विजयवर्गीय और सिंधिया को एक -दूसरे की जरूरत


मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

केंद्रीय राजनीति के साथ प्रदेश में वर्चस्व बनाए रखने व संबंधों का विस्तार करने के लिए कैलाश विजयवर्गीय और ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक -दूसरे की जरूरत है. राजनीति के पटल पर आकांक्षा किसकी हिलोरें नहीं लेती. यह क्षेत्र संभावनाओं से भरा है. विजयवर्गीय जानते हैं कि सिंधिया का रियासती क्षेत्र रहने से मालवा में उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, आगर मालवा के साथ राजगढ़-व्यावरा तक सिंधिया परिवार का प्रभाव अब तक कायम है. वहीं सिंधिया को भी अहसास है कि मालवा के साथ निमाड़ में भी विजयवर्गीय की संगठनात्मक पकड़ अच्छी है.  दोनों के गठजोड़ से भाजपा की मालवा-निमाड़ में बढ़ी जीत हो सकती है. इस क्षेत्र पर फोकस इसलिए ज्यादा है क्योंकि प्रदेश की सत्ता दिलाने में मालवा-निमाड़ हमेशा अहम भूमिका निभाता आया है. यही कारण है कि विगत दिनों इंदौर में आयोजित एमपीसीए के सम्मान समारोह कार्यक्रम को विजयवर्गीय व सिंधिया ने आपस में नजदीकियां बढ़ाने के अवसर में तब्दील कर लिया.

ग्रामीणों का सरकार को अल्टीमेटम

ऐसा पहली बार हुआ है कि चिकित्सा सुविधा छिनने पर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल कर सरकार को अल्टीमेटम दे दिया हो. शाजापुर जिले में यह हुआ है. जिले का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले बेरछा की चिकित्सा सुविधा को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर दिनेश जैन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ग्रामीणों ने चिकित्सा सुविधा को पुन: बहाल करने की मांग की.  ग्रामीणों ने बताया कि बेरछा में केवल वहीं के निवासी नहीं आते, बल्कि यहां की चिकित्सा सेवाओं पर आसपास के करीब 50 ग्रामों के हजारों लोग भी निर्भर हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन को तीन दिन का समय दिया है.

यदि इस अवधि में उनकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे. ग्रामीणों ने बताया कि बेरछा केवल गांव नहीं है. बल्कि प्रदेश की राजधानी सहित दूरदराज यात्रा करने वालों को पहले बेरछा आना पड़ता है. क्योंकि यहां से बड़ी रेलवे लाईन गुजरती है. उक्त क्षेत्र आवागमन व व्यापारिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है, जिसके चलते यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध थी, लेकिन यह समझ से परे है कि अचानक बेरछा से चिकित्सा सुविधा छीनकर सुंदरसी स्थानांतरित क्यों की जा रही हैं.

सचिन बिरला अब भी रेकार्ड पर भाजपाई नहीं

चार महीने पहले खंडवा उपचुनाव के समय बड़वाह विधायक सचिन बिरला ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर ली थी. बिरला ने इसके बाद भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया था, मगर आज तक बिरला विधानसभा सचिवालय के रिकॉर्ड में कांग्रेस विधायक बने हुए हैं और भाजपा के तमगे से अबी तक वंचित हैं. हालांकि उस समय कांग्रेस ने सचिन बिरला से किनारा करते हुए उनका नाम विधायक दल से हटा दिया था. कांग्रेस विधायक दल के सचेतक गोविंद सिंह ने कहा था कि कांग्रेस विधायक दल की सूची से सचिन बिरला का नाम हटाया गया है अब उन्हें बजट सत्र में जहां बैठना है बैठ सकते हैं. पर कांग्रेस के विधायकी रद्द करने संबंधी विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन प्रकरण के कारण वे कांग्रेस विधायक ही बने हुए है.


नव भारत न्यूज

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