मतदाताओं के मन को पढना आसान नहीं


चुनाव में हिंसा शर्मनाक

मध्य की डायरी
दिलीप झा
मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों के उम्मीदवार अपनी हार जीत के गुणाभाग लगाने में जुट गए हैं. वे अपने संगठन और समर्थकों के फीडबैक के अलावा सर्वे और मतदान फीसदी का आंकलन करने में जुटे हुए हैं. चर्चा है कि सट्टा बाजार भी अपने स्तर से चुनाव में हार-जीत पर कयासबाजी लगा रहा है. कहा जा रहा है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की जीत-हार पर सट्टे के भाव लगने लगे हैं. हालांकि कुल मिलाकर चुनाव शांतिपूर्ण हुए लेकिन मतदान के बाद आपसी रंजिश के कारण चुनावी फिजा के दामन पर दाग जरूर लग गए. मतदान के बाद 17 नवंबर को ही छतरपुर में चुनावी रंजिश का जो नजारा सामने आया वह सभ्य समाज को व्यथित करने वाला है. यू तो पूरे प्रदेश में वोटिंग प्रतिशत बढा है और इसको लेकर कई तरह के कयासबाजी लगाए जा रहे हैं लेकिन कई चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने आ रहे हैं.

बताया जा रहा है कि 230 सीटों में से 50 सीटें ऐसी हैं, जहां 2018 की तुलना में इस बार वोटिंग का प्रतिशत घट गया है. इसमें मौजूदा सरकार के 9 मंत्रियों के साथ 28 विधायक भी शामिल हैं। भाजपा के साथ वोट घटने वाली सीटों में 20 कांग्रेस विधायकों के भी हैं. भोपाल की चार सीटों पर भी वोट कम पड़े हैं. नरेला, दक्षिण पश्चिम, मध्य और हुजूर सीट पर वोट प्रतिशत कम हुआ है.भोपाल दक्षिण- पश्चिम में 4.57% वोट घटा है. जबकि पूरे भोपाल में मतदान 66.66% ही रहा लेकिन यहां भी 2018 की तुलना में इस बार 1.25% वोटिंग ज्यादा हुई है. वहीं सागर जिला में कुल 1782861 मतदाता हैं जिनमें पुरुष मतदाता 938723 और महिला मतदाता 855007 हैं . लेकिन 2018 की तुलना में इस बार वोटिंग ज्यादा हुई है. यहां वर्ष 2018 में 73.11% मतदान हुए थे जबकि 2023 में 75.74% वोटिंग हुई है.

जाहिर है, इसके मायने निकाले जा रहे हैं. निवाड़ी और हरदा में भी वर्ष 2018 की तुलना में इस बार वोटिंग ज्यादा हुई है. निवाड़ी में 2018 में 77.75% मतदान हुए थे लेकिन इस बार वोटिंग 83.47% हुई है. हरदा में वर्ष 2018 में वोटिंग 81.54% हुई थी लेकिन इस बार 83.54% मतदान हुए. मतदान में बढोतरी से यह निश्चित है कि चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं. प्रदेश की 47 आदिवासी सीटों पर बंपर वोटिंग होने के कारण आदिवासियों के मन में पीएम नरेंद मोदी या कांग्रेस के राहुल गांधी हैं यह तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा. हरदा के टिमरनी और बैतूल के घोड़ाडोंगरी और भैंसदेही विधानसभा में आदिवासियों का बड़ा प्रभाव है. टिमरनी में वर्ष 2013 में 75.90% वोटिंग हुई तो भाजपा की जीत हुई. 2018 में 83.20% मतदान के बाद भाजपा ने फिर परचम लहराया. 2023 में 84.61% वोटिंग हुई. ट्रेंड के हिसाब से यहां इस बार भी भाजपा की जीत सुनिश्चित है लेकिन परिणाम क्या निकलने वाला है, मतदाता ही जानते हैं. इसी तरह घोडा़डोंगरी और भैंसदेही में पिछले चुनाव की तुलना में लगभग एक प्रतिशत कम वोटिंग हुई है. ट्रेंड के हिसाब से दोनों सीटों पर कांग्रेस के चुनाव जीतने की प्रबल संभावना है.

हालांकि चुनावी जंग जीतने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने आदिवासी वोट बैंक को साधने की जबरदस्त कोशिश की है. 2008 और 2013 में आदिवासियों ने भाजपा का साथ दिया लेकिन 2018 में उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया और 30 सीटों पर हाथ का कमाल दिखा। इस बार आदिवासियों के मन में क्या रचा बसा है इस पर पूरे प्रदेश में चर्चा जोरों पर है. वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि टिकट वितरण को लेकर संघ और चुनावी सर्वे में जिन मंत्रियों को टिकट नहीं देने को कहा गया था, उन मंत्रियों के क्षेत्र में बागियों और असंतुष्टों ने खेल बिगाड़ा है। यहीं हाल कांग्रेस के साथ भी हुआ है। कांग्रेस के प्रत्याशियों को भी बागियों के षड्यंत्र का शिकार होना पड़ा है। गुना के बमोरी विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह सिसोदिया और अशोकनगर जिला के मूंगावली से भाजपा प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह यादव दोनों की चुनावी नैया को पार लगाने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खूब पसीना बहाया‌। हालांकि कहा जा रहा है कि सर्वे में चाचोड़ा और मूंगावली सीटों पर प्रत्याशी बदलने की सिफारिश की गई थी लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका. परिणाम स्वरूप दोनों उम्मीदवारों को भीतरघातियों और असंतुष्टों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा है.


नव भारत न्यूज

Next Post

सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी हुईं भस्मारती में शामिल

Sat Nov 25 , 2023
उज्जैन में साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा के वचन हेतु पधारी मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी आज सुबह भस्मारती में सम्मिलित हुई,,,आरती के पश्चात शिव भक्ति से अभिभूत नजर आई और सभी शिव भक्तों से जय श्री महाकाल कहा,