मंहगाई पर लागत का असर आने वाले दिनों में कम होगा , वित्त मंत्रालय की मासिक परिदृश्य रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 24 नवंबर (वार्ता) वित्त मंत्रालय की एक ताजा रपट में कहा गया है कि खुदरा मूल्य वाली मुद्रास्फीति (सीपीआई) और थोक भाव पर आधारित (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति का अंतर कम हुआ है और उत्पादन के साधनों की बढ़ी लागत के खुदरा मूल्य में परिलक्षित होने की प्रक्रिया करीब करीब पूरी होती हुयी दिखती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि थोक और खुदरा महंगाई में अक्टूबर 2022 में अंतर 1.6 प्रतिशत तक सीमित हो गया है जो संकेत दे रहा है उत्पादन सामग्री की ऊंची कीमतों का उपभोक्ता मूल्यों तक प्रसरण पूरा होने वाला है।
इसके परिमाण स्वरूप आने वाले महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति पर सामग्री की लागत का असर कम होने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादन के संसाधनों की लागत का असर उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति तक पहुंचने में कुछ समय लगता है।

वर्ष 2021 में स्थिर सीपीआई मुद्रास्फीति के साथ डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति बढ़ रही थी नवंबर 2021 में खुदरा मुद्रास्फीती थोक मुद्रास्फीति से 10.0 प्रतिशत नीचे थी।
अप्रैल 2022 में यह अंतर 7.6 प्रतिशत रह गया।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण जिंसों के दाम बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति फिर भड़क गयी और मई 2022 में यह फिर चढ़ कर खुदरा मुद्रास्फीति से 9.6 प्रतिशत तक ऊपर हो गयी थी।

अक्टूबर 2022 में थोक मुद्रास्फीति खुदरा मुद्रास्फीति से केवल 1.6 प्रतिशत ऊंची रह गयी है।

रिपोर्ट के अनुसार 2020 में कोविड 19 महामारी के दौर में जिंसों की वैश्विक कीमतें कम होने से थोक मुद्रास्फीति कम थी और खुदरा मुद्रास्फीति का दबाव घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के कारण था।
लेकिन 2021 में
महामारी के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने से जिंसों आपूर्ति उनकी मांग के अनुसार नहीं बढ़ पा रही थी और इससे जिंसों के भाव बढ़ने लगे।
2022 में उक्रेन-रूस युद्ध से जिंसों का बाजार और भड़क गया ।

सीपीआई और डब्ल्यूपीआई के अंतर में घट-बढ़ के बारे में कहा गया है कि 2020 में थोक मुद्रास्फीति का स्तर काफी नीचे और कुछ समय तक शून्य से भी कम होने से तुलनात्मक आधार के प्रभाव के चलते 2021 में जिंसों की कीमतों के कीमतें दौर में दहाई अंक में चली गयी जो उत्पादकों के साधनों की लागत ऊंची होने का संकेत है।

अप्रैल 2021 से लगातार अठारह महीने थोक मूल्य सूचकांक दहाई अंक में रहा।
इस दौरान खुदरा मुद्रास्फीति कमोबेश स्थिर बनी हुई थी।
मुख्यत लागत प्रेरित खुदरा मुद्रास्फीति ने कहीं जनवरी 2022 में आ कर छह प्रतिशत की सीमा तोड़ा।

वित्त मंत्रालय की गुरुवार को जारी मासिक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट-अक्टूबर 2022 में कहा गया है कि जनवरी-अक्टूबर 2022 के दौरान, खुदरा द्रास्फीति का दबाव मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति से प्रेरित है और इसका योगदान 48.3 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 के पहले पांच महीनों खाद्य मुद्रास्फीति पर खाद्य तेलों और वसा जैसे खाद्य पदार्थों के महंगे आयात का असर पड़ा है।

इसमें कहा गया है कि जून 2022 से हालांकि, घरेलू मौसमी कारकों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ी है।
इस दौरान सब्जियों, अनाज और उनके उत्पादों के दाम बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है।

कुल खुदरा मुद्रास्फीति में मुद्रास्फीति ईंधन और बिजली वर्ग की मुद्रास्फीति का औसतन योगदान 9.7 प्रतिशत के साथ मध्यम स्तर का रहा है।

इसके विपरीत परिवहन और संचार, स्वास्थ्य और अन्य घटकों का खुदरा मुद्रास्फीति के बढ़ने में योगदान जनवरी 2022 के (30 प्रतिशत) की तुलना में घटकर अक्टूबर 2022 में 24 प्रतिशत रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के प्रकोप के बाद से भारत में विभिन्न घरेलू और वैश्विक कारकों के चलते मुद्रास्फीति की गतिशीलता प्रभावित हुई है।

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