हाईकोर्ट को मिले पत्रों की जांच के निर्देश

दुराचार के आरोपी टीआई संदीप अयाची की जमानत का मामला

जबलपुर: बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार टीआई संदीप आयाची की जमानत आवेदन के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र मिले थे। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने पाया कि पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना की श्रेणी में आती है। एकलपीठ ने प्राप्त पत्रों की जांच के निर्देश दिये है, जिससे पत्र भेजने वाले का खुलासा हो सके।गौरतलब है कि कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ एक महिला आरक्षक की शिकायत पर महिला थाना जबलपुर ने बलात्कार का प्रकरण दर्ज किया था।

हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी के अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया था।गिरफ्तारी के बाद थाना प्रभारी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। जिस पर गत दो दिनो से सुनवाई चल रही थी।शुक्रवार को न्यायालय ने पारित अपने आदेश में कहा है कि जमानत के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र प्राप्त हुए। पत्र भेजने वाला नाम कथित तौर पर एक युवती का है और उसने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पर आरोप लगाये है। पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना कीणी में आती है। इस तरह की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मामले की जांच आवश्यक है।

रजिस्ट्रार जनरल इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को सूचित करे कि जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को नियुक्त करें। पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को सौंपेगी और वह न्यायालय के समक्ष पेश करेंगे। इसके साथ ही आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के संज्ञान में उक्त जानकारी लाई जाये। आदेश उनके द्वारा पारित किया गया है कि इसलिए उक्त प्रकरण किस कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाये इस संबंध में चीफ जस्टिस निर्णय लें। उन्हें पुन सुनवाई के लिए प्रकरणआवंटित किया जाता है तो वह मैरिट के आधार पर आदेश पारित करेंगे।

नव भारत न्यूज

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