कमलेश्वर की मदद को आए सैंकड़ों हाथ


मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

रतलाम जिले की सैलाना विधान सभा सीट इन दिनों चर्चा में है. यहां इस आदिवासी आरक्षित सीट पर जयस के समर्थन से कमलेश्वर डोडियार चुनाव में निर्दलीय मैदान में थे. विधान सभा चुनाव में प्रत्याशियों के लिए प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा 40 लाख रु. तय की थी. मगर गरीब आदिवासी कमलेश्वर के पास प्रचार के लिए पैसा तक नहीं था. नामांकन से लेकर प्रचार तक का खर्च उन्होंने उधार लेकर किया. हालांकि चुनाव प्रचार में उनका खर्च अन्य उम्मीदवारों की तुलना में नाममात्र का रहा.मतदान हो चुका है और परिणाम का इंतजार है. इस बीच कमलेश्वर को उधारी चुकाने की चिंता है.

इसके लिए उन्होंने आदिवासी परंपरा नोतरा का सहारा लिया. आदिवासी समाज ने कस्बे सरवन और रावटी में कमलेश्वर के पिता की उपस्थिति में नोतरा आयोजित किया. समाज के लोगों ने कार्यक्रम में पहुंचकर रिवाज अनुसार एक-दूलरे को गुलाल लगाया फिर जय जोहार बोल अपनी-अपनी हैसियत अनुसार बीच में रखी परात में राशि डालकर आर्थिक मदद की. दोनों कस्बों में सैंकड़ों समाजबंधु नि:स्वार्थ भाव से सहयोग को पहुंचे. अब इस एकत्र राशि से कमलेश्वर उधार चुकता करेंगे. उल्लेखनीय है कि कोई भी जरुरतमंद समाज में नोतरा आयोजित कर आर्थिक मदद प्राप्त कर सकता है.

सबकी नजर रहेगी बदनावर और खातेगांव सीट पर

प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है. परिणाम के लिए मालवा अंचल की बदनावर और खातेगांव सीट पर सबकी नजर रहेगी. धार जिले की बदनाबर सी पर वर्तमान भाजपा विधायक व प्रदेश सरकार के मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव का मुकाबला पूर्व विधायक व सहकारी नेता भंवर सिंह शेखावत से है. वहीं देवास जिले की खातेगांव सीट पर भाजपा के वर्तमान विधायक आशीष शर्मा के सामने पूर्व मंत्री दीपक जोशी टक्कर में रहे. इन सीटों पर दोनों कांग्रेसी उम्मीदवार भंवर सिंह शेखावत और दीपक जोशी कुछ माह पहले तक भाजपा का परचम लहराते रहे थे. टिकट मिलने की संभावना खत्म होते देख कांग्रेस का दामन थाम लिया था.

अब इस चुनाव में दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. यह चुनाव जीतकर उन्हें साबित करना होगा की उनका स्वयं का जनाधार और मतदाताओं में लोकप्रियता रही है. अगर वे सीट नहीं निकाल पाते हैं तो उनका राजनैतिक करियर बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. भाजपा के पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत ने संगठन पर वरिष्ठों की उपेक्षा और अडिय़ल रवैया का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी थी.वे इंदौर- 5 व बदनावर से विधायक रह चुके हैं. दूसरी ओर भाजपा संस्थापक नेताओं में शामिल रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र हाटपीपल्या से विधायक व मंत्री रह चुके दीपक जोशी ने भी अपनी उपेक्षा के आरोप के साथ भाजपा छोड़ी थी.

अलावा सीट कायम रखेंगे या शिवराम मारेंगे बाजी

गत विधान सभा चुनाव में जयस संस्थापक डॉ. हीरालाल अलावा धार जिले की मनावर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और भाजपा की कद्दावर नेता रंजना बघेल को हराकर चौंका दिया था. तब कांग्रेस व जयस की जुगलबंदी में अलावा को इस अजजा सीट पर आदिवासियों का जमकर समर्थन मिला था. इस चुनाव में भी अलावा मनावर से कांग्रेस प्रत्याशी हैं, उनका सामना इस बार भाजपा के युवा शिवराम कन्नौज से रहा. जयस संस्थापक अलावा के कारण मनावर विधानसभा सीट भी अहम सीट बनी हुई है. सीट पर इस बार 73.37 फीसदी मतदान हुआ है. भारी मतदान के चलते भाजपा उम्मीद में है कि इस सीट पर वह अपना कब्जा वापस कायम करेगी. पेशे से हीरालाल अलावा चिकित्सक हैं तो शिवराम इंजिनीयर हैं. 2003, 2008 और 2013 के चुनाव में भाजपा रंजना बघेल ने यहां जीत दर्ज की थी, जो पिछले चुनाव में उससे कांग्रेस ने छीन ली थी. अब देखना होगा कि अलावा सीट पर कब्जा बनाए रखते हैं या नवेले भाजपा प्रत्याशी शिवराम बाजी मारते हैं


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