ठेकेदारों पर मेहरबान नपा


काम पूरा नहीं हुआ, दे दिए एक करोड़ रुपए

मंदसौर:  नगरपालिका अधिकारियों को ठेकेदारों से जबरदस्त मीठा है। वह सड़क ठेकेदार हो या अन्य किसी काम का ठेका लेने वाला। सड़क ठेकेदारों पर मेहरबानी के तो कई मामले सामने भी आ चुके हैं। इस बार मामला दादा दादी पार्क का है। समयावधि बीतने के बाद भी काम नहीं पूरा नहीं हुआ है। अभी भी यह पार्क कहलाने लायक नहीं है, जबकि ठेकेदार को नपा ने एक करोड़ का भुगतान भी कर दिया। जबकि ठेका एक करोड़ बीस लाख का है।
कहीं गाजर घास तो कहीं जंगली झाडिय़ा
अभी पार्क पूरा बना भी नहीं हैं और बगीचे में जगह-जगह गाजर घास व अन्या कंटीली व जंगली झाडिय़ा उगने लगी हैं। बगीचे के निर्माण में लगाई गई सामग्री भी काफी घटिया हैं और कई जगह से उखडऩे भी लगी हैं। बगीचे में अभी पूरे पौधे भी नहीं लगे हैं और भी कई कमियां हैं। ठेकेदार पर मेहरबानी का आलम यह है कि पानी भी वह नपा का ही उपयोग कर रहा है। यहीं नहीं पौधे भी नपा के कर्मचारियों ने लगाए है।
188 पेड़ों की ली गई पार्क के लिए बलि
188 हरे-भरे पेड़ों की बलि लेकर पार्क का निर्माण शुरु किया गया था। इसे बाद भी इसका उपयोग नहीं हो पा रहा। हकीकत यह है कि रेवास-देवड़ा रोड व तेलिया तालाब की पाल के बीच में केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत विकसित किया जा रहा दादा-दादी पार्क भी ठेकेदार व नगर पालिका के इंजीनियरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया हैं। महंगा ठेका होने के बाद भी ठेकेदार ने यहां ठीक से काम नहीं किया।
ड्राइंग को डाल दिया रद्दी की टोकरी में
स्थिति यह है कि ड्राइंग के हिसाब से ही पार्क में काम नही ंहुआ। यहां निर्धारित ड्राइंग डिजाइन का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया हैं।बगीचे में लगने वाले पौधे भी हल्के व काफी छोटे लगाए। इनमें से अधिकांश तो सूख ही चुके हैं। पाम के पौधे भी अभी तक बड़े ही नहीं हो पाए हैं। चार साल में अब तक यहां बच्चों के लिए झूले-चकरी भी नहीं लग पाए हैं।
फरवरी 2019 में पूरा होना था काम
अमृत योजना में करीब 1.45 करोड़ रुपये का टेंडर दादा-दादी पार्क के लिए निकाला गया था। इसमें लगभग 1.20 करोड़ रुपये में अंकुर सेठिया ने ठेका लिया हैं। टेंडर जुलाई 2018 में हो गए कार्य फरवरी 2019 में शुरु हुआ था। इसके बाद यहां पर 188 हरे-भरे पेड़ों को काटने व जमीन को ठीक करने का काम शुरू हुआ और जमीन विवाद भी निकला। वर्ष 2019 में ही अतिवृष्टि के कारण भी देरी हुई। पर इसके बाद ठेकेदार और नपा इंजीनियरों के बीच सामंजस्य के अभाव के चलते 2022 होने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पा रहा है। पूरे परिसर में 7000 पौधे लगाना थे और अभी आधे भी नहीं लगे हैं। तेलिया तालाब से निकले बड़े पत्थरों पर कलाकृतियां बना कर सौंदर्यीकरण भी किया जाना था। इसके लिए काफी पत्थर भी इकठ्ठे किए गए थे। पर यह सभी अभी एसे ही पड़े हुए हैं। न तो इनको ठीक से रखा गया है और न ही इन पर कोई कलाकृतियां बनाई गई हैं।
काम भी नपाकर्मियों से कराया
हद तो तब हो जाती है जब ठेकेदार ने काम भी नपाकर्मियों से कराया। पानी तो नपा के कुएं से पूरी तरह मुफ्त में दिया ही जा रहा है। इसके बाद भी बगीचे को हरा-भरा नहीं रख पाना ठेकेदार की विफलता ही कही जाएगी। ठेकेदार ने बगीचे में पौधे भी नहीं लगाए थे। इसके लिए भी नपा के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री अरविंद गंगराड़े ने भी ठेकेदार की मदद के लिए नपा की उद्यान शाखा के सभी बागवानों को यहां लगाकर पौधारोपण करा दिया। इसके बाद भी ठेकेदार के लोग बगीचे को हरा-भरा नहीं रख पा रहे हैं और न ही साफ-सफाई हो रही हैं। तालाब की पाल पर भी अभी तक ठीक से घास तक नहीं उगाई जा सकी हैं। पार्क में 35 सोलर पोल लगाने का दावा किया गया हैं पर अभी तक उनमें से आधी भी चालू नहीं हैं। 50 डेकोरेटिव लाइट, हाईमास्ट भी लगे हैं। सीएमओ पीके सुमन ने बताया कि ठेकेदार को एक करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। अगर निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी।


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