महज़ निष्कासन से हो पाएगा भाजपा का शुद्धिकरण … ?


महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित

नौकरी दिलाने के बहाने भोपाल में महिला की अस्मत लूटने के आरोपी शशिकांत सोनी को भले ही भाजपा ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है किंतु जबलपुर के भाजपाई हलकों में इस बात की चर्चा जोरों से चल रही है कि शशिकांत सोनी जैसे शराफत का नकाब ओढ़े रखने वाले कई और नेता हैं जिन पर ना प्रादेशिक संगठन ध्यान दे रहा है और ना ही स्थानीय संगठन।भीतर खानों में यह चर्चा बलवती है कि बड़े नेताओं की मिजाजपुर्सी करके यह पद हासिल कर लेने में कामयाब रहे नेताओं की चारित्रिक जांच की जानी चाहिए साथ ही शशिकांत जैसे नेताओं को प्रश्रय देने वाले बड़े नेताओं के नाम पर भी संज्ञान प्रदेश संगठन को लेना चाहिए। चर्चा है कि शशिकांत सोनी को शुरुआती समय में नगर भाजपा की सबसे ताकतवर हस्ती का वरदहस्त प्राप्त था किंतु कुछ समय पूर्व कथित हस्ती ने अपरिहार्य कारणवश उससे दूरी बना ली थी, इसके बाद भी शशिकांत को नगर संगठन से ताकत मिलती रही।

लिहाजा संगठन से सत्ता तक की पहुंच बनाए रखने में शशिकांत सफल रहा, साख बचाने के लिए भाजपा ने भले उसका निष्कासन कर हाथ झाड़ लिए हैं परंतु वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को दर्द से छलकने लगा है,उनको मलाल है कि विश्वसनीयता तथा बेदाग होने के बाद भी पार्टी में उनकी पूँछ परख नहीं हो रही है, जबकि नेताओं की “विशिष्ट सेवा” करने वाले ऐरे – गैरे चमकदार पदों पर कब्जा जमाने में सफल रहे हैं। शशिकांत सोनी प्रकरण उजागर होने के बाद अंदरखाने इस बात पर भी ज्यादा चर्चा की जा रही है कि भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ती जा रही है। ऐसे में यदि चाल, चरित्र और चेहरे पर ध्यान नहीं दिया गया तो पार्टी को आगे भी शर्मसार होना पड़ सकता है।

कांग्रेसियों ने बहाया पसीना,भा.जपा विधायक ने बनाई दूरी ….

शेष रह गये नगरीय निकाय चुनाव के तहत सिवनी के लखनादौन नगर परिषद में भी चुनाव कराये गये। महाकौशल के अन्य जिलों से कुछ ज्यादा ही यहां का चुनाव चर्चित रहा। दरअसल अध्यक्ष पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण महिला नेत्रियों के लिए प्रतिष्ठापूर्ण बन गया था, वहीं उनके पतियों और राजनीतिक आकाओं के लिए भी चुनौती भराबन गया था। लगभग विधानसभा स्तर का रूप अख्तियार कर चुके चुनाव में शराब वितरण से लेकर धनबल-बाहुबल का जमकर उपयोग हुआ।

कांग्रेस की ओर से लखनादौन विधायक योगेन्द्र सिंह बाबा एवं कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारयिों ने जमकर पसीना बहाया, वहीं लखनादौन नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान सिवनी विधायक दिनेश राय मनुमुन ने अपने ही गढ़ से दूर बनाकर रखी, जबकि उनके बेहद करीबी और कट्टर समर्थकोंं की पत्नियां चुनाव मैदान में प्रतिद्वंदियों से लोहा ले रहीं थीं। इसके पीछे स्पष्ट कारण क्या थे, यह तो उजागर नहीं हुआ है,किंतु सूत्र बता रहे हैं कि टिकट वितरण से उपजे असंतोष और अपने ही सर्मथकों के बीच अचानक बढ़ी प्रतिद्वंदिता के पचड़े में दिनेश राय मुनमुन फंसना नहीं चाह रहे थे, लिहाजा 2023 के विधानसभा चुनाव पर नजरें जमाए मुनमुन ने लखनादौन नगर परिषद के चुनाव से दूरी बनाये रखी। इसके पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि पिछले चुनाव के मुकाबले लखनादौन में बगावत और निर्दलियों के पक्ष में ज्यादा माहौल नजर आया, संभवत: मुनमुन ने इस वजह से भी अपने ही गढ़ से दूरी बना रखी।

बिसेन की बयान बाजी….

नगरीय निकाय चुनाव में प्रचार के दौरान 22 सितम्बर को कमलनाथ के खिलाफ विवादित बयान देकर भाजपा के पूर्व मंत्री एवं पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने कमलनाथ को बालाघाट के विधान सभा क्रमाँक 111 से चुनाव लडऩे की चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें भाजपा का एक अदना सा कार्यकर्ता चुनाव में हरा देगा। उनके इस बयान पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं जिले के कददावर कांग्रेसी नेता विश्वेश्वर भगत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि गौरीशंकर विसेन का ऐसा बयान उनके मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है। विश्वेश्वर भगत ने कहा कि 2023 में अपने स्थान पर अपनी पुत्री को चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं , जिसके राजनीतिक भविष्य की चिंता को लेकर कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति अमर्यादित बयान वह दे रहे हैं। कभी वह भोपाल में कमलनाथ जी के सामने दोनों हाथ बांधकर खड़े थे और उन्हें खीर परोस रहे थे। भगत ने नसीहत दी कि अहंकार रावण का भी चुर-चूर हुआ था। दरअसल जिला पंचायत चुनाव में गौरीशंकर बिसेन के प्रभावी प्रचार के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन लचर रहा था, हालांकि विभिन्न समितियों के सभापति चुनाव में अपने सर्मथकों को अध्यक्ष निर्वाचित कराकर बिसेन ने इसकी भरपाई करा ली थी, तबसे ही बालाघाट में बिसेन पहले से भी ज्यादा तीखी बयानबाजी कर रहे हैं।


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