निमाड़ को छोड़कर इंदौर उज्जैन संभाग में खिला कमल


अनेक मंत्री और दिग्गज हारे, कई स्थानों पर बागियों ने उलट फेर किया

इंदौर: प्रदेश के सबसे बड़े अंचल मालवा निमाड़ में एक फिर से कमल खिला है। यहां की 66 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 50 सीटें जीती हैं। पिछली बार पार्टी यहां से सिर्फ 29 सीट जीत पाई थी। खास तौर पर मालवा यानी उज्जैन संभाग में भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। निमाड़ अंचल की आदिवासी सीटों पर कांग्रेस ने भाजपा को जरूर मात दी। इस क्षेत्र में अनेक मंत्री और दिग्गज नेता पराजित हुए। दिलचस्प तथ्य यह कि प्रदेश की सबसे अधिक अंतर वाली और कम अंतर वाली जीत इसी क्षेत्र से आई है। इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 प्रत्याशी रमेश मेंदोला ने अपने कांग्रेस के विरोधी प्रत्याशी को 106000 मतों से पराजित किया है।

जबकि शाजापुर सीट पर भाजपा के अरुण भीमावत ने पूर्व मंत्री कांग्रेस के हुकुम सिंह कराडा कार्यालय को मात्र 28 मतों से हराया। इसी तरह कांग्रेस के पूर्व मंत्री बाला बच्चन राजपुर से मात्र 30 मतों से विजई हुए।मालवा निमाड़ की सबसे चर्चित भिड़ंत विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक में हुई,जहां भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का मुकाबला कांग्रेस के बाहुबली प्रत्याशी संजय शुक्ला से था। इस मुकाबले में कैलाश विजयवर्गीय 57000 से अधिक मतों से विजयी रहे। इस अंचल से कैबिनेट मंत्री जगदीश देवड़ा, विजय शाह,इंदर सिंह परमार, उषा ठाकुर, तुलसी सिलावट, हरदीप सिंह डंग ओम प्रकाश सकलेचा , मोहन यादव विजयी रहे। जबकि राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, प्रेम सिंह पटेल चुनाव हार गए। कांग्रेस के भी अनेक दिग्गज नेता इस चुनाव में पराजित हुए।

इनमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी और विजयलक्ष्मी साधो शामिल हैं। कांग्रेस के कुछ महत्वपूर्ण नेता जीते भी हैं। इनमें युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और पूर्व मंत्री वाला बच्चन शामिल हैं। मालवा निमाड अंचल में दीपक जोशी और भंवर सिंह शेखावत के दल बदल की बड़ी चर्चा थी क्योंकि इनके परिवार वर्षों से संघ और जनसंघ के साथ रहे हैं। इनमें भंवर सिंह शेखावत ने बदनावर में प्रदेश के उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को पराजित किया। जबकि दीपक जोशी खातेगांव सीट से भाजपा के आशीष शर्मा के हाथों पराजित हो गए। मालवा और निमाड़ अंचल के लगभग 11 जिले ऐसे हैं जहां भाजपा ने कांग्रेस का पूरा सफाया कर दिया। इनमें इंदौर जिला शामिल है, जहां भाजपा ने सभी 9 सीटें जीतने में सफलता प्राप्त की। कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों पर सभी की निगाह थी इनमें पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू आलोट से और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्ष चौहान बुरहानपुर से लड़ रहे थे। यह दोनों उम्मीदवार पराजित हुए। भाजपा की पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने भी बुरहानपुर सीट से जीत दर्ज की।

निमाड़ के कुछ जिलों में कांग्रेस सफल रही

कांग्रेस ने धार, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी और खरगोन जिले में अच्छा प्रदर्शन किया। जबकि उज्जैन, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, देवास, इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर जैसे जिलों में भाजपा ने वर्चस्व स्थापित किया। भाजपा को सबसे बड़ा झटका धार जिले में लगा जहां वह जिले की सात में से 6 सीटों में पराजित हो गई। मनावर में जयस के नेता डॉक्टर हीरालाल अलावा कड़े संघर्ष में कम मार्जिन से विजई हुए। धार की सीट पर नीना वर्मा ने लगातार चौथी बार जीत का परचम लहराया। कुल मिलाकर मालवा और निमाड अंचल में भाजपा ने 2013 के जैसा रिजल्ट लाकर दिखाया है।


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