खरगोन उपद्रव से किस को लाभ , किसको होगी हानि ?


मालवा निमाड़ की डायरी
मिलिंद मुजुमदार
रामनवमी यानी 10 अप्रैल को खरगोन में उपद्रव हुआ था। एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बावजूद वहां अभी शांति स्थापित नहीं हो सकी है। प्रशासन ने अभी तक कर्फ्यू उठाया नहीं है। कर्फ्यू में ढील के दौरान भी व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोली है इससे पता पड़ता है कि उपद्रवियों ने लोगों के दिलों में कितना गहरा जख्म दिया है। बहरहाल, घटना को लेकर राजनीतिक लाभ और हानि की चर्चा जारी है। कमोबेश सभी राजनीतिक विश्लेषक एकमत होंगे कि खरगोन और सेंधवा की घटनाओं से सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस का हुआ है। खरगोन में कांग्रेस के पूर्व पार्षद की होटल ध्वस्त की गई है जिन पर आरोप है कि उन्होंने भी स्थिति को बिगाड़ने में दंगाइयों का साथ दिया। जबकि सेंधवा में कांग्रेस के नगर अध्यक्ष रहे नेता उपद्रवियों में शामिल थे। खरगोन और सेंधवा का विवाद लंबे समय तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ेगा। मालवा निमाड़ के शहरी क्षेत्रों में इस विवाद का नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा ।
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां की 66 विधानसभा सीटों में से 40 विधानसभा सीटें जीती थी और वह 15 वर्षों बाद वल्लभ भवन के सत्ता में लौट सकी थी, लेकिन इस बार भाजपा ने मालवा निमाड़ में तगड़ी घेराबंदी की है। संघ परिवार भी यहां अतिरिक्त रूप से सक्रिय है। विशेष रूप से उसका फोकस आदिवासी और दलितों पर है। पिछले 2 वर्षों में हुए उपचुनावों में भाजपा को यहां बड़ी सफलता मिली है। आगर विधानसभा की सीट छोड़ दी जाए तो यहां हुए 8 विधानसभा उपचुनाव में से 7 में कांग्रेस भाजपा बड़े अंतर के साथ जीती हैं। उसने खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भी कांग्रेस को पराजित किया। खरगोन और बड़वानी जिले में कांग्रेस ने भाजपा का सफाया कर दिया था लेकिन ताजा घटनाक्रम के कारण भाजपा अब वापसी करेगी।
नेताओं की बात करें तो खरगोन के घटनाक्रम से विधायक रवि जोशी को सीधे नुकसान होगा । कमलनाथ को गलत सलाह दी गई।नतीजा यह रहा कि दंगों की जांच करने वाली समिति में पार्टी अध्यक्ष ने अलीम शेख नामक नेता को भी शामिल किया जो खुद दंगाइयों में शामिल था।जाहिर है अलीम शेख के कारण समिति की विश्वसनीयता समाप्त हो गई है। कमलनाथ ने जांच के लिए यह टीम सज्जन सिंह वर्मा के नेतृत्व में बनाई थी। जब कोई विपक्षी दल इस तरह की जांच समिति बनाता है तो उसका उद्देश होता है शासन और प्रशासन की कमियां ढूंढना तथा सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगाना, लेकिन जिस तरह से समिति का गठन किया गया उससे यह समिति ही विवादों में आ गई है।
मालवा निमाड़ के तीन नेताओं का कद कांग्रेस में बढ़ा
सज्जन सिंह वर्मा और जीतू पटवारी के बाद अब सत्यनारायण पटेल भी कांग्रेस में एक शक्ति केंद्र के रूप में उभरे हैं। सज्जन सिंह वर्मा और जीतू पटवारी तो विधायक हैं लेकिन दो विधानसभा और दो लोकसभा का चुनाव हारने वाले सत्यनारायण पटेल की भी इन दिनों कांग्रेस में तूती बोल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ दोनों ही उनको महत्व देने लगे हैं। इसका कारण यह है कि सत्यनारायण पटेल सीधे प्रियंका गांधी से जुड़ गए हैं। हाल ही में संपन्न उत्तर प्रदेश के चुनाव में वे प्रियंका गांधी की टीम के खास सदस्य थे। उन्होंने मोटरसाइकिलों से उत्तर प्रदेश का दौरा किया और प्रियंका गांधी के प्रचार अभियान को सफल बनाने में मदद की।
यह अलग बात है कि संगठन कमजोर होने के कारण प्रियंका गांधी द्वारा बनाया गया माहौल कांग्रेस के किसी काम ना सका, लेकिन सत्यनारायण पटेल ने अपनी कार्यशैली की छाप प्रियंका गांधी पर छोड़ी है। यही वजह है कि हाल में जब प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा उज्जैन में महाकाल मंदिर के दर्शन करने आए, तो उज्जैन से इंदौर जाने के बाद वे रामेश्वर पटेल के निवास पर भी गए। रॉबर्ट वाड्रा ने खुद कहा कि प्रियंका गांधी ने मैसेज भेज कर उनसे कहा था कि वे रामेश्वर पटेल और सत्यनारायण पटेल के निवास पर अवश्य जाएं।उस दिन रामेश्वर पटेल की बरसी थी इसलिए वहां एक धार्मिक कार्यक्रम किया गया था। रॉबर्ट वाड्रा उस कार्यक्रम में शामिल हुए। रॉबर्ट वाड्रा द्वारा सत्यनारायण पटेल के निवास पर जाना कांग्रेस में हलचल मचा गया। कांग्रेसी जानते हैं कि इन दिनों प्रियंका गांधी का पार्टी में क्या महत्व है। जाहिर है सत्यनारायण पटेल भी कांग्रेस में एक शक्ति केंद्र की तरह उभरे हैं।
रेल परियोजनाओं में तेजी लाना जरूरी
वैसे रेलवे ने ऐलान किया है कि इंदौर दाहोद और इंदौर खंडवा परियोजना को जल्दी से जल्दी पूरा किया जाएगा। इसके लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इंदौर खंडवा के बीच अमान परिवर्तन होना है। इसमें सनावद खंडवा के बीच गेज कन्वर्जन हो चुका है यानी सनावद तक ब्रॉड गेज लाइन डाली जा चुकी है। सनावद से महू के बीच भी बलवाड़ा तक काम प्रारंभ होने वाला है। बलवाड़ा से पातालपानी के बीच परेशानी है क्योंकि यहां घाट सेक्शन लगता है। इसी तरह इंदौर दाहोद परियोजना में इंदौर से टीही तक रेलवे लाइन भी चुकी है। आगामी एक वर्ष के भीतर धार तक रेल की पटरी बिछाने की योजना है।
आदिवासी अंचल धार रेलवे के जरिए इंदौर से जुड़ जाएगा। दोनों परियोजना से निमाड़ और मालवा की आर्थिक स्थिति में मूलभूत परिवर्तन आएगा। यहां के विकास को पंख लग जाएंगे। आदिवासी मजदूरों का पलायन रुक जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं के अलावा इंदौर मनमाड़ रेलवे परियोजना पर भी ध्यान देना चाहिए। यह तीन परियोजनाएं मालवा निमाड़ के भाग्य को बदल सकती हैं। इन योजनाओं पर निगरानी रहे इसके लिए मालवा निमाड़ के सभी सांसदों को सक्रिय रहना पड़ेगा और एकजुटता के साथ रेलवे पर दबाव बढ़ाना पड़ेगा। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी जितने सक्रिय हैं उतने धार,झाबुआ और खरगोन के सांसद नजर नहीं आते हैं। इन सभी सांसदों को समझना चाहिए कि रेलवे के जरिए विकास के नए रास्ते तो खुलते ही हैं,आर्थिक समृद्धि का द्वार  भी खुलता है।

नव भारत न्यूज

Next Post

जिनका रिपोर्ट कार्ड खराब, उनके टिकट काटेगी कांग्रेस

Wed Apr 20 , 2022
हर तीन महीने में सर्वे करा रहे कमलनाथ, विधायकों को प्रदर्शन सुधारने की नसीहत हरीश दुबे ग्वालियर:  कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सर्वे में कमजोर प्रदर्शन वाले कांग्रेस विधायकों को चेतावनी दे दी है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाएं, कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोगों से मेलमिलाप पर […]