रीवा में भाजपा-कांग्रेस के चुनावी समीकरण बिगाड़ेगी आप पार्टी


आठ में से पांच विधानसभा के प्रत्याशी किये घोषित
केजरीवाल दो बार विंध्य का दौरा कर चुके

डा0 रवि तिवारी
रीवा: दो महीने बाद प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक दल अपनी-अपनी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतर गये है. प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के टिकट दावेदार मैदानी स्तर पर सक्रिय है. लेकिन अभी तक दोनो दलो ने रीवा को लेकर एक भी प्रत्याशी के नामो की घोषणा नही की है. वही आम आदमी पार्टी ने 8 विधानसभा में से पांच प्रत्याशियों के नामो की घोषित कर दी है. इस बार दोनो प्रमुख दलो की चुनावी समीकरण आप पार्टी बिगाड़ेगी.प्रदेश के साथ खासकर विंध्य में आम आदमी पार्टी बड़ी तेजी से उभर रही है और तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित होने के लिये लगी हुई है. आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री दो बार विंध्य का दौरा कर चुके है और यहां 10 गारंटी के साथ आप पार्टी को एक मौका देने का आव्हान किया है.

वही कार्यकर्ताओं में जोश भर के गये है. सपा और बसपा के बजाय आप तेजी से चुनाव में लगी हुई है. समय रहते 8 विधानसभा में से पांच विधानसभा में प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी गई है. पहली सूची में सिरमौर से श्रीमती सरिता पाण्डेय का नाम घोषित किया गया और अभी सोमवार को जारी दूसरी सूची में रीवा से इंजी. दीपक सिंह, मनगवां से वरूण अम्बेडकर, देवतालाब से दिलीप सिंह एवं मऊगंज से उमेश त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया गया है. तीन विधानसभा शेष बची है, जिसमें गुढ़, त्योंथर एवं सेमरिया है. माना जा रहा है कि इन तीन विधानसभा में आप पार्टी कांग्रेस या भाजपा से बगावत कर आने वाले नेताओं को मैदान में उतार सकती है.

जिस तरह से संगठन से लेकर मैदानी स्तर पर आप चुनाव लड़ रही है उससे कही न कही सीधा नुकसान कांग्रेस और भाजपा को होगा. चुनावी समीकरण दोनो का बिगड़ेगा. राजनीतिक जानकारो की माने तो ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा. इसके पीछे तर्क यह है कि भाजपा के जो परम्परागत वोटर है वह टस से मस नही होंगे. लेकिन कांग्रेस का वोट बैंक खिसक सकता है. हालाकि बहुत कुछ निर्भर करेगा प्रत्याशियों की अपनी व्यक्तिगत छवि पर, अभी तक पार्टी ने जिनको टिकट दिया है वह कोई खास राजनीत के बड़े चेहरे नही है. फिर भी दोनो पार्टियों को नुकसान कही न कही होगा.

रीवा में बदलेगा चुनावी समीकरण
गत वर्ष हुए नगरीय निकाय चुनाव में आप पार्टी ने महापौर के चुनाव में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. कोई खास प्रदर्शन नही रहा, लेकिन विंध्य के सिंगरौली से आप का खाता महापौर के रूप में खुलने के बाद उसका असर पड़ोसी जिला रीवा में जरूर देखने को मिल रहा है. दरअसल इस जीत से आप के नेता और कार्यकर्ता उत्साहित है और इस बार रीवा विधानसभा के चुनाव में आप पार्टी का बेहद दखल रहेगा.

क्योंकि महापौर के चुनाव में 8387 वोट आप के प्रत्याशी रहे इंजी. दीपक सिंह को मिले थे और फिर से विधानसभा का प्रत्याशी पार्टी ने इनको ही बनाया है. दीपक पिछड़ा वर्ग से आते है कहीं न कहीं पिछड़ा वर्ग खासकर पटेल वर्ग का वोट इनके तरफ जायेगा जो कि भाजपा के वोटर माने जाते है. महापौर के चुनाव में अगर 8 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे तो यह माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में यह आकड़ा बढ़ेगा और इसका सीधा असर दोनो पार्टियों में होगा. लेकिन ज्यादा नुकसान यहां भाजपा को हो सकता है. रीवा विधानसभा में लगभग दो लाख से अधिक मतदाता है. इस बार यहा आप की निर्णायक भूमिका होगी.


नव भारत न्यूज

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