सिंधिया विजयवर्गीय मुलाकात से भाजपा की राजनीति में हलचल


सियासत

केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अप्रत्याशित और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए सोमवार को कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर जाकर उनसे सौजन्य भेंट की। उनके साथ उनके पुत्र महा आर्यमन सिंधिया भी थे। दरअसल, सिंधिया पिता पुत्र उज्जैन जाने के लिए इंदौर आए थे। सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की शाही सवारी निकली। परंपरा अनुसार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक श्रावण मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि महाराष्ट्रीयन समाज अमावस्या श्रावण मास मानता है। जबकि उत्तर भारत में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक सावन बनाया जाता है। इस कारण से उज्जैन में डेढ़ महीने तक श्रावण मास की शाही पालकी निकलती है। सावन के अंतिम सोमवार को पूर्व सिंधिया रियासत के वंशज भगवान महाकालेश्वर की पूजा करते हैं। यह परंपरा लगातार 200 वर्षों से चली आ रही है।

इसी परंपरा का पालन करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके पुत्र महा आर्यमन सिंधिया उज्जैन आए थे। उज्जैन जाने से पहले उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के नंदा नगर स्थित निवास पर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की।इस अवसर पर रमेश मेंदोला, आकाश विजयवर्गीय, गौरव रणदिवे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे बड़े समर्थक कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट भी मौजूद थे। सिंधिया ने इसे सौजन्य मुलाकात बताया लेकिन इस दौरान उन्होंने जो बयान दिया उससे भाजपा की राजनीति में हलचल मच गई। उन्होंने कहा कि वे कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में भाजपा के लिए काम करते रहेंगे। उनके इस बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आलाकमान कैलाश विजयवर्गीय को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकता है जिसके बारे में ज्योति सिंधिया को पहले से ही पता है और उन्होंने इशारों इशारों में इस बारे में संकेत दिया है।

संभव है कि कैलाश विजवर्गीय आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। यह भूमिका क्या होगी इसके बारे में अटकलें लगना प्रारंभ हो गई हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया का कैलाश विजयवर्गीय के यहां जाना बहुत मायने रखता है। हो सकता है कैलाश विजयवर्गीय और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात प्रदेश में किसी नए राजनीतिक समीकरण को जन्म दें। वैसे अतीत में दोनों नेताओं के बीच संबंध खासे कटु रहे हैं। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा में प्रवेश के बाद कैलाश विजयवर्गीय से संबंध अच्छे करना प्रारंभ किए थे। अभी भी उनके संबंध औसत ही माने जा सकते हैं ऐसे में सिंधिया का कैलाश विजयवर्गीय के यहां जाना राजनीतिक हलकों में खलबली मचा गया।


नव भारत न्यूज

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