सांगीतिक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने छात्रों को दिए टिप्स


ग्वालियर:  आज शासकीय माधव संगीत महाविद्यालय ग्वालियर में तीन दिवसीय सांगीतिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। उदघाटन सत्र का प्रारंभ दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वंदना से हुआ, तत्पश्चात महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वीणा जोशी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की. इसके बाद कार्यशाला में पधारे तीनों विषय विशेषज्ञ श्रीराम उमड़ेकर, श्रीमती साधना गोरे तथा डॉ मुकेश सक्सेना ने छात्रों को आशीर्वचन दिए. कार्यशाला में तबले के विषय विशेषज्ञ डॉक्टर मुकेश सक्सेना ने तबले के 3 मूलभूत आयामो पहला लय दूसरा बोलो की स्पष्टता तथा निकास और तीसरा तैयारी इन पर अपने विचार रखे. इसके पश्चात उन्होंने लय के विभिन्न प्रकार तथा ऑफबीट एवं ऑनबीट चलना आदि आयामों के प्रयोगात्मक स्वरूप से बच्चों को अवगत कराया.

सितार के विषय विशेषज्ञ श्रीराम उमड़ेकर ने सितार तथा ख्याल की ऐतिहासिक विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात उन्होंने राग दारी के नियमों को सामान्य यातायात के नियमों की उपमा देते हुए बहुत ही रुचिकर ढंग से बच्चों को समझाया तथा यह भी कहा कि गायन के विद्यार्थियों को सदैव तानपुरे पर रियाज करना चाहिए और कभी भी हारमोनियम का सहारा नहीं लेना चाहिए। गायन की विषय विशेषज्ञ श्रीमती साधना गोरे ने राग यमन में अब गुनन कीजिए गुनी संघ यह बंदिश लेकर राग के वादी संवादी न्यास अलपत्व एवं बहुत्व आदि अवधारणाओं को प्रयोगात्मक रूप से दर्शाया। फिर उन्होंने यमन की पारंपरिक बंदिश एरि आली पिया बिना को बच्चों से गवाया। इसके बाद उन्होंने राग भीमपलासी तथा धनाश्री का उदाहरण देते हुए यह समझाया कि एक जैसे स्वर होने के बावजूद न्यास आदि की भिन्नता के कारण दोनों राग कैसे अलग अलग होते हैं यह दर्शाया तीनों ही विषय विशेषज्ञों ने बच्चों की शंकाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का संचालन अंकुर धारकर ने किया।


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