आंतरिक सुरक्षा पर सतर्कता


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपनी मन की बात में 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले में हुए शहीदों को नमन किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा का भी जिक्र किया. आंतरिक सुरक्षा निश्चित रूप से एक ऐसा मुद्दा है जिसका व्यापक असर पड़ता है. आंतरिक सुरक्षा सिर्फ कानून और व्यवस्था तथा लोगों की जान माल से जुड़ी बात नहीं है बल्कि इसका असर आर्थिक निवेश और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ता है. जाहिर है आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर निरंतर सतर्क रहने की जरूरत है. दरअसल,26 नवम्बर 2008 का वह काला अध्याय है.इस दिन देश की औद्योगिक राजधानी समझी जाने वाली मुम्बई पर सबसे भीषण और सबसे सुनियोजित हमला हुआ था.इस हमले में प्रत्यक्ष हमलावर केवल दस थे पर तीन दिनों तक पूरा देश आक्रांत रहा.

हमले का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मुंबई पुलिस के एएसआई तुकाराम आंवले ने गोलियों से छलनी होकर भी आतंकवादी कसाब को जिंदा पकड़ लिया था. उनके प्राणों ने भले शरीर को छोड़ दिया, पर तुकाराम ने कसाब को नहीं छोड़ा था.कसाब की पकड़ से ही भारत यह प्रमाणित कर पाया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. बहरहाल,आतंकवादी हमलों से दुनिया का कोई देश नहीं बच पाया है, आधी से ज्यादा दुनियां आतंकवाद से आक्रांत है.इन दिनों हम हमास के आतंकी हमले से इस्राइल को जूझता हुआ देख रहे हैं.अमेरिका इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देशों ने भी आतंकवादी हमले झेले हैं.इन सबके पीछे एक विशेष मानस और मानसिकता काम कर रही है,जो दुनियां को केवल अपने रंग में रंगना चाहती है.मुम्बई का वह हमला बहुत घातक था.यह आधुनिकतम तकनीक और सटीक व्यूह रचना के साथ हुआ था. कोई कल्पना कर सकता है कि केवल दस आदमी सवा सौ करोड़ के देश की दिनचर्या जाम कर दें और तीन दिनों तक समाज और सरकार दोनों हलाकान रहें ? ये कुल दस हमलावर एक विशेष आधुनिकतम नौका द्वारा समुद्री मार्ग से मुम्बई पोर्ट आये थे.रात्रि लगभग सवा आठ बजे कलावा तट पर पहुंचे थे. सभी के हाथ में कलावा बंधा था और कुछ के गले में भगवा दुपट्टा भी दिख रहे थे. सभी के पास बैग थे. सभी आतंकवादी सरलता के साथ पोर्ट से बाहर आ गये.वे वहां से दो टोलियों में निकले,बाद में पांच टोलियों में बंटे.इन्हें पांच टारगेट दिये गये थे. ये टारगेट थे होटल ताज, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल, नारीमन हाउस, कामा होस्पिटल, और लियोपोल्ड कैफे थे.कौन कहां कब पहुंचेगा यह सुनिश्चित था. सभी रात सवा नौ बजे तक अपने अपने निर्धारित स्थानों पर पहुंच गये और हमले को अंजाम दिया. ये सभी आतंकवादी अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन लश्करे तयैबा के सदस्य थे. इस हमले में कुल 166 लोगों की मौत हुई. जो घायल हुये और जिन्होंने ने बाद में प्राण त्यागे उन्हें मिलाकर आकड़ा दो सौ से ऊपर जाता हैं. घायलों की संख्या तीन सौ से अधिक थी.यदि कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो इस हमले की आंच पाकिस्तान पर कभी न आती.शिवाजी टर्मिनस पर जो आतंकवादी आये थे उनमें से एक का नाम इस्माइल खान था और दूसरा अजमल कसाब था.गिरफ्तारी के बाद कसाब ने इस आतंकवादी टीम को मिले प्रशिक्षण का विवरण दिया वह आश्चर्यचकित करने वाला था. ये सभी लश्कर के फिदायीन दस्ते के सदस्य थे. इस हमले को अब पन्द्रह साल बीत गये हैं.कसाब को 21 नवम्बर 2012 यवरदा जेल में फांसी भी हो गयी,लेकिन इस पूरे हमले में कुछ प्रश्न हैं जिनके उत्तर आज तक न मिले.बहरहाल, प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात कार्यक्रम में मुंबई हमले के शहीदों को नमन कर पूरे देश की भावनाओं को अभिव्यक्त ही किया है. इसी के साथ आंतरिक सुरक्षा के संबंध में उनका यह कहना विश्वास जगाता है कि भारत आंतरिक सुरक्षा के मामले में निरंतर सतर्क और गंभीर है. भारत ने इस तरह के सभी हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहिम छेड़ी हुई है और आतंकवाद को विश्व मंच पर एक बड़ा विमर्श बना दिया है. निश्चित रूप से आतंकवाद समस्त मानवता का दुश्मन है.इसलिए इस पर पूरी दुनिया को एक होना चाहिए.


नव भारत न्यूज

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