डेढ़ घंटे में ही अरविंद बागड़ी की नियुक्ति होल्ड की गई

सियासत

इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जो कुछ हुआ वह बहुत कम ही होता है। मात्र डेढ़ घंटे के अंदर उनकी नियुक्ति को प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल ने होल्ड पर रख दिया। जाहिर है इस नियुक्ति को लेकर बवाल मच गया था और अरविंद बागड़ी का भारी विरोध हो रहा था। सूत्रों के अनुसार अरविंद बागड़ी के खिलाफ कतिपय पर आरोप हैं जिन्हें आलाकमान तक पहुंचाया गया। अरविंद बागड़ी की नियुक्ति होते ही सैकड़ों कांग्रेसी भोपाल पहुंचे थे जिन्होंने अरविंद बागड़ी के खिलाफ कई मामले पेश किए। सूत्रों के अनुसार उनकी नियुक्ति को होल्ड करने के पीछे कांग्रेस की गुटबाजी भी हो सकती है।

इंदौर के दिग्विजय सिंह समर्थकों को उनकी नियुक्ति पर एतराज था। जो भी हो सही बात पूरी तरह से पता नहीं चली है लेकिन अरविंद बागड़ी की नियुक्ति को होल्ड पर रखे जाने को लेकर कांग्रेस में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। रविवार को साढे़ 3 वर्षों तक बिना कार्यकारिणी के काम करने वाले विनय बाकलीवाल को हटाकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने 105 प्रदेश महासचिवों की सूची में डाल दिया है। दरअसल, विनय बाकलीवाल को उनकी विवादास्पद कार्यशैली का खामियाजा भुगतना पड़ा । विनय बाकलीवाल को प्रदेश महासचिव बनाने को लेकर भले ही उनके समर्थक इसे पदोन्नति का नाम दें, लेकिन इतनी भीड़ में पदाधिकारी बनने का कोई महत्व नहीं है। खास बात यह है कि प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि अभी पदाधिकारियों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। पिछली बार की कार्यकारिणी में 250 प्रदेश महासचिव थे।

यानी 150 की संख्या फिर से 200 पार हो सकती है। बहरहाल,विनय बाकलीवाल अपने हश्र के लिए खुद जवाबदार हैं। उन्होंने सभी को साथ में लेने की बजाय गुटबाजी की। विनय बाकलीवाल से इंदौर के सभी बड़े नेता सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी, संजय शुक्ला और विशाल पटेल नाराज थे। उन्होंने सबसे ज्यादा नाराज सज्जन सिंह वर्मा को किया जिनकी वजह से वे शहर कांग्रेस अध्यक्ष बने थे और जिनके ही कारण उनके कमलनाथ से संबंध बने थे। विनय बाकलीवाल की लगातार शिकायतें जा रही थी। कमलनाथ ने संजय शुक्ला की नाराजगी को महत्त्व देते हुए शहर अध्यक्ष पद पर गोलू अग्निहोत्री के दावे को दरकिनार किया। इसका दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि गोलू अग्निहोत्री को विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 से टिकट दिया जाएगा क्योंकि कमलनाथ पहले ही कह चुके हैं कि जिन लोगों को जिलों में पद दिए जाएंगे उनके नामों पर टिकट के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

कमलनाथ की इसी घोषणा के कारण सदाशिव यादव बच गए क्योंकि सदाशिव यादव ने बार-बार कमलनाथ से मिलकर यह कहा कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, उन्हें संगठन में ही रखा जाए। सदाशिव यादव को दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने बचा लिया। दरअसल, ग्रामीण जिले में कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता जिलाध्यक्ष के कद का नहीं है जो विधानसभा टिकट के दावेदार ना हो। इसी स्थिति का फायदा सदाशिव यादव को मिला। बहरहाल, अरविंद बागड़ी की नियुक्ति को होल्ड करने से यह बात सामने आई है कि कुछ ना कुछ विवाद जरूर हुआ है जिसका पता चलना है। दूसरी बात यह तय हो गई है कि भले ही अरविंद बागड़ी को भी हटाया जाए लेकिन अब विनय बाकलीवाल की वापसी होना संभव नहीं है। जाहिर है यदि अरविंद बागड़ी को हटाया गया तो इसका फायदा किसी तीसरे को मिल सकता है।

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