सफल रही राहुल की यात्रा , अब गेंद कांग्रेसियों के पाले में

यात्रा के कारण बने माहौल को मजबूत संगठन में बदलना स्थानीय नेताओं की जवाबदारी 
मिलिंद मुजुमदार
 इंदौर: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 12 दिन मध्यप्रदेश में रहने के बाद रविवार शाम को राजस्थान में प्रवेश कर गई। राजस्थान के डोंगरगांव में उनका नाइट कैंप था।मध्यप्रदेश में यात्रा हर दृष्टि से सफल रही है। एमपी में बुरहानपुर के रास्ते प्रवेश के साथ ही राहुल गांधी को देखने और सुनने जबरदस्त भीड़ उमड़ी। खास तौर पर इंदौर, उज्जैन और आगर में उनके लिए जनसैलाब उमड़ा।
मालवा और निमाड़ में उन्होंने अपने अधिकांश  भाषणों में  किसानों, मजदूरों  और छोटे व्यापारियों की समस्याओं पर खुद को केंद्रित रखा। यही नहीं राहुल इन किसानों और छोटे व्यापारियों से मिले भी। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को मिली सफलता के कारण  प्रदेश कांग्रेस में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह और मजबूत होकर उभरे हैं। प्रदेश में राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को अब 2023 तक समन्वय बनाकर चलना होगा, अन्यथा कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की यात्रा के दौरान पूरी कांग्रेसी एकजुट नजर आई। यह एकजुटता आगे भी जारी रहेगी या नहीं , यह भविष्य की गर्त में छिपा है। राहुल गांधी की यात्रा के राजस्थान में प्रवेश करने के बाद कमलनाथ को अपना फोकस फिर से संगठन को मजबूत करने में  लगाना होगा। राहुल गांधी की यात्रा ने जो माहौल बनाया है , उसके बाद गेंद अब प्रदेश कांग्रेस के पाले में हैं । इस माहौल को मजबूत संगठन में बदलना अब  प्रादेशिक और स्थानीय कांग्रेसियों की जवाबदारी है।
मालवा निमाड़ में कांग्रेस को मजबूती मिली
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को मध्यप्रदेश में  जबरदस्त जनसमर्थन मिला है। उनकी यात्रा के कारण मालवा निमाड़ में कांग्रेस को मजबूती मिली है। यात्रा में उमड़े जनसैलाब से राहुल गांधी उत्साहित दिखे। उन्होंने अपनी यात्रा की सफलता के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की प्रशंसा भी की है।  कमलनाथ ने एक बार फिर से  अपनी रणनीति, मैनेजमेंट और संगठन क्षमता का लोहा मनवाया है।  उन्होंने राहुल के समक्ष पूरी प्रदेश कांग्रेस को एकजुट किया। इसी का नतीजा था कि बुरहानपुर जिले में प्रवेश करते ही  राहुल का जबरदस्त स्वागत किया गया, इंदौर के बाद उज्जैन और आगर में भी  राहुल की  भारत जोड़ो यात्रा को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ा।कमलनाथ व दिग्विजय सिंह तथा अन्य नेता राहुल गांधी की यात्रा को सफल बनाने के लिए पिछले एक महीने से जुटे हुए थे। उनकी मेहनत  रंग लाई है।  राहुल अपनी यात्रा के मध्य प्रदेश के हिस्से में क्रांतिकारी टंट्या मामा, बाबासाहेब अंबेडकर,  ओम्कारेश्वर, महाकालेश्वर, जैसे धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रसिद्ध स्थलों पर गए। कांग्रेस ने उनकी यात्रा के माध्यम से दलितों और आदिवासियों को लुभाने की कोशिश की और  सॉफ्ट हिंदुत्व का संदेश भी दिया।
मालवा निमाड़ : सत्ता का मार्ग
राहुल गांधी की यात्रा का मध्यप्रदेश वाला हिस्सा मालवा निमाड़ से होकर गुजरा। मालवा निमाड़ को मध्य प्रदेश की सत्ता का मार्ग कहा जाता है। यहां की 66  विधानसभा सीटें तय करती है कि  प्रदेश की सत्ता किसकी होगी। टीम कमलनाथ ने राहुल गांधी की यात्रा का कार्यक्रम इस तरह बनाया  कि मालवा निमाड़ में कांग्रेस फिर से मजबूती प्राप्त कर सकें।2018 के विधानसभा चुनाव में मालवा निमाड़ के कारण ही कांग्रेस की 15 वर्षों बाद सत्ता में वापसी हो सकी थी। यहां की 66 में से 38 विधान सभा सीटें जीतकर कांग्रेस ने वल्लभ भवन की सत्ता के लिए अपनी राह आसान बनाई थी।राहुल गांधी की यात्रा के जरिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ मालवा निमाड़ में कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति दर्ज करना चाहते थे, निश्चित ही वे अपने उद्देश्य में सफल हुए हैं।

नव भारत न्यूज

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