भाजपा-कांग्रेस में सक्रिय हुये विभीषण


महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित

महाकौशल के अनेक जिलों में इन दिनों रामलीला का मंचन किया जा रहा है। मंचन के दौरान कलाकर जहां अपने किरदार से दर्शकों को भावविभोर कर रहे हैं वहीं विधानसभाओं में विभीषण की भूमिका अदा करने वाले भी सक्रिय हो गये हैं। जबलपुर की पश्चिम विधानसभा सीट में भी कुछ ऐसे ही नजारे देखने को मिल रहे हैं। कभी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे सांसद राकेश सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, फिलहाल उनके लिए हालात सकारात्मक नहीं लग रहे हैं। यहां उनको अपनी ही पार्टी के दूसरे नेताओं की बेरूखी से दो-चार होना पड़ रहा हैं एक समुदाय विशेष के नेता जो टिकट के लिए पार्टी गाइडलाइन के विपरीत जाकर अपने लिए यात्रा निकाल रहे थे, वह अब भाजपा प्रत्याशी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन चर्चा है कि मन मसोस कर औपचारिकता निभा रहे हैं।

एक और नेताजी जो जिला संगठन के मुख्य किरदार हैं और कभी नगर सत्ता के मुखिया हुआ करते थे तथा उसके बाद से इसी क्षेत्र के लिए समर्पित होकर टिकट के प्रबल दावेदार बन गये थे, अब मायूसी के साथ भाजपा प्रत्याशी का साथ निभा रहे हैं। बात कांग्रेस की करें तो यहां भी लगभग आधा दर्जन नेता विभीषण की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। यह नेता पार्टी उम्मीदवार तरूण भानोट के साथ घूम रहे हैं और प्रत्यक्ष तौर पर वफादारी की बात भी कर रहे हैं, किंतु इशारा कहीं और वोट करने के लिए कर रहे हैं। कांग्रेस में यह नजारा नया नहीं है। बीते नगर निगम चुनाव में भी पार्टी के मौकापरस्त सक्रिय थे। यह वह नेता हैं जिन्हें निगमिया चुनाव में कड़ी हार का सामना करना पड़ा था और उसका ठीकरा प्रत्याशी पर फोड़ा गया था। इसके अलावा एक और नेता जो दूसरे विधानसभा के विधायक के साथ पश्चिम सीट के उन घरों में पहुंच रहे हैं जहां ब्राम्हण रहते हैं, और कांग्रेसी होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को वोट करने की अपील करते नजर आ रहे हैं।

पाटन में भाजपा कांग्रेस को भितरघात का खतरा
जबलपुर के पाटन विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने पूर्व मंत्री और अनुभवी नेता अजय विश्नोई को जबकि 2013 के चुनाव में उन्हें इसी सीट पर पराजित करने वाले नीलेश अवस्थी को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है, क्योंकि टिकट घोषणा के पूर्व तक दोनों दलों के दूसरे अन्य दावेदार बेहद सक्रिय होकर भोपाल दिल्ली तक दौड़ लगा रहे थे , जो फिलहाल सतही तौर पर खामोश लग रहे है। दरअसल कुछ माह पूर्व भाजपा खेमे से दावेदारी कर रहे एक नेता की अगुवाई में वनभोज का आयोजन कर पाटन विधानसभा में नये भाजपाई समीकरण बनने का संकेत दिया था।

इस आयोजन के दौरान कुछ नेताओं ने गुप्त बैठक कर भावी रणनीति तय की थी, अब जबकि कई मुद्दों पर अपनी सरकार से सवाल पूछने वाले अजय विश्नोई प्रत्याशी बन गये हैं, तब वही दावेदार दबे-छुपे नई रणनीति बनाने की तैयारियों में जुट गये हैं। कुछ ऐसे ही हालात कांग्रेसी हल्के में हैं। नीलेश अवस्थी को उम्मीदवार घोषित करने के पूर्व तक इस सीट से आधा दर्जन दावेदार सक्रिय थे। इन सभी दावेदारों ने तय किया था कि नीलेश के अलावा इनमें से किसी को भी टिकट मिली तो बाकी मिलकर उसे जितवाने का प्रयास करेंगे। अब कांग्रेस की ओर से नीलेश अवस्थी तथा भाजपा की ओर से अजय विश्नोई का सियासी मुकाबला तय हो गया है, लिहाजा अब चर्चा इस बात की हो रही है कि दोनों ही अधिकृत उम्मीदवार भितरघात की आशंका का निवारण किस तरह कर पाएंगे।


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