विदेश से बहनों ने भेजी भगवान गणेश के लिए राखी


आज रात 9 बजे बड़ा गणेश मंदिर में बांधी जाएगी 51 फीट की राखी, हांगकांग व लंदन से भी आयी

उज्जैन: देश भर में आज रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। भाई बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर भद्रा काल का साया होने पर भाइयों की कलाई पर रात 9 बजे बाद बहाने रक्षा सूत्र बंधेगी। इस स्नेह के प्रतीक पर्व का उत्साह महाकाल मंदिर के समीप बड़ा गणेश मंदिर में भी दिखाई देगा। भगवान गणेश को भाई मानने वाली हांगकांग, लंदन, अमेरिका और भारत के कई राज्यों से बहनों ने राखी भेजी है। भगवान गणेश को सबसे बड़ी 51 फीट की राखी बांधी जाएगी।श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रतिवर्ष रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। आज देशभर में भाई बहन के अटूट प्रेम का रिश्ता माने जाने वाले रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की शुरुआत बाबा महाकालेश्वर के मंदिर से होगी जहां भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा को राखी बंधेगी।

वही बहने भी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बंधेगी। लेकिन भद्रा काल के चलते रक्षाबंधन का पर्व रात 9 बजे बाद मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर्व के चलते महाकाल मंदिर के समीप बड़ा गणेश मंदिर में भी भगवान को राखी बांधने की धूम दिखाई देती। प्रतिवर्ष देश-विदेश से यहां भगवान गणेश के लिए बहाने राखी भेजती हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि इस बार गणेश भगवान के लिए मुम्बई, जयपुर, बेंगलोर, भोपाल, इंदौर, पटना के साथ अमेरिका, लन्दन और हांगकांग से भी बहनों ने राखी भेजी है।

पंडित व्यास ने बताया कि भगवान शिव और पार्वती को जगत माता पिता माना जाता है और इस मान से भगवान गणेश को कई महिलाए अपना भाई मानती है। देश भर की कई बहने बड़े गणेश के लिए प्रति वर्ष राखी भेजती है। इसमें मुम्बई निवासी राजकुमारी जैन ने सोने की गिन्नी वाली राखी भी भेजी थी जो प्रतिवर्ष भगवान गणेश को राखी वाले दिन अर्पित की जाती है। इसके साथ ही भारत की सबसे बढ़ी 51 फ़ीट की राखी भी भगवान गणेश को को अर्पित की जाएगी। भगवान गणेश के लिए राखी के साथी रिद्धि सिद्धि के लिए बहनों ने उपहार स्वरूप साडिय़ां भेजी है वहीं भगवान गणेश के वाहक के रूप में मूषक (चूहा) के लिए आसान भी आया है।
सुबह 10 बजे शुरू होगा भद्राकाल
पंडित आनंद शंकर व्यास के अनुसार रक्षाबंधन पर सुबह 10 बजे भद्राकाल की शुरुआत हो जाएगी और दिन भर यह बना रहेगा रात 8.50 पर भद्रा समाप्त होगी उसके बाद ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला ने बताया कि रक्षाबंधन के पर्व पर दिनभर भद्रा का साया रहने के कारण रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जा सकता। ऐसी मान्यता है कि रक्षाबंधन के पर्व काल में पूर्णिमा तिथि में भद्रा का योग बनता हो तो भद्रा का वह काल छोड़ देना चाहिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए। रात्रि नौ बजकर सात मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगी उसके बाद रक्षा बंधन का पर्व मनाना शास्त्रोचित रहेगा। धार्मिक ग्रंथों में भद्रा के संबंध में अलग-अलग विचार प्रकट किया गया है। कुल मिलाकर जब भद्रा का वास पृथ्वीलोक या भूलोक पर हो तब उस भद्रा का त्याग कर देना चाहिए व भद्रा की समाप्ति की प्रतीक्षा करनी चाहिए उसके बाद ही रक्षा बंधन का पर्व मनाना चाहिए।


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