अभूपूर्व पेयजल संकट झेलने के बावजूद फिर छोड़ दिया गया सिंचाई के लिए लोकपाल सागर का पानी

फिर तैयार रहे पेय जल संकट के लिए नगरवासी
पन्ना :हाल ही में बीती ग्रीष्म ऋतु में अब तक बडा पेयजल संकट झेल चुके नगरवासियों के लिए फिर से बुरी खबर सामने हैं कि बमुश्किल से इस बार तालाबों में पानी किसी तरह से पहुंचा चूंकि पन्ना नगर की पेयजल समस्या का एकमात्र साधन तालाब ही हैं। जिसमें से धरमसागर, लोकपाल सागर या नृपत सागर पर ही नगरवासी निर्भर हैं। इस गर्मी की ऋतु में बूंद बूंद पानी के लिए पूरे शहर में मारामारी मची रही ऐसी पानी की समस्या शायद किसी ने कभी देखी हो कि टेंकर आते ही लोग पानी लूटने में जुट जाते थे न दिन में चैन न रात में आराम सिर्फ एक ही समस्या पानी जुटाने लोग जुटे रहते थे लेकिन उन्हें क्या पता जिले के जनप्रतिनिधि फिर से पेयजल संकट थोपने जा रहे हैं। पेयजल संकट के लिए आरक्षित लोकपाल सागर का पानी यह कहकर सिंचाई के लिए छोड़ दिया गया कि अभी लोक पाल सागर में पेयजल के लिए आरक्षित पानी से अधिक पानी है यह बात नगरवासियों की समझ से परे हैं कि पेयजल के पानी को सिंचाई के लिए छोड़ देने के बाद इसकी कौन गारंटी लेता है कि आरक्षित पानी सुरक्षित रह पायेगा।

यही नहीं आज भी यदि पानी पर्याप्त से भी अधिक था तो फिर नगर पालिका ग्रीष्म ऋतु की तरह एक दिन के अंतर से क्यों पेय जल सप्लाई कर रही है। यदि पर्याप्त मात्रा से अधिक पानी है तो प्रतिदिन पेयजल सप्लाई होनी चाहिए। जब नगरवासी एक महीने का बिल देते हैं तो उन्हें 15 दिन पानी क्यों सप्लाई किया जा रहा है। कुल मिलाकर वोट की राजनीति पेयजल पर भारी दिखाई दे रही है किसी भी से किसानों को नाराज न होने देने के लिए फिलहाल संकट टाल दिया गया। नगरवासी स्वयं भोगेगें। कोई समस्या का समाधान नहीं कर पाता। जबकि इस प्रस्ताव का नगर पालिका ने बैठक में विरोध भी किया था।

गौरतलब है कि शहर को पानी की जरूरत का करीब 80 फीसदी पानी की सप्लाई लोकपाल सागर, धरम सागर और निरपत सागर तालाब से की जाती है। तीनों तालाबों में लोकपाल सागर तालाब की क्षमता सबसे अधिक है। बीते सीजन के जल संकट को देखते हुए नगर पालिका की ओर से तालाब के पानी को शहर को पेयजल के लिए आरक्षित कराने की बात कही गई। इस सीजन में औसत से अधिक बारिश होने और तालाब में जल भराव भी बीते साल की अपेक्षा अधिक होने का हवाला देते हुए तालाब से लगे करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों ने किसान नेताओं की अगुवाई में करीब एक पखवाड़े पहले सिंचाई के लिए पानी देने की मांग को लेकर स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद करीब एक सप्ताह पूर्व चक्का जाम भी किया था।

सीएमओ के विरोध के बावजूद छोड़ दिया गया पानीः- किसानों के आंदोलन के बाद शहर के लोगों के पीने के लिए आरक्षित पानी सिंचाई को देने के लिए एक बैठक भी आयोजित थी। सीएमओ वसंत चतुर्वेदी ने बताया, जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव आया था। इसका हमने विरोध किया था। सीएमओ का कहना है कि पीने के लिए आरक्षित पानी को यदि सिंचाई के लिए सप्लाई किया जाता है तो शहर को आगामी सीजन में फिर से जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। सीएमओ के विरोध के बाद भी जनप्रतिनिधियों दबाव में आकर कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक में पानी खेतों को देने का निर्णय लिया गया है।

कार्यपालन यंत्री सतीश शर्मा ने बताया कि अब शहर के पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नगर पालिका की मांग अनुसार आरक्षित पानी के अलावा शेष पानी कमांड क्षेत्र के किसानों की मांग अनुसार एक पानी प्रदान किया जाएगा। जिला प्रशासन के इस निर्णय ने शहर के लोगों की नीदें उड़ा दी है। जिला प्रशासन के लापरवाही के कारण ही कुछ महीनों पूर्व ही शहर के लोगों ने ऐतिहासिक जल संकट झेला। जिला प्रशासन का यह निर्णय भी पूरे शहर को जल संकट की ओर ढकेल सकता है।इनका कहना हैं:- हमें तो तालाब का पूरा पानी चाहिए। बैठक में भी हमने विरोध किया था। यदि पानी खेतों के लिए दिया जाता है तो नगर को बीती गर्मी के जैसे ही जल संकट का सामना आगामी गर्मी के सीजन में भी करना पड़ सकता है।
वसंत चतुर्वेदी, सीएमओ।
नगर पालिका को 1.4 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी की जरूरत है। किसान सिफ एक सिंचाई के लिए पानी मांग रहे थे। जिससे उन्हें सिर्फ एकबार की सिंचाई के लिए ही नहर से पानी छोड़ा जाएगा।
सतीश शर्मा, ईई डब्लयूआरडी।

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