टंट्या मामा को फांसी पर लटकाया तब आरएसएस अंग्रेजों के साथ था

राहुल गांधी ने फिर आएसएस पर साधा निशाना

राजेंद्र पाराशर/ नदीम रॉयल

खंडवा:राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मप्र में प्रदेश सरकार के बाद आरएसएस को निशाने पर लेना नहीं चूक रहे हैं. सावरकर के बाद खंडवा के जननायक टंट्या मामा स्मारक पर कहा कि जब आपके महापुरुषों को फांसी पर लटकाया गया, तब अंग्रेजों को आरएसएस का साथ था. वहीं प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है.

गुरूवार को जिले के पंधाना विधानसभा पहुंची यात्रा में हजारों की संख्या में लोगों का हुजुम राहुल व प्रियंका गांधी के साथ चल रहा था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी आदिवासी जननायक टंट्या मामा की जन्मस्थली बड़दा अहीर पहुंचे. राहुल गांधी ने कहा कि टंट्या मामा एक सोच और एक विचाधारा भी थे. उनकी सोच और विचारधारा के कारण मैं यहां आया हूं. प्रधानमंत्री पर भी कहा कि आदिवासियों को वनवासी कहना गलत है. उन्होंने कहा कि टंट्या मामा के दिल में फांसी पर चढ़ते वक्त भी डर नहीं था. आप सबके प्यार ने वो डर भूला दिया था. उन्होंने कहा कि आरएसएस ने अंग्रेजों का हमेशा साथ दिया, जब टंट्या मामा को फांसी पर लटकाया गया, तब भी अंग्रेजों को आरएसएस का साथ था. आरएसएस की विचारधारा ने अंग्रेजों की मदद की.

आदिवासी देश के मालिक
राहुल गांधी गांधी ने अपने भाषण में जनसभा में मौजूद आदिवासियों को आदिवासी शब्द का मतलब समझाते हुए कहा कि आदिवासी का मतलब जो इस देश में सबसे पहले रहते थे. जब इस देश में कोई नहीं रहता था. आप लोग इस देश में रहते थे. अगर आप आदिवासी हो तो इसका मतलब यह है कि आप इस देश के मालिक हैं. देश पर पहला हक आपका है.

मोदी इन्हें वनवासी कहते हैं
राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी नया शब्द लाये हैं वनवासी. इसका मतलब है कि आप जंगल में रहते हैं. जंगल के बाहर आपका अधिकार नहीं है. इस शब्द के पीछे उनकी दूसरी सोच हैं. बीजेपी से कहिए कि वो आपको वनवासी कहने पर माफी मांगें. उन्होंने कहा, जब बीजेपी सरकारी संपत्ति को बेचती है तो आदिवासियों को नुकसान पहुंचता है. जंगल काटे जा रहे हैं बड़े उद्योगपति उसे काट रहे हैं. इसके बाद आपको बाहर कर दिया जाएगा.

बीजेपी माफी मांगें
वनवासी शब्द के लिए आदिवासी समाज से बीजेपी माफी मांगें. राहुल गांधी यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि सरकार पर आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है. जब हमारी सरकार आएगी तब हम वनवासी शब्द खत्म कर देंगे. फिर आपके सभी अधिकार एक-एक कर दिए जाएंगे. इस दौरान मंच पर पीसीसी चीफ कमलनाथ और दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे.

पदयात्रा में पहली बार शामिल हुईं प्रियंका गांधी
भारत जोड़ो यात्रा में गुरुवार को प्रियंका गांधी भी पहली बार शामिल हुईं. उनके साथ ही राजस्थान के कांग्रेस नेता सचिन पायलट भी राहुल के कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए. राहुल की पदयात्रा के दौरान सड़कों के दोनों तरफ लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली. पदयात्रा और उससे जुड़े कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश समेत कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता भी मौजूद रहे.

राहुल-प्रियंका ने अचानक एक घर में चाय पी
खंडवा. राहुल गांधी यात्रा के दौरान अचानक एक सड़क किनारे रहने वाले व्यक्ति के घर पहुंचे. सिक्योरिटी वाले ने कहा कि राहुल और प्रियंका गांधी आपके घर आकर चाय पीना चाहते हैं. इसके बाद पड़ोस में पहुंची उसकी पत्नी ने चाय का इंतजाम किया और कुछ ही देर में हजारों लोगों की यात्रा का काफिला उस व्यक्ति के घर के सामने रुक गया. मोटे रस्से तन गए. घर के बच्चों को भी आंगन में बैठा दिया गया. इत्मीनान से चाय बनी और कुछ महत्वपूर्ण लोग जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कमलनाथ और सचिन पायलट समेत दो तीन मुख्य लोगों ने आधा आधा कप चाय पी. गौरतलब है कि यह व्यक्ति सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. इन्होंने कभी जिंदगी में नहीं सोचा होगा कि राहुल गांधी का परिवार घर आकर चाय पिएगा. उस व्यक्ति ने अफसोस जताया कि 5 से ज्यादा चाय नहीं बना सका.

राहुल की भी नहीं सुन रही एसपीजी
मध्यप्रदेश में धमकी वाले पत्र के बाद एसपीजी उन्हें किसी भी स्वागत मंच पर नहीं जाने दे रही है. राहुल गांधी को काफी अधिक घेर रखा है. लोग मिलने की कोशिश करते भी हैं, तो उन्हें रोक दिया जाता है. यात्रा वाले मार्ग पर गड्ढे भी अधिक हैं. धूल से चेहरा सन जाता है. राहुल और प्रियंका ने इस अव्यवस्था को राज्य की भाजपा सरकार पर छोड़ दिया है. प्रियंका ने केवल इतना ही कहा कि जनता सब देख रही है. लोकतंत्र में बड़ी ताकत होती है.

आदिवासी पैटर्न के गहने प्रियंका को पसंद आए
प्रियंका गांधी ने साफ कहा कि निमाड़ एरिया उन्होंने पहली बार देखा. यहां के लोग काफी अच्छे हैं. खासकर आदिवासी महिलाओं के चांदी वाले गहने और जेवर का डिजाइन प्रियंका को खूब पसंद आया. उन्होंने कहा कि ब्रेकफास्ट भी सिंपल और हेल्दी था.

प्रियंका के लिए धीरे चले राहुल
राहुल गांधी की सरपट चाल के लोग कायल हो गए हैं. वे इतना तेज चलते हैं कि सुरक्षा वालों व नेताओं में लगभग दौडऩे वाली स्थिति आ जाती है. नए गांधी की चाल देखकर लोगों को पुराने गांधी का दांडी मार्च याद आ गया. प्रियंका गांधी भी उनके साथ चलीं, लेकिन असहज महसूस कर रही थीं. बाद में राहुल ने स्पीड कम कर दी. बुजुर्ग नेता भी कदम मिला नहीं पा रहे हैं. इसके बावजूद कमलनाथ, दिग्विजयसिंह जैसे नेता साथ चल रहे हैं. यात्रा में तीन घेरे रहते हैं. मोटे रस्से से लोगों को फटकने तक नहीं दिया जाता. कई जगह कच्चे रास्ते में सुरक्षा कर्मियों ने उतरने ही नहीं दिया.

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