यूक्रेन में फंसा ग्वालियर का शांतनु, यहां माँ-पिता की नींद गायब


पोलैंड के रास्ते भारत आने की कोशिश, परिवार को बंधी कुछ उम्मीद

ग्वालियर:  यहां स्थित मानिक विलास कॉलोनी के निवासी 21 वर्षीय शांतनु यूक्रेन के लवीव शहर में फंसे हुए हैं। सरकार इन छात्रों समेत सभी लोगों को इमारतों के बंकरों में रहने की घोषणा कर चुकी है। रूसी सेना रिहायशी इलाकों को टारगेट कर रहे हैं और यहां ग्वालियर में शांतनु के मम्मी पापा चिंता में हैं। शांतनु की मां अर्चना ने बीते दो दिन से पलक तक नहीं झपकाई है। हर 20 से 30 मिनट में बेटे को कॉल कर रही हैं। लगातार टीवी पर न्यूज चैनल देखते हुए हालात जान रही हैं। जब भी किसी शहर में धमाका या सायरन बजता है तो इस मां का दिल बैठ जाता है। रूह कांप उठती है। दिन रात मां यही प्रार्थना कर रही है कि किसी तरह उनका बेटा वहां से सुरक्षित निकल आए। शांतनु भी अपनी मां की हालत समझता है इसलिए वह हर एक से दो घंटे में अपना वीडियो बनाकर मां के मोबाइल पर भेज रहा है। यूक्रेन के तनाव का सीधा असर शांतनु की मां के चेहरे पर साफ देखा जा सकता है।

मानिक विलास कॉलोनी में रहने वाले संदीप बामनगया एजी ऑफिस में काम करते हैं। परिवार में पत्नी अर्चना व दो बेटे शांतनु और हर्षित हैं। शांतनु मेडिकल की तैयारी कर रहा है। उसने इसी साल नवंबर 2021 में यूक्रेन के लवीव शहर की लवीवी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। दीपावली के बाद वह यूक्रेन के लिए रवाना हुए थे। जब यूक्रेन में हालात बिगड़ने लगे और लगने लगा कि अब युद्ध होगा ही तो शांतनु ने मां के कहने पर करीब दस दिन पहले लवीव से कीव के लिए एयर टिकट बुक किया था। 24 फरवरी को उसकी फ्लाइट थी। कीव से इंडिया के लिए 25 फरवरी को शाम पांच बजे फ्लाइट थी। पर 24 फरवरी सुबह से ही रूस ने हमला बोल दिया। जिस कारण सारी फ्लाइट्स रद कर दी गई हैं। अब सिर्फ आसमान में लड़ाकू विमान ही नजर आ रहे हैं।

-मैंने 10 दिन पहले भारत जाने के लिए फ्लाइट का टिकट कराया था। फ्लाइट 25 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी कीव से उड़नी थी। लेकिन रूस के हमले के बाद सभी फ्लाइट रद्द हो गई हैं। हम सभी विद्यार्थी फिलहाल लवीव में ही हैं। अब आने में समय लगेगा। यह कहना है मानिक विलास कॉलोनी में रहने वाले शांतनु बामनगया का। वह यूक्रेन के शहर लवीव की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। उसने कहा मैं यहां सुरक्षित हूं। यहां भारत के लगभग 100 विद्यार्थी हैं, जो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से एमबीबीएस कर रहे हैं। शुक्रवार दोपहर शांतनु अपने दो से तीन अन्य भारतीय दोस्तों के साथ पौलेंड के लिए निकला है। सड़क मार्ग से वह पौलेंड जा रहे हैं। लवीव से पौलेंड लगभग 90 से 95 किलोमीटर है। यदि वह पौलेंड पहुंच जाता है तो उसके सुरक्षित होने की पूरी संभावना है।

शांतनु की मां की हालात खराब
अर्चना बामनगया ने कहा- सुबह जब टीवी खोली तो कलेजा कांप गया। यूक्रेन पर मिसाइल से हमले शुरू हो गए थे। जी इतना घबरा गया कि कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। इसके बाद बेटे शांतनु को वीडियो कॉल किया। उसने कहा मैं यहां सुरक्षित हूं। बच्चे को यूक्रेन से निकालने के लिए पीएम मोदी सहित इंडियन एंबेसी को पत्र लिखकर आवेदन किया है। हर 30 मिनट में बेटे को कॉल कर रही हैं। शुक्रवार शाम को भी शांतनु के ताऊ प्रदीप बामनगया ने उससे बात की है।


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