सरकार और समाज मिलकर खड़े हो जाए तो समूचा परिदृश्य बदल सकता है: शिवराजसिंह चौहान


हेलीकॉप्टर से गेती लेकर ऊतरे मुख्यमंत्री हलमा कार्यक्रम में पहुंचे, किया श्रमदान

झाबुआ: आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिला मुख्यालय के निकट गोपालपुरा हवाई पट्टी, हाथीपावा पहाडी पर शिवगंगा के माध्यम से दो दिवसीय हलमा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दुसरे दिन रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी शिरकत की। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सुबह हाथीपावा की पहाडी पर बने हेलीपेड पर उतरे, इस दौरान उन्होने केसरिया कुर्ता पहनाा था और कंधे पर गेती लेकर उतरे। मुख्यमंत्री चौहान ने सभा स्थल पर अपने गले में ढोल लेकर उसे बजाया और हाथीपावा पहाडी पर हजारों वनवासियों के साथ सामूहिक कंटूर ट्रेचिंग खोदने के काम में हाथ बटाया। हलमा में झाबुआ, अलीराजपुर, गुजरात के दाहोद, पंचमहाल और राजस्थान के बासवाडा आदि जिलों के 1500 गांवों से हजारों आदिवासी पुरूष, महिलाऐं और बच्चे कार्यक्रम मेें सम्मिलित हुए। सुबह 8 से 11 बजे तक हाथीपावा की पहाडी पर हजारों कंटॅूर खोदे गये। इस सामूहिक प्रयास से बारिस का जल जमीन में संरक्षित किया जा सकेगा और आज किए गए सभी के सामुहिक श्रमदान से झाबुआ सहित आस पास के क्षेत्रों में जमीन का वाटर लेवल बढेगा। साथ ही हाथीपावा की पहाडी को हरा भरा करने के लिये बडे स्तर पर पौधारोपण भी किया गया।
हलमा अब पूरे प्रदेश की बनेगा पहचान
हवाई पट्टी पर हलमा एवं जिले की विकास यात्रा का समापन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहां की सरकार और समाज मिलकर खड़े हो जाए तो समूचा परिदृश्य बदल सकता है। समाज के संकल्प को सरकार के संसाधन मिलेंगे तो हम एक नया परिदृश्य निर्मित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासी समाज की हलमा परंपरा अद्वितीय है। झाबुआ का हलमा अब पूरे प्रदेश की पहचान बनेगा और इसे पूरे प्रदेश मेें आदिवासी क्षेत्रों में लागू किया जायेगा। यह संकट में खड़े मनुष्य की सहायता का संदेश देती है।

उन्होंने कहा की हलमा की इस परंपरा को समूचे मध्य प्रदेश में विस्तारित करते हुए जल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थितजनों को इस आशय का संकल्प भी दिलाया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आज वे यहां हलमा में आए सभी परमार्थियों का स्वागत और अभिनन्दन करने के लिए आए हैं। उन्होंने शिवगंगा परिवार को हलमा की अद्भुत परंपरा को पुनर्जीवित करने और प्रतिष्ठा प्रदान करने के लिए बधाई और साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी परंपरा है जिससे हम प्रकृति को ग्लोबल वार्मिंग से बचा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि हाथीपावा की इस पहाड़ी से यह अलख गांव-गांव पहुंच रही है। उन्होंने वनवासी समाज से आग्रह किया कि वे इस महान परंपरा को सतत बनाए रखें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आक्रामक अंदाज में कहा कि प्रदेश में किसी भी क्षेत्र मेें धर्मातंरतरण नहीं होने दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने आयोजन में स्व. सांसद दिलीपसिंह भूरिया को पेैसा कानून का जनक बताते हुए उनके चरणों में नमन करते हुए स्व. भूरिया के प्रति आभार प्रकट कर उनकी पुत्री पूर्व विधायका निर्मला भूरिया को आभार पत्र भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आदिवासी बहनों को लाडली बहना योजना की समग्र जानकारी और पेैसा कानून के बारे मेें आदिवासियों को विस्तार से उनके हक की जानकारी दी।
प्रदर्शनी का अवलोकन, विकास कार्यो का लोकार्पण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विकास यात्रा प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। विकास यात्रा के दौरान जिले की 375 ग्राम पंचायतों के 813 गांवों में तथा 5 नपं एवं नगर पालिकाओं के 78 वार्डों में 3 विकास रथ गए। इस दौरान 18 हजार 888 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 16 हजार 854 स्वीकृत किए गए, जिससे जनता को भटकना नहीं पडा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ और अलीराजपुर जिले में नामातंरण, बंटवारा संबंधित राजस्व की समस्याओं के निपटारे के लिए 27 फरवरी से 17 मार्च तक गांव-गांव कैंप लगाए जाएंगे। विकास यात्रा के समापन समारोह में जिले के 26 करोड 17 लाख 16 हजार लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 245 करोड 79 लाख 93 हजार लागत से विभिन्न विकास निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि 5 हजार 8 करोड के कामों का लोकार्पण 13 हजार 181 करोड के 857 कामों का भूमि पूजन भी किया गया। मंच पर आदिवासी आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान, शिवगंगा प्रमुख महेश शर्मा सांसद गुमानसिंह डामोर, आदिवासी संत कानू महाराज मौजूद थे। कार्यक्रम में मंच भाजपा जिलाध्यक्ष भानु भूरिया, निर्मला भूरिया, कलेक्टर रजनी सिंह, पुलिस अधिक्षक अगम जैन सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बडी संख्या में आदिवासी समुदाय उपस्थित था।
जनजागृति की सराहना
हलमा कार्यक्रम में शामिल होने प्रथम दिन शनिवार शाम प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल झाबुआ पहुंचे। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं को लागू करके जनजाति समाज को मुख्यधारा से जोडने का कार्य हो रहा है। देश में जनजाति के विकास के लिए आज जितने कार्य हो रहे हैं वह कभी नहीं हुए हैं। बहुत से ऐसे लोग है जिन्हे जरूरत होती है उसके खेत में जाकर एक दुसरे की मदद करना, शादी में सहयोग करना, बहुत से ऐसे झगडे हैं उसको भी निपटाना, यह हलमा जैसे कार्यक्रम में से निकलता है और गांव में धरती माता के अंदर से कैसे पानी निकालना, गांव में तालाब बनाना सरकार नहीं बल्कि खुद जाकर कार्य करना आत्मीयता से गांव के लिए पानी निकालना यह बहुत बडी बात है।

शिवगंगा के माध्यम से किए जा रहे हलमा की मुक्त कंठ से तारीफ की एवं सिकल सेल एनीमिया के लिए चलाई जा रही जनजागृति की भी सराहना की। इस अवसर पर शिवगंगा के प्रमुख पद्मश्री महेश शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हलमा के माध्यम से, एक दूसरे की मदद से हम समाज को आगे बढा सकते हैं एवं समाज को नई दिशा दे सकते हैं। कार्यक्रम में बडी संख्या में ग्रामीणजन अपनी गेती ,पावडा, तगारी लेकर उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त कई गणमान्य नागरिक, आईआईटी के छात्र, एम्स के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। उदबोधन पश्चात राज्यपाल द्वारा सभा स्थल के समीप लगाई गई विकास योजना की प्रदर्शनी जिसमें मुख्य रूप से आदिवासी गुडिया, आजीविका परियोजना की महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पाद, कडकनाथ प्रोजेक्ट, महिला बाल विकास विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं बेहतर प्रदर्शनी के लिए तारीफ की।


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