आरिफ के तुष्टीकरण से रोशन हुई दरगाह की मशाल सरकारी जमीन पर सरकारी अधिकारी ने बनवा दी दरगाह, तबादले के बाद नहीं हुए थे रिलीव


शाजापुर, 27 नवंबर. अभी तक तुष्टीकरण राजनीति में देखने को मिलता था, लेकिन अब प्रशासनिक हलकों में भी तुष्टीकरण देखने को मिल रहा है. सरकारी जमीन पर सरकारी अधिकारी ने बनवा दी दरगाह और लगे हाथ पौधारोपण भी कर दिया.

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत कांजा में राजस्व विभाग के बल्डे की जमीन पर कई गिट्टी खदानें हैं और इन खदानों के पास सैकड़ों बीघा सरकारी भूमि है, जो पथरीली है. यहां मशाल बाबा की मजार बनी हुई थी. पहले यह छोटा चबूतरा था. चुनाव के पहले इस दरगाह का पक्का निर्माण कराकर आसपास दीवार बनाकर टीन शेड लगवा दिया. साथ ही इस पर दरवाजा भी लगाया गया. पानी पीने के लिए टंकी की व्यवस्था भी की गई. आसपास की जमीन पर चूरी डलवाकर समतल करा दिया गया और पौधारोपण भी कर दिया गया. इस संबंध में जब नवभारत ने जानकारी ली, तो पता चला कि जिला खनिज अधिकारी ने सभी ठेकेदारों से इस निर्माण में सहयोग करने के निर्देश दिए. कांजा के लोगों का कहना है कि जिला खनिज अधिकारी द्वारा इसका निर्माण कराया गया.

तबादला हो गया था, लेकिन रिलीव नहीं किया खनिज अधिकारी को
जिला खनिज अधिकारी आरिफ खान की कार्यप्रणाली शुरू से ही चर्चा में रही है. आते ही सबसे पहले उन्होंने ठेकेदारों से ऑफिस में एसी लगवाया. हालांकि उनका कहना है कि एसी उन्होंने अपने पैसे से लगवाया. लेकिन सवाल यह उठता है कि कोई भी अधिकारी सरकारी कार्यालय में खुद के पैसे से एसी लगवाए, यह बात हजम नहीं होती है. कार्यवाही में भी तुष्टीकरण की झलक दिखती है. इनका तबादला नीमच हो गया था, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें रिलीव नहीं किया और स्टे का पूरा मौका दिया. वे स्टे लाकर वापस यहीं जम गए. इस दौरान दरगाह बनाने का मामला उजागर हुआ.

सरकारी जमीन पर कैसे बन सकती है दरगाह

मामले में शाजापुर एसडीएम नरेंद्र नाथ पांडे ने पटवारी गोपाल मालवीय को मौके पर जाकर जांच के निर्देश दिए. जिससे पता चला कि सर्वे नंबर 873 रकबा 0.227 हेक्टेयर जमीन रिकॉर्ड में सरकारी है. इस दौरान मौजूदा तालाब डेरा निवासी पृथ्वीसिंह पिता भुवाना सिंह ने बताया कि यह जमीन 1982 में पट्टे पर मिली थी, लेकिन पटवारी मालवीय ने जब पट्टे के कागज मांगे, तो वह दिखा नहीं पाया. पटवारी जांच में सामने आया कि 8 साल पहले एक मजार बनी हुई थी और करीब डेढ़ महीने पहले जिला खनिज अधिकारी का आना-जाना शुरू हुआ और उन्होंने इसका निर्माण शुरू करवा दिया. लोगों ने जब आपत्ति ली, तो रातों रात निर्माण करवा दिया, ताकि किसी को भनक ना लगे. पटवारी गोपाल मालवीय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह पूरी जमीन रिकॉर्ड में सरकारी है और किसी को पट्टा नहीं दिया गया है. 15 बाय 20 फीट का पक्का निर्माण और ऊपर टीन शेड लगा हुआ है. बाहर की तरफ पानी की टंकी और समतल जमीन पर चूरी डाली गई है. पटवारी ने बताया कि यह कार्य पूरी तरह अवैध है.

तुष्टीकरण के लिए आए या नौकरी करने…?

जिला खनिज अधिकारी आरिफ खान वैसे तो पगार सरकार से लेते हैं और जिले में अवैध उत्खनन को रोकने के लिए उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन उत्खनन कितना रोका, यह सबको पता है, लेकिन मशाल वाले बाबा की कच्ची मजार को पक्के चबूतरे और टीनशेड डालकर उसे धार्मिक स्थल बनाने में अपनी भूमिका जगजाहिर कर दी. 2 नवंबर को उन्होंने विधिवत दरगाह के पास पौधारोपण किया और उस समय उनके साथ खनिज निरीक्षक कामना गौतम भी मौजूद थी.

तुष्टीकरण का एक और मामला आया सामने

गिरवर स्थित एक हेक्टेयर भूमि पर संग्रहित मुरम परिवहन की अनुमति लेकर अवैध खनन करने का मामला उजागर हुआ है. जिला खनिज अधिकारी आरिफ खान ने आदेश क्रमांक 1152 खनिज 2023 दिनांक 6 अक्टूबर 2023 को शरीफ पिता शौकत शाह निवासी मीरकलां को ग्राम गिरवर की निजी भूमि सर्वे क्रमांक 1181 रकबा 1.000 समतलीकरण के लिए दी गई थी. यहां 4 हजार घन मीटर मुरम खनिज परिवहन की अनुमति दी गई थी. उक्त 4 हजार घन मीटर गौण खनिज मुरम का खेत की मेढ़ निर्माण में उपयोग के लिए परिवहन की अनुमति सहायक खनिज अधिकारी द्वारा दी गई थी. लेकिन ठेकेदार ने समतलीकरण की जगह सैकड़ों डम्पर मुरम निकालकर बड़ा गड्ढा कर दिया.

इनका कहना है
मामले की जांच कराई जा रही है. जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.
– किशोर कुमार कन्याल, कलेक्टर शाजापुर


नव-भारत न्यूज.

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