“जय महाकाल” के नारे से राहुल ने दिया भाजपा को जवाब

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

भाजपा के जय श्रीराम के प्रचलित नारा के जवाब में राहुल गांधी ने महाकाल की नगरी उज्जैन में “जय महाकाल” का नारा बुलंद कर और महाकाल मंदिर में साष्टांग दंडवत कर अपने उपर लगे कई आरोपों को खारिज कर दिया. राहुल ने जनसभा को संबोधित करते हुए जिस तरह से भगवान शिव व तपस्या को केन्द्र बनाकर भाजपा सरकार को घेरने का प्रयास किया उससे कांग्रेसी उत्साहित हैं. जानकार मान रहे हैं कि भाजपा के कठोर हिन्दुत्व का जवाब कांग्रेस ने साफ्ट हिन्दुत्व से देकर एक तीर से कई निशाना साधा है. एक तरफ जहां हिंदू धर्म व हिन्दुत्व के नाम पर राजनीति करने वालों को कांग्रेस ने घेर लिया है वहीं दूसरी ओर अपने उपर लगे कथित आरोप का जवाब भी दे दिया है.

मध्यप्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से गदगद कांग्रेसी

मध्यप्रदेश में 370 किलोमीटर की सफलतम भारत जोड़ो यात्रा के बाद न सिर्फ सूबे के नेताओं बल्कि केन्द्रीय नेताओं के हौसले बुलंद हैं. चुनावी राज्य में मिले जनसमर्थन को पार्टी भविष्य के लिए बेहतर मान रही है. इस यात्रा के दौरान पहले से मौजूद प्रदेश स्तरीय गुटबाजी को समाप्त करने का मौका भी मिला है. चर्चा है कि राहुल गांधी ने प्रदेश के युवा नेताओं के साथ बुजुर्ग नेताओं को कदमताल कराकर एकजुटता के साथ भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी के लिए तैयार कर दिया है. जिस तरह से मध्यप्रदेश के विभिन्न इलाकों में यात्रा को समर्थन मिला उसके आधार पर पार्टी अपने लिए बेहतर परिणाम की उम्मीद लगा रही है.

गहलोत व पायलट को साथ नचाकर राहुल ने खत्म कराया ताना तनी

आंतरिक शीतयुद्ध के गिरफ्त में फंसे राजस्थान की कांग्रेसी नेताओं को राहुल गांधी ने जिस शालिनता और उत्साह के साथ एक करने का प्रयास किया है उसकी चौतरफा प्रशंसा हो रही है. मध्यप्रदेश की सीमा से राजस्थान के सीमा में प्रवेश करने के दौरान राजस्थान के कांग्रेसी नेताओं द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट को एक साथ राहुल गांधी ने नचाया उससे की तरह भ्रम और भ्रामक खबर पर पूर्ण विराम लग गया है. कर्नाटक के तर्ज उक्त दोनों नेताओं को एकजुट कर राहुल गांधी ने न सिर्फ संगठन के अंदर आत्मविश्वास विश्वास बढ़ाया है बल्कि विपक्षी खेमे को धाराशाई कर दिया है.

दिल्ली में कम वोट प्रतिशत से परेशान हुए राजनेता

दिल्ली एमसीडी चुनाव में चुनाव आयोग के तमाम प्रयास के बावजूद वोट के लिए कम वोटरों का निकलना राजनीतिक दलों के लिए चिंता का कारण बन गया है. एमसीडी पर भाजपा का कब्जा है ऐसे में कुछ लोग इसे बदलाव के लिए वोट बता रहे हैं तो भाजपाई इसे मतदाताओं के संतुष्टि का वोट बताकर अपने लिए बेहतर परिणाम की उम्मीद लगा रहे हैं. हालांकि कांग्रेस इसबार की लड़ाई त्रिकोणीय करने के प्रयास में लगी रही लेकिन ज्यादातर सीट पर भाजपा व आप के बीच का सीधा मुकाबला दिख रहा है.

गुजरात में मुस्लिम वोटरों के रूख पर है सबकी नजर

गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी व ओवैसी की पार्टी की मौजूदगी से कांग्रेसी खेमे में खलबली है. अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंधमारी से चुनावी परिणाम बदलने की संभावना है. हालांकि कांग्रेसी रणनीतिकार दावा कर रहे हैं कि उक्त दोनों दलों के उद्देश्य को मतदाता समझ गया है इसलिए वोट के बिखराव की संभावना कम है फिर भी यदि ऐसा हुआ तो गुजरात चुनाव परिणाम पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा.

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