नये संसद भवन में विधायी कामकाज की शुरुआत होगी सोमवार से शुरू हो रहे विशेष सत्र में


नयी दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) सोमवार से शुरू हो रहा संसद का पांच दिवसीय विशेष सत्र ऐतिहासिक होगा जब इस सत्र के दौरान दोनों सदनों की बैठकें आज़ादी के बाद नवनिर्मित संसद के नये भवन में होंगी और वहां से विधायी कामकाज शुरू होगा। इस सत्र के दौरान स्वतंत्रता के बाद से अब तक की संसदीय यात्रा में प्राप्त उपलब्धियों, अनुभवों, संस्मरणों पर चर्चा होगी।

लोकसभा सचिवालय द्वारा बुधवार को जारी बुलेटिन में जानकारी दी गयी थी कि संसद के विशेष सत्र में संविधान सभा से लेकर आज तक संसद की 75 वर्षों की यात्रा , उपलब्धियों, अनुभवों, संस्मरणों पर चर्चा होगी तथा चार विधेयक- एडवोकेट संशोधन विधेयक 2023, प्रेस एवं आवधिक पंजीकरण विधेयक 2023, डाकघर विधेयक 2023 तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्त विधेयक 2023 पारित किया जाना है। पहले दो विधेयक राज्यसभा से पारित एवं लोकसभा में लंबित हैं।

नये संसद भवन में विधायी कामकाज शुरू होने की आधिकारिक सूचना भले ही जारी नहीं की गयी हो लेकिन लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार इसके लिए तैयारियां पूरी हो गयी हैं। अठारह सितंबर को संसद के पुराने भवन में दोनों सदनों की कार्यवाही होगी और उसी दिन देश की संसदीय यात्रा पर चर्चा होगी तथा अगले दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी के दिन गणपति पूजन के पश्चात नये भवन में कामकाज शुरू हो जाएगा । शुक्रवार को लोकसभा महासचिव की अगुवाई में संसदीय कार्यवाहियों की मॉक ड्रिल की गयी और सदन में मतदान आदि की डिजिटल प्रणालियों की जांच की गयी।

मौजूदा संसद भवन का शिलान्‍यास 12 फरवरी 1921 में हुआ था। इसका निर्माण कार्य करीब छह वर्षों तक चला था। इस तरह पुराना संसद भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था। इसे जनवरी 1927 में ब्रिटिश शाही विधान परिषद के सदन के रूप में खोला गया था। भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के बाद यहां संविधान सभा आसीन हुई और फिर 1950 में भारत का संविधान लागू होने के बाद इसे भारतीय संसद कहा गया।

लगभग एक सदी पुराना संसद भवन देश की राजधानी की सबसे शानदार इमारतों में से एक है। यह विश्व के किसी भी देश में विद्यमान वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। यह एक विशाल वृत्ताकार भवन है, जिसका व्यास 560 फुट तथा जिसका घेरा 533 मीटर है। यह लगभग छह एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। भवन के 12 दरवाजे हैं, जिनमें से पाँच के सामने द्वार मंडप बने हुए हैं। पहली मंजिल पर खुला बरामदा हल्के पीले रंग के 144 स्तंभों से सुसज्‍जित हैं। जिनकी प्रत्येक की ऊँचाई 27 फुट है। इसकी डिजाइन विदेशी वास्‍तुकारों ने बनायी थी लेकिन इसकी वास्‍तुकला पर भारतीय परंपराओं की गहरी छाप है।

नया संसद भवन मौजूदा इमारत के मुकाबले बड़ा है। नये संसद भवन का क्षेत्रफल लगभग 17 हजार वर्ग मीटर है। नये संसद भवन का निर्माण कुल 64 हजार 500 वर्ग मीटर भूमि पर किया गया है। यह एक चार मंजिली, पूरी तरह से भूकंप रोधी इमारत है। वर्तमान संसद भवन की लोकसभा में 590 सांसदों के बैठने की जगह है, जबकि नयी इमारत में बनी लोकसभा में 888 सीटें हैं। दर्शक दीर्घा में 336 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। नयी इमारत की राज्य सभा में सदस्यों के बैठने की क्षमता को 280 की बजाय 384 किया गया है। दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के दौरान नयी लोकसभा में एक साथ 1272 से ज्यादा सांसद बैठ सकेंगे।

भारतीय जनता पार्टी सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी दलों ने अपने-अपने सदस्यों की सदन में पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी किया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस सत्र में सरकार संसद में कोई महत्वपूर्ण विधेयक या प्रस्ताव लाकर विपक्ष को चौंका सकती है। बुलेटिन में हालांकि केवल चार विधेयकों के बारे में जानकारी दी गयी है लेकिन सरकार को संसद में कुछ नए कानून या अन्य प्रस्ताव पेश करने का विशेषाधिकार भी है और यह सूचीबद्ध एजेंडे का हिस्सा नहीं हो सकते हैं। माना जा रहा है कि संसद के इस विशेष सत्र में आरक्षण विधेयक पेश किया जा सकता है , जिसमें संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाये।

उल्लेखनीय है कि कई दशकों से लंबित इस विधेयक को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया के दलों में काफी मनमुटाव रहे हैं। कांग्रेस जहां इस विधेयक को पारित किये जाने के पक्ष में रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी एवं कुछ अन्य दल इसका विरोध करते रहे हैं। चर्चा है कि सरकार इस विधेयक के जरिए विपक्षी एकता छिन्नभिन्न करने का प्रयास कर सकती है।

सरकार ने रविवार को शाम साढ़े चार बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलायी है जिसमें संसद के पांच दिवसीय विशेष सत्र के बारे में सरकार सभी दलों के नेताओं को जानकारी देगी और उनके साथ विचार-विमर्श करेगी। माना जाता है कि विपक्षी नेता इस बैठक में सरकार से इस बारे में सफाई मांगेंगे।

लोकसभा एवं राज्यसभा सचिवालयों ने हाल में घोषणा की है कि संसद का विशेष सत्र 18 सितंबर से शुरू होगा और सरकार के कामकाज को देखते हुए यह 22 सितंबर तक चलेगा। इसमें कहा गया कि सत्र आमतौर पर पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न एक बजे और फिर अपराह्न दो बजे से शाम छह बजे तक चलेगा। विशेष सत्र के दौरान दोनों सदनों में प्रश्नकाल और गैर-सरकारी कामकाज नहीं होगा।


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