अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक रहा जन अभियान परिषद, वास्तविकता से परे हैं आंकड़े

पन्ना :जन अभियान परिषद अपने लोकव्यापी स्वरूप को भूल कर दडबेनुमा दफ्तर में सिमट कर रह गई है। शासन ने इसका गठन इस उद्देश्य से किया था कि शासन की योजनाएं जन जन तक पहुंचाई जाएंगी और अधिकतम लोगों को जोडकर उनका जीवन स्तर सुधारा जाएगा। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक ठोस मुहिम चलाकर लोगों को प्रगतिशील धारा की ओर मोडा जाएगा। लेकिन पिछले एक दशक से भी अधिक से संचालित जनअभियान परिषद ने इन क्षेत्रों में कितना काम किया और उसकी उपलब्धियां क्या रही हैं यदि उसका वास्तविक भौतिक सत्यापन हो जाये तो कागजी आंकड़ेबाजी और वास्तविकता में बहुत बडा अंतर खुलकर सामने आ जायेगा। जिले भर में नशे की लत परवान चढ रही है, बाल विवाह, दहेज प्रथा की कुरीतियां तो मौजूद हैं। दागने की क्रूर प्रथा भी खूब उभर रही है। पूंछा जा सकता है कि जन अभियान परिषद ने इनकी रोकथाम की दिशा में कब, कैसे और कितनी बार कदम उठाया है और तो और आज स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान जिला प्रशासन एवं प्रदेश सरकार की प्राथमिकता पर है लेकिन उसमें भी परिषद की भागीदारी काफी चिंतनीय है।

यह है परिषद का ढांचाः- परिषद के कार्य संचालन हेतु और ग्रामीण अंचलों में सतत और जीवंत संपर्क बनाए रखने हेतु जिला स्तर पर जिला समन्वयक तथा ब्लॉक स्तरों पर ब्लॉक समन्वयकों की पदस्थापना की गई है। जिले के सभी पांच ब्लॉकों मे समन्वयक कार्यरत बताए जाते हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण अंचलों में कार्य कराए जाने का प्रावधान है। लेकिन जिले के किसी ग्राम पंचायत में जन अभियान परिषद का अमला सक्रिय नहीं है। प्रचार प्रसार की हालत वही है कि शासन ने अपने स्तर से जो मीडिया के माध्यम से प्रचार करा दिया वही सीमा रेखा बन जाती है शहरी, कस्बाई और देहाती क्षेत्रों में आज भी अखबार प्रचार के मजबूत माध्यम बने हुए हैं।

कितनी समितियों और संस्थाओं का गठनः- जन अभियान परिषद का दायित्व है कि वह ग्रामीण अंचलों में विशेतया प्रस्फुरण और नवांकुर जैसी समितियों और संगठनों का गठन करें और उसे कार्य उद्देश्यप के लिए प्रशिक्षित करे। उनके कार्य में आने वाली अडचनों को दूर करे। यदि कोई संगठन उद्योग इकाई के रुप में विकसित हो गया है तो उसे उसकी दरें निर्धारित कराना और उसके लिए बाजार मुहैया कराना संसाधन जुटाना यह सारे कार्य जन अभियान परिषद के हैं। लेकिन आज तक परिषद के जिला कार्यालय और उसके अधीनस्थों ने इसं संदर्भ में कितना काम किया है। यह वही जान सकते हैं अभी तक परिणाम सामने नहीं दिखाई दे रहे हैं।

कहां जाता है बजटः- शासन द्वारा गठन करने और विविध कार्याे के लिए लाखों रुपए का आंवटन दिया जाता है, अगर मैदानी स्तर पर ईमानदारी से काम नहीं हो रहा है तो वह बजट कहां जाता है यह जांच पडताल का विषय है ऐसा प्रतीत होता है कि संभवतः नाममात्र के काम कराए जाकर फर्जी कोरम पूरा कर लिया जाता है और राशि ठिकाने लगा दी जाती है परिषद का काम ऐसा नहीं है कि जो मैदान में खडा दिखाई पडे जिसका सरलता से भौतक सत्यापन कराया जा सके। इस बात पर जमकर लाभ जिला एवं ब्लॉक समन्वयक उठा रहे हैं। उसकी स्वंय की भारी भरकम वेतन, कार्यालय स्टॉफ आदि पर हर माह व्य्ाय हो रहा है। लेकिन इसके बावजूद ढंग से काम नहीं किया जा रहा है।

यह है इनका कामः- परिषद के मूल दायित्व में योजनाओं का प्रचार प्रसार तो है ही कुरीतियों का निवारण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नशामुक्ति अभियान, उत्तम स्वास्थ्य्ा जागरुकता, स्वच्छता अभियान, स्थानीय स्तर पर स्व रोजगार का सृजन, ई श्रम कार्ड, स्मार्ट कार्ड, आयुष्मान कार्ड आदि के निर्माण में सहयोग देना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीव ज्योति योजना आदि के लिए हितग्राही तैयार करना लेागों से चर्चा कर योजनाओं का लाभ बतलाना, घर घर संपर्क करना, गांव गांव चौपाल लगाना, दीवारों पर नारों का लेखन करना यह सभी इनके कार्य दायित्वा में शामिल हैं।

नव भारत न्यूज

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