सर्दियों में जोड़ों की समस्या- जैसे ही सर्दियों की ठंडी हवाएं अपना रंग दिखाना शुरू करती हैं, सबसे पहले असर आपके जोड़ों पर महसूस होने लगता है। शुरुआत में हल्की सी जकड़न होती है, लेकिन धीरे-धीरे घुटने, कमर, कंधे और पुराने चोट वाले हिस्से ऐसे दर्द देने लगते हैं जैसे […]
सुरुचि
परीक्षा और तैयारी एक-दूसरे के पूरक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का बहुमुखी विकास करना और उसे अपने जीवन-लक्ष्यों तक पहुँचाने में सक्षम बनाना है। जीवन की हर छोटी-बड़ी सफलता के पीछे तैयारी, प्रयास और आत्मविश्वास का अनमोल योगदान होता है। परीक्षा इसी तैयारी […]
*कहाँ गए वो दिन? और कहाँ गए हम?* (व्यंग्य–लेख) (डॉ. अमृता अवस्थी) सुना है कि हम “बहुत प्रगति” कर गए हैं।इतनी प्रगति कि अब हमें अपनी माँ की उँगलियों के फंदे भी पुराने ज़माने की चीज़ लगते हैं। अब स्वेटर नहीं, “ब्रांडेड जैकेट्स” पहनते हैं—जिनमें न प्यार की लूप होती […]
हर बीमारी का घरेलू इलाज तुरंत आराम पाएं ! सेहत से जुड़ी एक मशहूर कहावत है ‘इलाज से बेहतर बचाव है’। यह बात पूरी तरह सही भी है कि किसी बीमारी की चपेट में आने के बाद इलाज कराने से बेहतर है कि ऐसे उपाय किए जाएं,घरेलू उपचार मुख्य रूप […]
सर्दियों में पौधों को पानी देने का सही तरीका सर्दियों में पौधों की देखभाल अन्य मौसम की तुलना में अधिक सावधानी मांगती है। जहाँ तापमान कम होने से मिट्टी देर से सूखती है तो पौधों की वृद्धि भी धीमी पड़ जाती है और जड़ों की पानी की ज़रूरत काफी घट […]
डिनर पर बच्चे से पूछें प्यार भरे सवाल प्यार भरी बातचीत किसी भी रिश्ते की नींव होती है। जब आप डिनर पर बच्चे से सहज, सरल और प्यारे सवाल पूछते हैं, तो उसका प्रभाव सिर्फ उस रात पर नहीं, बल्कि उसके संपूर्ण मानसिक विकास और आपके रिश्ते पर पड़ता […]
मातृत्व के बाद सर्वाइकल का खतरा सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस ऐसी समस्या है जो गर्दन के हिस्से में स्थित जोड़ों को प्रभावित करता है। इससे गर्दन के आस-पास के हिस्से में दर्द होने लगता है।सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, जिसे कभी-कभी गर्दन का गठिया भी कहा जाता है, आपकी ग्रीवा रीढ़ की हड्डी में होने […]
तिल तिल घुटाए या संभावना बन जाए संदीप खमेसरा अकेलापन डराता है। विशेषकर सेवानिवृति के बाद। व्यक्ति वृद्धावस्था में भी काम ही की तलाश में रहता है। किसी न किसी उद्यम में स्वयं को संलग्न रखना चाहता है। दावा यह करता है कि संलग्नता से क्रियाशीलता बनी रहती है, लेकिन […]
शीर्ष का शाद्धिक अर्थ है सर्वोच्च अर्थात सिर, इसीलिए सिर के बल किये जाने वाले इस आसन को “शीर्षासन” कहा जाता है। शीर्षासन की विधिः- दोनों हाथों की अँगलियों को आपस में बाँधकर कोहनी तक हाथ फैलाकर भूमि पर टिकादें। दोनों हाथों के बीच जो रिक्त स्थान बनेगा […]