स्वच्छ सर्वेक्षण में फिर फिसड्डी साबित हुआ शहर

जबलपुर: स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को शिखर पर पहुंचाने के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने करोड़ों रूपए खर्च कर दिए। जिसके बाद भी महाकोशल का केंद्र कहा जाने वाला जबलपुर एक बार फिर स्वच्छता सर्वेक्षण में फिसड्डी साबित हुआ। दरअसल नगर निगम अपनी पिछली गलतियों से सबक ही नहीं ले रहा है। हर साल सर्वे शुरू होने के ठीक पहले निगम प्रशासन जागता है। सुबह से लेकर रात तक टीम मैदानी दौरे करती हैं। टीम के वापस जाते ही उनकी मुहिम थम जाती है। नतीजतन शहर की सफाई व्यवस्था फिर बेपटरी हो जाती है। यही वजह है कि हर साल निगम प्रशासन को फिर नए सिरे से स्वच्छता का माहौल बनाने के लिए ताकत झोंकनी पड़ती है।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 की नतीजे शनिवार को जारी कर दिए गए लेकिन इस बार जबलपुर की झोली में कुछ खास नहीं आया है। जबलपुर को 7500 अंकों में से 4677 अंक मिले हैं। जबकि इंदौर छंठवी बार पहले स्थान पर और भोपाल छठें स्थान पर है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में जबलपुर की 20वीं रैंक थी यानी इस बार जबलपुर की रैकिंग दो कदम पिछड़ी है। जबकि जबलपुर स्मार्ट सिटी व नगर निगम के अधिकारियों को उम्मीद थी कि इस बार जबलपुर टाप-10 में जगह बनाएगा। सर्वेक्षण में जबलपुर का मुकाबला 4300 शहरों से है। सर्वे में 7500 अंको के आंकलन के आधार पर रैकिंग जारी की गई है। पिछले सर्वेक्षण में जबलपुर छह हजार अंको में से 3856 अंक हासिल कर 20वें स्थान पर रहा।
टॉप 20 में भी नहीं बना पाया जगह
सर्वेक्षण में नगर निगम ने सफाई व्यवस्था में सुधार सहित अन्य मानकों को पूरा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर तो लगाया था। लेकिन शहर टॉप 20 में भी जगह नहीं बना पाया। जबलपुर को देशभर में 22 वां स्थान मिला हैं।
तीन वर्षों में ऐसी है रैंकिंग
वर्ष-रैकिंग
2019-25 वें स्थान पर
2020-17 वें स्थान पर
2021-20 वें स्थान पर
एड़ी-चोटी का जोर फिर झोली में कुछ खास नहीं
सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम ने सफाई व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार किया था। नाले-नालियों को ग्रीन नेट से जहां ढंक दिया गया था वहीं सफाई कर्मियों से तीन शिफ्टों में काम लिया जा रहा था। अधिकारी भी सुबह से रात तक बारी-बारी से सफाई कार्यों की निगरानी कर रहे थे। कलेक्टर डा इलैयाराजा टी व निगमायुक्त आशीष वशिष्ठ भी सफाई कार्यों की निगरानी कर रहे थे। डाक्यूमेंटेशन, नागरिक फीडबैक सहित ओडीएफ प्लस-प्लस की प्रकिया भी पूरी की गई थी। लिहाजा ये माना जा रहा है कि स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में इस बार सुधार आने की उम्मीद थी। लेकिन शहर एक बार फिर स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में फिसड्डी साबित हुआ।

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