कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली जरूरी


हाल की घटनाओं ने एक बार फिर जाहिर किया कि कश्मीर की जनता आतंकवादियों के साथ नहीं है. वहां की जनता शांति और चैन के साथ विकास चाहती है. ऐसे में यह जरूरी है कि वहां लोकतंत्र की बहाली हो तथा जनता को स्वशासन का अधिकार हो.दरअसल,

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की कथनी और करनी का अंतर एक बार फिर उजागर हुआ है.इस बार मामला ज्यादा गंभीर है.भारतीय सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का दावा है कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में सक्रिय 20-25 आतंकियों में पाकिस्तान के सेवानिवृत्त फौजी शामिल हैं.पाकिस्तान में जमे आतंकवादी संगठन पहले कश्मीर के युवकों को बहला-फुसला कर अपने साथ कर लेते थे.अब कश्मीरी युवकों का आतंकवाद से मोहभंग हो चुका है.घाटी में इन संगठनों की भर्तियां बंद हो गई हैं. ऐसे में कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने के लिए पकिस्तान अपने सेवानिवृत्त फौजियों को झोंक रहा है.

दरअसल, 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की आबो-हवा काफी बदल चुकी है. भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने वाली भीड़ गायब है. शांति बहाली का असर केसर की क्यारियों, डल झील को घेरकर खड़े पहाड़ों से लेकर गुलमर्ग में फैली बर्फ तक महसूस किया जा सकता है.घाटी के पर्यटन उद्योग को नई ऑक्सीजन मिली है.यही तस्वीर पाकिस्तान की आंख की किरकिरी बनी हुई है.जम्मू-कश्मीर में निकट भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव ने भी उसकी बेचैनी बढ़ा रखी है.वह घाटी में गड़बड़ी फैलाने की साजिश में जुटा रहता है.भारत के साथ हुए अब तक के चारों सामरिक युद्ध में पाकिस्तान ने मात खाई, पर कश्मीर राग अलापना बंद नहीं किया जोकि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुना ही नहीं जाता.बौखलाहट में पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध जारी रखना चाहता है.वह पंजाब में भी ड्रोन भेजता रहता है, पर वहां भी उसके नापाक मंसूबों को जमीन नहीं मिल रही है. हमारे लिए चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि कुछ समय से आतंकी जम्मू-कश्मीर के आम लोगों के साथ हमारे सैनिकों को भी निशाना बना रहे हैं. पिछले हफ्ते राजौरी जिले की मुठभेड़ में सेना के दो अफसरों समेत पांच जवानों का शहीद होना बड़ा झटका है.आबादी वाले इलाकों के बजाय आतंकी अब घने जंगलों और गुफाओं में ठिकाने बना रहे हैं.मुठभेड़ के दौरान उन्हें बिलों से निकालना बड़ी चुनौती बन जाता है.यह चुनौती अनंतनाग के कोकेरनाग के जंगलों में हुई मुठभेड़ में भी सामने आई थी, जिसमें सेना के तीन जवान शहीद हुए थे.

आतंकियों के नए पैंतरों को देखते हुए उनकी कमर तोडऩे के लिए सेना को नई रणनीति बनाने पर काम करना होगा.उनके स्थानीय नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है, जो जंगलों या गुफाओं में उन्हें रसद और दूसरा सामान पहुंचाता है.देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मुट्ठीभर आतंकियों के खतरनाक खेल पर हमेशा के लिए विराम जरूरी है.बहरहाल, सेना और अर्धसैनिक बल पाकिस्तान के मंसूबों को नाकामयाब कर रहे हैं यह संतोषजनक है लेकिन इसी के साथ यह भी जरूरी है कि जिस तरह से जम्मू कश्मीर के लोग आतंकवाद से दूर हो चुके हैं. उन्होंने आतंकवादियों को सहयोग देना बंद कर दिया है. कश्मीर का आवाम शांति और अमन के साथ जीना चाहता है वह कश्मीर में हथियारबंद फौजी या आतंकवादी नहीं, बल्कि विकास को देखना चाहता है. ऐसे में जरूरी है कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाए और वहां विधानसभा चुनाव करवाए जाएं. कश्मीर की जनता को स्वशासन का अधिकार देना बहुत जरूरी है. यदि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र की पूर्ण बहाली हो जाती है तो ही यह माना जाएगा कि इस राज्य ने आतंकवाद और अलगाववाद को पूरी तरह से छोड़ दिया है. जब वहां की जनता शांति और अमन के साथ विकास चाहती है तो ऐसे में केंद्र सरकार का भी कर्तव्य है कि वहां शासन की बागडोर जनता के हाथ में सौंप दे. यह बिल्कुल सही समय है जब कश्मीर में लोकतंत्र की पूर्ण बहाली की जाए. हालांकि केंद्र सरकार भी तेजी से इसी दिशा में काम कर रही है. संभावना व्यक्ति की जा रही है कि लोकसभा चुनाव के बाद जम्मू कश्मीर में भी चुनाव करवाए जा सकते हैं.


नव भारत न्यूज

Next Post

पर्यावरण संकट का एकमात्र उपाय देशी गाै पालन: भागवत

Wed Nov 29 , 2023
मथुरा (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत ने कहा कि बढ़ते पर्यावरण संकट का एकमात्र उपाय देशी गाय का पालन है। दीनदयाल गौ ग्राम परखम में प्रारंभ किये गये दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, प्रशासनिक भवन कक्षाओं एवं बायो गैस जनरेटर का लोकार्पण करने […]