जिनमें 30 लाख के लगभग कश्मीर घाटी में आएंगे. शेष वैष्णो देवी के कारण जम्मू जाएंगे. 3 साल पहले तक यह संख्या 6 लाख के लगभग थी. जाहिर है धारा 370 हटाने के बाद से पर्यटन उद्योग में अत्यधिक तेजी आई है. जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन, कुटीर एवं लघु उद्योग और सेवफल की खेती पर निर्भर है. इस बार राज्य में रिकॉर्ड तोड सेव फल का उत्पादन हुआ है. राज्य के सेव फल उत्पादकों को उनके फल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं. इन सब का फायदा मिला है. जहां तक आतंकवाद का प्रश्न है तो जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में 80 फ़ीसदी की कमी आई है. अभी आतंकवाद की बड़ी घटनाएं होना बंद हो गई हैं. सुरक्षाबलों के कारण आतंकवादी बम विस्फोट और सामूहिक हत्याकांड जैसी गतिविधियां नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए उन्होंने तरीका बदलकर टारगेट किलिंग करना प्रारंभ किया है. अमित शाह के दौरे के पूर्व आतंकियों ने एक उच्च पुलिस अधिकारी की हत्या की. इस तरह की टारगेट किलिंग जरूर हो रही है लेकिन आम तौर पर राज्य में शांति है. सबसे खास बात यह है कि आतंकवादियों को अब स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है. सीमा पार से घुसपैठ भी कम हुई है. टारगेट किलिंग पर काबू पाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य प्रशासन लगातार हरकत में हैं. जम्मू कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान ने जितनी बार भी बयान दिया है. उसको मुंह की खानी पड़ी है. हाल ही में जब समरकंद में तुर्की ने जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाना चाहा तो भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस का मुद्दा उठाकर तुर्की को चुप करा दिया. जाहिर है पाकिस्तान जम्मू कश्मीर को लेकर बौखलाया हुआ है. इस कारण से उसकी कोशिश राज्य को अशांत करने की है. इसलिए जम्मू कश्मीर की शांति का स्थाई समाधान यही है कि वहां जल्द से जल्द चुनाव कराए जाएं और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए.


नव भारत न्यूज

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