विजयवर्गीय और जीतू पटवारी जैसे नेता राजस्थान जाएंगे


चुनाव समाप्त होते ही सभी प्रत्याशी मतदान केंद्र के हिसाब से आकलन करने और फीडबैक लेने में जुटे हैं. कार्यकर्ताओं से मिलकर उन्हें धन्यवाद देने का दौर भी चल रहा है. अन्नकूट समारोह के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं को भोजन इत्यादि करवाए जा रहे हैं. इधर राजस्थान में चुनाव प्रचार 23 नवंबर को समाप्त होगा. वहां 25 नवंबर को मतदान है. सूत्रों के अनुसार राजस्थान का मोर्चा संभालने के लिए भाजपा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला को भेज सकती है. पिछले दो विधानसभा चुनाव से कोटा संभाग की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला ने संभाली है. इसी तरह मध्य प्रदेश की सीमा से लगे राजगढ़ मंदसौर नीमच जिलों के कार्यकर्ताओं को भी चित्तौड़गढ़, कोटा और उसके आसपास के इलाकों में लगाया जाएगा. संघ परिवार के कुछ खास मैदानी कार्यकर्ता भी राजस्थान जा चुके हैं. इनमें मालवा प्रांत के भी कुछ कार्यकर्ता है. इधर कांग्रेस में जीतू पटवारी राजस्थान का मोर्चा संभाल सकते हैं. इनके अलावा मीनाक्षी नटराजन सहित मंदसौर नीमच के कार्यकर्ता भी वहां जाएंगे. राजस्थान में सत्ता परिवर्तन की संभावना है. इसी के मद्देनजर भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव का पूरा फोकस इस समय राजस्थान पर है.

कठिन मतदान केन्द्रों पर संघ ने खास रणनीति अपनाई

मतदान समाप्त होने के बाद जब कांग्रेस के प्रत्याशी अपने कार्यकर्ताओं से चर्चा कर रहे हैं तो उन्हें यही फीडबैक मिल रहा है कि अंतिम तीन दिनों में संघ के कार्यकर्ताओं के उतरने के बाद भाजपा की स्थिति में परिवर्तन आया है. संघ के प्रांतीय पदाधिकारी के अनुसार इस बार विधानसभा चुनाव में संघ परिवार के कार्यकर्ताओं में जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से भाजपा के लिए चुनाव प्रचार किया, उतना पहले कभी नहीं हुआ. पहले कुछ विशिष्ट विधानसभा सीटों पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन इस बार व्यापक योजना बनाकर काम किया गया. मालवा प्रांत के प्रांत प्रचारक बलिराम पटेल और प्रांत कार्यवाह विनीत नवाथे पूरी तरह से चुनाव प्रचार अभियान की निगरानी कर रहे थे. संघ की जिला और विभाग की टीम भी लगातार सक्रिय थी। इंदौर में भी कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों में संघ ने विशेष रणनीति बनाकर काम किया जिसका लाभ भी उसे मिलाने की संभावना है.

महिलाओं का रुझान किस ओर!
क्या इंदौर जिले में महिलाओं का रुझान भाजपा की तरफ दिखा? दरअसल,जिले में चार लाख से अधिक महिलाओं को लाडली बहना योजना के पैसे मिल रहे हैं. इसके अलावा भाजपा ने जिले में मालिनी गौड़ और उषा ठाकुर के रूप में दो महिला उम्मीदवार दिए. जबकि कांग्रेस की ओर से केवल रीना सेतिया को टिकट दिया गया. इंदौर शहर में महिला कांग्रेस की बजाय भाजपा का महिला मोर्चा ज्यादा प्रभावी और सक्रिय है। संघ परिवार के कुछ संगठन भी महिलाओं के बीच काम करते हैं. इस वजह से भाजपा का दावा है कि महिलाओं का रुझान भाजपा की ओर स्वाभाविक रूप से था. भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय, रमेश मेंदोला और महेंद्र हार्डिया ऐसे नेता हैं जो महिलाओं के कल्याण के कामों में हमेशा आगे रहते हैं. गोलू शुक्ला की कावड़ यात्रा में भी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होती हैं. महिलाओं और युवाओं के वोट हमेशा निर्णायक माने जाते हैं. ऐसा लगता है इन्हीं कारणों से भाजपा के रणनीतिकार महिलाओं के मत मिलने का दावा कर रहे हैं.


नव-भारत न्यूज.

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