मोदी-मॉरिसन के बीच प्रधानमंत्री स्तर की वार्षिक बैठकें आयोजित करने पर सहमति


नयी दिल्ली(वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ सोमवार को दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों की विस्तार से समीक्षा की तथा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाओं पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेता भारत और आस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक भागीदारी के तहत वार्षिक शिखर बैठक की व्यवस्था पर सहमत हुए और इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया आयाम निरुपति किया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर बैठक के तहत दोनों नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की। यह दोनों प्रधानमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए दूसरी शिखर वार्ता थी। पहली आभासी बैठक 2020 में हुयी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार श्री मोदी और श्री मॉरिसन ने पिछली आभासी बैठक के समय स्थापित भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक भागीदारी की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इस भागीदारी के तहत दोनों पक्ष व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, शिक्षा एवं नवप्रवर्तन, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, नयी एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, कोविड-19 से संबंधित अनुसंधान एवं अन्य क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।
दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक मुद्दों पर बढ़ती सहमति पर संतोष जाहिर किया और कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं तथा एशिया प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला, समावेशी और समृद्ध रखने जैसे मामलों में दोनों के हित जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रारंभिक संबोधन में ऑस्ट्रेलिया में बाढ़ के कारण न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड प्रांतों में धन-जन की भारी हानि पर शोक जताया।
श्री मोदी ने प्राचीन भारतीय कलाकृतियों को लौटाने की पहल के लिए आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “आपने जो कलाकृतियाँ भेजी हैं, इनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ कई अन्य भारतीय राज्यों में से अवैध तरीकों से निकाली गयी सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्तियाँ और चित्र हैं और इसके लिए मैं सभी भारतवासियों की तरफ से आपका विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। अब जो मूर्तियां आपने हमें लौटाई हैं और जो सारी चीज़ें लौटाई हैं, उनको सही स्थान पर स्थापित किया जा सकेगा। मैं सभी भारतीय नागरिकों की तरफ से इस पहल के लिए आपका फिर से एक बार हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। ”
प्रधानमंत्री ने आस्ट्रेलिया में भारतीय विद्यार्थियों समेत वहां रह रहे भारतीय समुदाय का कोविड-19 महामारी के दौरान ध्यान रखने के लिए प्रधानमंत्री मॉरिसन की सराहना की।
दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया जिसमें व्यापक रणनीतिक भागीदारी के विभिन्न पक्षों को शामिल किया गया है।
दोनों पक्ष इस भागीदारी के तहत दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की वार्षिक शिखर बैठक आयोजित किए जाने पर सहमत हुए हैं। यह निर्णय भारत-आस्ट्रेलिया द्वपक्षीय संबंध में एक विशेष आयाम जोड़ने वाला निर्णय माना जा रहा है।
श्री मोदी ने बातचीत की शुरुआत में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और आस्ट्रेलिया के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और व्यापार, निवेश, रक्षा , सुरक्षा, शिक्षा, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारा सहयोग घनिष्ठ हुआ
है।
श्री मोदी ने कहा, “ पिछले कुछ वर्षों में हमारे संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा , शिक्षा , नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी इन सभी क्षेत्रों में हमारा बहुत क़रीबी सहयोग है। कई अन्य क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण खनिज, जल प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा और कोविड-19 अनुसंधान में भी हमारा सहयोग बढ़ा है।
उन्होंने कहा, “ बेंगलुरु में उभरती प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की घोषणा का मैं ह्रदय से बहुत-बहुत स्वागत करता हूँ। साइबर और महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकी में हमारे बीच बेहतर सहयोग अनिवार्य है। हम जैसे समान मूल्यों वाले देशों की यह जिम्मेदारी है, कि इन उभरती टेक्नोलॉजीज में उचित वैश्विक मापदंड अपनाये जाएँ। ”
उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता ‘सीका’ पर भी बहुत कम समय में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और पूरा विश्वास है कि बाक़ी बचे मुद्दों पर भी शीघ्र सहमति बन जायेगी। ‘सीका’ का शीघ्र समाधान आर्थिक संबंधों, आर्थिक मजबूती और आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।
श्री मोदी ने कहा, “ क्वाड में भी हमारे बीच अच्छा सहयोग चल रहा है। हमारा यह सहयोग मुक्त, खुले और समावेशी हिन्द प्रशांत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए क्वाड की सफलता बहुत महत्त्वपूर्ण है। ”
श्री मोदी ने कहा, “ हमारे पिछले वर्चुअल सम्मेलन के दौरान हमने अपने संबंधों को व्यापक सामरिक साझेदारी का रूप दिया था। मुझे प्रसन्नता है कि आज हम दोनों देशों के बीच वार्षिक सम्मेलन का तंत्र स्थापित कर रहे हैं। इससे हमारे संबंधों की नियमित समीक्षा की एक व्यवस्था तैयार होगी। ”


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