कांग्रेस: मजबूती और कमजोरी !

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इस समय अपने खराब दौर से गुजर रही है. एक के बाद एक चुनाव हारने के अलावा स्थिति यह है कि कांग्रेस 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल भी नहीं बन पाई. इसके बावजूद देश में आज भी कांग्रेस का व्यापक प्रभाव है.उसके पास राष्ट्रीय स्तर पर 20 फ़ीसदी मतदाता है. कांग्रेस आज भी एकमात्र ऐसा दल है जिसे सभी वर्गों और क्षेत्रों में समर्थन है. कांग्रेस का एक गौरवशाली अतीत है. उसने देश के महान स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व किया है. कांग्रेस ऐसी पार्टी है जिसने युग परिवर्तनकारी नेता दिए हैं. यह श्रंखला दादाभाई नरोजी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू,सरदार पटेल लाल, लाल बहादुर शास्त्री से शुरू होकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉक्टर मनमोहन सिंह तक जाती है. इन सभी नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर देश को मजबूत करने के प्रयास किए हैं. जाहिर है कांग्रेस का उल्लेख किए बिना देश का इतिहास अधूरा है.बहरहाल, इस समय पूरी कांग्रेस राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर फोकस किए हुए हैं. राहुल गांधी ने 7 सितंबर से तमिलनाडु के कन्याकुमारी से भारत जोड़ो पदयात्रा प्रारंभ की थी जिसका समापन इसी महीने श्रीनगर में होगा. इस पदयात्रा के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश आया है और पार्टी में नई जान दिख रही है. मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश की स्थापना के बाद से कांग्रेस ने लगभग 6 दशक तक यहां शासन किया है. 2003 के बाद से जरूर उसमें कमजोरी देखी गई लेकिन 2018 में उसने भाजपा से सत्ता छीन ली थी. मौजूदा दौर में भी उसका प्रभाव प्रदेश के गांव गांव में है. यही वजह है कि हाल ही में संपन्न निकाय चुनाव में कांग्रेस ने 19 में से आठ नगर निकाय जीतने में सफलता प्राप्त की है. जबकि भाजपा को सत्तारूढ़ होने के बावजूद 11 निकाय जीतने में ही सफलता मिली है. ऐसा तब हुआ जब पार्टी के प्रदेश स्तर के नेताओं ने नगरीय निकाय चुनाव में अधिक भूमिका नहीं निभाई. यदि धार जिले का ही उदाहरण लिया जाए तो वहां कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सहित कोई भी बड़ा नेता चुनाव प्रचार करने के लिए नहीं किया. इसके बावजूद जिले के 9 में से 6 निकायों पर कांग्रेस को सफलता मिली है. जाहिर है प्रदेश के आदिवासी अंचल में आज भी कांग्रेस का सबसे अधिक प्रभाव है. इसका साफ मतलब है कि कांग्रेस देश से खारिज नहीं की गई है, बल्कि देश के मतदाता आज भी चाहते हैं कि वह सशक्त होकर देश को मजबूत करने में अपना योगदान दें. दरअसल, कांग्रेस के लिए संभावनाएं समाप्त नहीं हुई है लेकिन इसके लिए उसे अपना घर दुरुस्त करना होगा. कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या खुद कांग्रेसी हैं, जो पार्टी के लिए समस्याएं पैदा करते रहते हैं. हाल ही में राहुल गांधी की यात्रा के दौरान जम्मू कश्मीर की एक सभा में दिग्विजय सिंह ने फिर से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे. दिग्विजय सिंह अपने संबोधन में जो सवाल उठा रहे थे, वही सवाल पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहराता आ रहा है. सवाल यह है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी जहां देश को जोडऩे और मोहब्बत बांटने का नैरेटिव सेट कर रहे थे, वहां दिग्विजय सिंह को इस तरह से आत्मघाती बयान देने की क्या आवश्यकता पड़ी ? सर्जिकल स्ट्राइक के संबंध में भारतीय सेना ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर सिलसिलेवार घटनाक्रम बताया था. क्या दिग्विजय सिंह को भारतीय सेना पर भी भरोसा नहीं है ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते करते कांग्रेसी यह भूल जाते हैं कि वे अनजाने में ही भारतीय सेना और कई बार देश का ही विरोध कर बैठते हैं. दिग्विजय सिंह पुराने और अनुभवी नेता हैं. उनकी देशभक्ति और निष्ठा पर किसी को संदेह नहीं है, लेकिन वे जिस तरह से बयान बाजी करते हैं उससे कांग्रेस को नुकसान होता है, यह बात अनेक बार जाहिर हो चुकी है. दिग्विजय सिंह जब इस तरह का संबोधन दे रहे थे तो जयराम रमेश माइक पर आकर उनको रोकने की कोशिश कर रहे थे. यह दृश्य कांग्रेस की मजबूती नहीं दिखाता. ऐसे संबोधन और बयान राहुल गांधी की यात्रा का मकसद भटकाते प्रतीत होते हैं. इसलिए कांग्रेस को इस तरह की हरकतों से बचना चाहिए. इसी तरह स्थानीय स्तर पर भी कांग्रेस के झगड़े सामने आते रहते हैं. हाल ही में इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंद बागड़ी की नियुक्ति की गई, लेकिन मात्र डेढ़ घंटे बाद इस नियुक्ति को होल्ड कर दिया गया. स्थिति यह हो गई कि अरविंद बागड़ी के खिलाफ कांग्रेसियों ने पुतले तक जलाएं. इंदौर शहर कांग्रेस में अब दो नेता अध्यक्ष पद पर होने का दावा कर रहे हैं.ऐसे तमाशों से कांग्रेस को नुकसान होता है. जहां जनता चाहती है कि कांग्रेस मजबूती के साथ विपक्ष की भूमिका निभाए, वहीं कांग्रेसी एक दूसरे के खिलाफ लड़ते झगड़ते नजर आते हैं. जाहिर है कांग्रेस को अपनी कमजोरियों को दूर करना होगा. यदि वह ऐसा कर पाई तो उसे मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता. इस संबंध में शीर्ष स्तर पर कांग्रेस ने गंभीर चिंतन कर अपनी कमजोरियों को दूर करना चाहिए.

नव भारत न्यूज

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