संज्ञान याचिका पर इंदौर कलेक्टर की तरफ से पेश किया गया हलफनामा


 

तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद गैंगरेप पीड़िता की फीस के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा नोटिस जारी करने का मामला

 

जबलपुर। गैंगरेप नाबालिग पीड़िता तथा उसकी बहन की मुफ्त शिक्षा का आश्वासन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया था। सरकार के आश्वासन के बावजूद भी फीस के संबंध में स्कूल प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस के संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में किये जाने के आदेश दिये थे। याचिका की सुनवाई के दौरान इंदौर कलेक्टर की तरफ से हलफनामे के साथ जवाब पेश किया गया। सरकार की तरफ से याचिका पर जवाब प्रस्तुत करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। कलेक्टर के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि मंदसौर जिले में जून 2018 को सात साल की बच्ची का स्कूल से दो लोगों ने अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया था। आरोपियों ने उसका दो बार गला काटकर उसे मरने के लिए छोड दिया था। डॉक्टरो ने बच्ची के कई ऑपरेशन कर उसे बचा लिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़िता और उसके परिवार से वादा किया था कि सरकार उसकी और उसकी बहन की शिक्षा का ख्याल रखेगी। सरकार ने इंदौर के एक निजी स्कूल में दोनों बहनों का दाखिला करवाया था। स्कूल प्रबंधन ने इंदौर कलेक्टर और जिला शिक्षा विभाग को 14 लाख रुपये बकाया का नोटिस भेजा था। नोटिस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने तर्क दिया था कि प्रवेश के लिए सरकार द्वारा स्कूल को दिए गए पत्र में यह उल्लेख नहीं किया गया था कि फीस का भुगतान कौन करेगा।

हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने आपने आदेश में कहा था कि एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता राज्य द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद भी उत्पीड़न से गुजर रही है। यह काफी चौंकाने वाली स्थिति है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग ,कलेक्टर तथा स्कूल प्रबंधन को भी नोटिस जारी हलफनामा में जवाब पेश करने आदेश जारी किये थे।

पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिस पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि गत दिवस भी सरकार की तरफ से हलफनामा के साथ जवाब पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया था। हम यह समझने में असफल है कि सरकार दुबारा ऐसा अनुरोध कैसे कर सकती है,वह भी जनहित याचिका में। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये।


नव-भारत न्यूज.

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