वित्तीय स्थिरता केलिए इंश्योरेंस की अहमियत को समझने की जरूरत-आरएम विशाखा एमडी और सीईओ


मुंबई 20 सितंबर –   इंश्योरेंस जोखिम केप्रबंधन (रिस्क मैनेजमेंट) से जुड़ा एक टूल है. ग्राहक अपने विश्वास, आकलन औरजोखिम लेने की क्षमता और खासकर संकट के समय इस टूल का इस्तेमाल करते हैं. इस सेक्टर ने कई वैश्विक महामारियोंको देखा है. इंश्योरेंस अपना बिजनेस मॉडल तैयार करते समय इन जोखिमों को स्वाभाविकतौर पर ध्यान में रखते हैं. वे संभावित जोखिम का विश्लेषण करते हैं और आने वालीपरिस्थितियों के हिसाब से तैयारी करते हैं.   इस अभूतपूर्व संकट नेसिस्टम, प्रोडक्ट्स एवं इंडस्ट्री के प्रोसेस को चुनौती दी है. बिजनेसेज वर्कफोर्सकी स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं, लिक्विडिटी के संकट, क्राइसिसमैनेजमेंट के लिए नई रणनीतियों को अपनाने और इस कठिन समय रिस्पांस मैकेनिज्म कोअपनाने जैसी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ये सेक्टर अपने रिजर्व औरशेयरहोल्डर्स के सपोर्ट के बल पर इन संकटों से निकल सकता है.  अपने पॉलिसीहोल्डर्स केहितों की रक्षा में इंश्योरेंस इंडस्ट्री एकसाथ खड़ी है. इन अभूतपूर्वपरिस्थितियों में इंश्योरेंस कंपनियां टेक्नोलॉजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतरबनाने का काम कर रही हैं. इसके साथ ही वे डिजिटल माध्यम से सॉल्यूशन एवं सर्विसउपलब्ध कराकर एवं डिस्क्लोजर में पूरी पारदर्शिता बरतते हुए स्टेकहोल्डर्स के साथसमय-समय पर संवाद कर रही हैं. इसके पीछे का मकसद सरल वित्तीय सुरक्षा से जुड़ेइंस्ट्रुमेंट के अनूठे आइडिया को लेकर एक बार फिर विश्वास कायम करने की है.    लोग कोविड-19 के वित्तीयअसर को लेकर काफी अधिक चिंतित हैं. वे बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से अपने खर्चों औरबचत से जुड़ी प्लानिंग कर रहे हैं. अधिकतर लोग धन के नुकसान और दोहरे अंकों मेंनिगेटिव ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर चिंतित हैं. स्टॉक मार्केट में टूट औरअस्थिरता भरे माहौल की वजह से रिस्क मैनेजमेंट के साथ-साथ इंश्योरेंस को लेकर उनकानजरिया बदल गया है.   इन परिस्थितियों मेंइंश्योरेंस प्रोवाइडर्स की भूमिका और बढ़ गई है. वित्तीय सुरक्षा के लिए जोखिम कमकरने वाले टूल के रूप में इंश्योरेंस की अहमियत और इंश्योरेंस को प्राथमिकता दिएजाने की जरूरत एक बार फिर से महसूस हो रही है.  इंश्योरेंस लोगों और उनके परिवारों की वित्तीय बेहतरी को सुनिश्चित करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,जैसे मेडिकल सर्विसेज शारीरिक और मानसिक कल्याण को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाती हैं. इंश्योरेंस को प्राथमिकता देने और ‘सबसे पहले लाइफ इंश्योरेंस’ लेने की दिशा में मानसिकता में परिवर्तन की दरकार है.  एक एसेट क्लास केरूप में इंश्योरेंस मोर्टेलिटी, मॉर्बडिटी और मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाता है.बहुत जल्दी मौत और काफी लंबे समय तक जीवन जैसे वाक्य से आप मोर्टेलिटी औरमॉर्बिडिटी के जोखिम को समझ सकते हैं. हालांकि, मार्केट में उथल-पुथल को हमेशाजोखिम बनाम रिटर्न, इलिक्विड, लॉन्ग टर्म नेचर, लॉक इन और इसी तरह के अन्य टर्म्सके दायरे में देखा जाता है. मौजूदा समय में मार्केट के उतार-चढ़ाव को आपकी लंबीअवधि के निवेश और रिटर्न्स पर पड़ने वाले असर से आसानी से समझा जा सकता है.इंश्योरेंस कंपनियों की इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट करने की फिलॉसफी, खास कर पार एंडनॉन-पार प्रोडक्ट्स (एंडोमेंट और मनी बैक), एसेट लायबलिटी मैचिंग और मैनेजमेंट केसाथ लंबी अवधि के निवेश पर आधारित होती है. ये इंश्योरेंस कंपनियों और अन्य एसेटक्लास में बुनियादी अंतर पैदा करने वाला होता है, जिस पर आम तौर पर ध्यान नहींदिया जाता है. इसमें मार्केट के उतार-चढ़ाव के समय प्रोटेक्शन की क्षमता होती है जिससेइंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसी खरीदते समय की गई प्रतिबद्धता का सम्मान करती हैं.  इस महामारी कीअजीब और अनिश्चितता से भरी प्रकृति से अस्तित्व को लेकर भी एक दार्शनिक विचारउभरता है. ऐसे वक्त में ‘आज जियो, हो सकता है कल कभी ना आए’ के पक्ष और विरोध में कई तरह की दलीलें दी जाती हैं. हालांकि, ये याद रखनाजरूरी है कि इंसानों में अस्तित्व को बचाए रखने के मजबूत गुण होते हैं, जिसकी वजहसे वे नई व्यवस्थाओं को आसानी से अपना लेते हैं. इस तरह की लचीलता से हम सभी कोकोविड-19 की परिस्थितियों से पूरी तरह उबरने में मदद मिलती है. ऐसे में यह जरूरीहै कि हम थोड़े समय को ध्यान में रखकर कोई फैसला ना करें. एक मजबूत सलाह ये है किभविष्य की योजनाओं को ऐसे ही जाने मत दीजिए और प्रीमियम के भुगतान को रोकिए मत.इससे लंबी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है, जो निश्चित होता है.प्लान कीजिए, तैयारी कीजिए और प्रीमियम जमा करना जारी रखिए. इंवेस्टमेंट के पीछेकी रणनीति ‘सेफ्टी फर्स्ट’ की रणनीति पर बेस्ड होती है. चाहे यह निवेश इक्विटी या डेटफंड्स में हैं, ऐसा निवेश लंबी अवधि के लिए होता है, जिसका मकसद लोगों कोउतार-चढ़ाव भरे वाले समय में सपोर्ट करना होता है.   इंडस्ट्री कोविड-19 केप्रसार के बीच प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स की मांग को समझती है. हम लोगों में से सभीइंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की डिजिटल तरीके से बिक्री और सर्विस उपलब्ध कराने से जुड़ीपरिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर करने के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास कररहे हैं. ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूशन पोर्टल्स भी ये कहते हैं कि लाइफ इंश्योरेंस मेंइस अवधि के दौरान 20 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली. यह इंश्योरेंस की अहमियत केबारे में संकेत कर रहा है.   कोविड-19 ने देश कोप्रतिकूल रूप से ऐसे प्रभावित किया है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.इंश्योरेंस कंपनियां और ग्राहक दोनों इस बात को समान रूप से समझते हैं कि महामारीके प्रसार को रोकने के लिए सरकार के उपायों को सपोर्ट करने के लिए उनकी सामाजिकजिम्मेदारी क्या है. भारत की वित्तीय स्थिति को वापस पटरी पर लाने के लिए हमें हरसंभव तरीके से अपना योगदान करना चाहिए. इंश्योरेंस सेक्टर में लंबी अवधि के निवेशसे राष्ट्र निर्माण में बड़ी मदद मिल सकती है. इसके साथ ही मार्टेलिटी, मॉर्बडिटीऔर वित्तीय उतार-चढ़ाव को लेकर जरूरी रिस्क मैनेजमेंट क्षमता हासिल हो सकती है.

     आरएम विशाखा एमडी और सीईओ, इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड  


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