एससीओ के साथ खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, सांस्कृतिक संबंध मजबूत करेगा भारत

नयी दिल्ली,  (वार्ता) भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के साथ भारत के मजबूत सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संपर्कों को रेखांकित करते हुए खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग को गहन करने का संकल्प दोहराया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ के शासनाध्यक्षों की 21वीं बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गत 20 अक्टूबर को शुरु पर्यावरण के लिए जीवनशैली के वैश्विक मिशन और खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में उसकी प्रासंगिकता का उल्लेख किया।
डॉ. जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा इस दिशा में उसकी उपलब्धियों की ओर एससीओ प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया और इस बात पर जोर दिया कि कोविड महामारी के बाद आर्थिक मोर्चे पर मजबूत रिकवरी हुई है। विदेश मंत्री ने भारत एवं एससीओ के बीच कारोबार को बाज़ारों में निष्पक्षता से पहुंच प्रदान करने के सिद्धांत पर विस्तार देने का आह्वान किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्षों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने किया जबकि अध्यक्षता चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग ने की। इनके अलावा बैठक में कज़ाखस्तान के प्रधानमंत्री ए ए स्मैलोव, उज़्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री ए एन अरिपोव, ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री के रसूलज़ोदा, रूस सरकार के सभापति एम वी मिशुस्तीन, किर्गीज़ गणराज्य के मंत्रिमंडल के सभापति ए यू जपारोव तथा पाकिस्तान के विदेश मंत्री बी बी ज़रदारी भी शामिल हुए।
पर्यवेक्षक देश के रूप में बेलारूस के प्रधानमंत्री आर ए गोलोवचेंको, ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोखबिर, मंगोलिया के प्रधानमंत्री एल ओयुन एर्देन, तुर्कमेनिस्तान के मंत्रिमंडल के उपाध्यक्ष एच गेल्डीमुरोदोव ने भी बैठक में भाग लिया।
एससीओ के महासचिव झांग मिंग, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे की कार्यकारी समिति आर ई मिर्ज़ाएव, एससीओ व्यापार परिषद मंडल के अध्यक्ष डी ए वाखाबोव तथा एससीओ अंतर बैंकिंग संघ के अध्यक्ष ए के मिर्सोआतोव ने भी शिरकत की।
बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया गया।

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