चीन में सांस संबंधी बीमारियों से निपटने के लिए खुलेंगी और अधिक क्लीनिक


बीजिंग (वार्ता) चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को स्थानीय अधिकारियों से फीवर क्लीनिकों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया क्योंकि देश कोविड-19 प्रतिबंधों में ढील के बाद श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि से जूझ रहा है।

सांस की बीमारी में इजाफा पिछले हफ्ते एक वैश्विक मुद्दा बन गया जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने उभरते रोगों की निगरानी कार्यक्रम द्वारा बच्चों में अज्ञात निमोनिया के समूहों पर एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चीन से अधिक जानकारी मांगी।

चीन और डब्ल्यूएचओ को 2019 के अंत में मध्य चीनी शहर वुहान में उभरी महामारी की शुरुआत में रिपोर्टिंग की पारदर्शिता के बारे में सवालों का सामना करना पड़ा है।

डब्ल्यूएचओ ने शुक्रवार को कहा कि हाल की बीमारियों में कोई नया या असामान्य रोगजनक नहीं पाया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के प्रवक्ता मी फेंग ने रविवार को कहा कि तीव्र श्वसन संबंधी बीमारियों का उद्भव कई प्रकार के रोगजनकों सबसे प्रमुख रूप से इन्फ्लूएंजा या निमोनिया के एक साथ प्रसार से जुड़ा हुआ है।

श्री फेंग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा,“प्रासंगिक क्लीनिकों और उपचार क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने, सेवा के घंटों को उचित रूप से बढ़ाने और दवा आपूर्ति की गारंटी को मजबूत करने के प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा,“स्कूलों, बाल देखभाल संस्थानों और नर्सिंग होम जैसे प्रमुख भीड़-भाड़ वाले स्थानों में महामारी की रोकथाम तथा नियंत्रण में अच्छा काम करना एवं लोगों के प्रवाह व यात्राओं को कम करना आवश्यक है।

बच्चों में मामले विशेष रूप से बीजिंग और लियाओनिंग प्रांत जैसे उत्तरी क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे रहे हैं, जहां अस्पताल लंबे इंतजार की चेतावनी दे रहे हैं।

चीन की कैबिनेट, स्टेट काउंसिल ने शुक्रवार को कहा कि इस सर्दी और वसंत में इन्फ्लूएंजा चरम पर होगा जबकि कुछ क्षेत्रों में माइकोप्लाज्मा निमोनिया का संक्रमण अधिक रहेगा।

इसने कोविड संक्रमण के फिर से बढ़ने के जोखिम के बारे में भी चेतावनी दी।

स्टेट काउंसिल ने एक बयान में कहा,“सभी इलाकों को संक्रामक रोगों पर सूचना रिपोर्टिंग को मजबूत करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानकारी समय पर और सटीक तरीके से दी जाए।

गुरुवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा कि चीन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि हालिया मामले 11 महीने पहले कोविड प्रतिबंध हटाने के साथ-साथ माइकोप्लाज्मा निमोनिया जैसे ज्ञात रोगजनकों के प्रसार से जुड़े हैं जो एक आम जीवाणु संक्रमण है।

यह आमतौर पर बच्चों को प्रभावित करता है। यह बीमारी मई से ही फैल रहा है।


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