बेख़ौफ़ माफिया: कड़ी कार्रवाई जरूरी


मध्य प्रदेश के शहडोल में रेत माफिया का खौफनाक चेहरा सामने आया है. रेत माफिया ने एक पटवारी को ट्रैक्टर से कुचल दिया. पटवारी की मौके पर ही मौत हो गई. शनिवार रात को पटवारी को सूचना मिली थी कि रेत का अवैध उत्खनन चल रहा है. पटवारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. जैसे ही पटवारी ने ट्रैक्टर रोकने की कोशिश की तो ट्रैक्टर ड्राइवर ने उन्हें रौंद दिया. इससे पटवारी की मौत हो गई. रीवा जिले के रहने वाले 45 वर्षीय प्रसन्न सिंह ब्यौहारी में पटवारी के तौर पर तैनात थे. दरअसल,पिछले तीन दिनों से सोन नदी में अवैध रेत खनन के खिलाफ प्रशासन ने अभियान चला रखा था. कई ट्रैक्टरों को प्रशासन ने जब्त भी किया था. शनिवार को भी पटवारी को सूचना मिली थी कि अवैध खनन हो रहा है. इसी पर वो अपनी टीम के साथ वहां पर पहुंचे. पटवारी ने देखा कि मौके से बड़ी संख्या में अवैध रेत खनन हो रहा है. सैकड़ों ट्रैक्टर इस काम में जुटे हुए हैं. पटवारी प्रसन्न सिंह ने एक ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास किया. लेकिन ट्रैक्टर चालक उन्हें कुचलते हुए फरार हो गया. पुलिस ने आरोपी ट्रैक्टर चालक को मैहर जिले से गिरफ्तार कर लिया है. बहरहाल,सिर्फ ड्राइवर की गिरफ्तारी काफी नहीं है मलिक पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिए. इन दोनों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना और समूचे माफिया तंत्र पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करना बहुत जरूरी है.दरअसल,मध्य प्रदेश में अवैध रेत का पूरा कारोबार नेताओं से जुड़े आपराधिक तत्वों और माफियाओं के हाथों में है. सरकार, कानून, पुलिस या प्रशासन तंत्र का इन पर कोई जोर नहीं चलता. पिछले तीन वर्षों में करीब दर्जन भर घटनाएं यह बताती हैं कि यह रेत माफिया हर उस आवाज, उस आदमी, उस कदम को बेरहमी से कुचल डालता है, जो उसके काले कारोबार के रास्ते में आड़े आते हैं या खिलाफत में खड़े होते हैं. यही नहीं, कभी बंधक बनाकर, कभी गोलियां चलाकर, कभी ट्रक या ट्रैक्टर चढ़ाकर, कभी खिलाफत करने वाले अफसर या कर्मचारी का तबादला कराके खौफ पैदा करने की करतूतें इन माफिया के लिए बेहद आम बात है.

रेत माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं और आम आदमी कितना लाचार, नाराज और डरा हुआ है, इसका ताजा उदाहरण शहडोल की घटना है. कुछ माह पूर्व पहले राज्य के अशोकनगर जिले के बहादुरपुर से लगे खिरिया गांव के घाट पर देखने को मिला, जहां कैथल नदी में अवैध उत्खनन करने वालों को एक गांव वाले सुखवीर कटारिया नामक ग्रामीण ने रोकने की कोशिश की तो रेत माफिया कुलदीप सिंह ने उसे बेदम पीटा. नतीजे में गुस्साए सुखवीर ने जहर खा लिया. अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के तमाम सरकारी दावे हकीकत से एकदम उलट हैं. मध्य प्रदेश में अवैध उत्खनन का सबसे बड़ा कारोबार चंबल, नर्मदा, क्षिप्रा, बेतवा, सोन जैसी बड़ी नदियों से चलता है. यहां सक्रिय रेत माफिया का एक छत्र राज दिखता है. उदाहरण के लिए प्रदेश की चंबल नदी से रेत निकालने पर पिछले डेढ़ दशक से रोक लगी हुई है, लेकिन हर महीने अंदाजन 35 से 40 करोड़ का कारोबार होता है. क्या यह नेता, जिला, पुलिस और खनन विभाग के अफसरों की रेत माफिया से मिलीभगत के बिना संभव है? एक एनजीओ ‘द एशिया आन नेटवर्क आन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल’ की रिपोर्ट ‘भारत में रेत खनन हिंसा 2019–20 में खनन माफिया’ के बढ़े हौसलों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे भारत में अवैध रेत उत्खनन एक बहुत बड़ा अवैध व्यवसाय बन गया है.रिपोर्ट में बताया गया है कि एक वर्ष के दौरान 2022 में गिरोहों की आपसी दुश्मनी और रेत माफियाओं द्वारा अधिकारियों पर हमलों आदि के कारण देश में कम से कम 193 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. ऐसे अनेक उदाहरण और आंकड़े दिए जा सकते हैं. ताजा घटना बताती है कि मामला कितना गंभीर है और माफिया कितने बेख़ौफ़ हैं.अवैध खनन केवल आपराधिक मामला नहीं है बल्कि पर्यावरण से जुड़ा मामला भी है. आमतौर पर पर्यावरण के नुकसान की अनदेखी की जाती है.यदि नदियों को बचाना है तो खनन माफिया पर सख्ती करना बहुत जरूरी है. कुल मिलाकर माफियाओं का समूह नाश बेहद आवश्यक है.


नव भारत न्यूज

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