आजीवन कारावास की सजा काट रहे दुर्दान्त कैदी अंतिम साँस तक रहेंगे जेल में: मिश्रा

भोपाल, 22 सितंबर (वार्ता) मध्यप्रदेश के जेल एवं गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे दुर्दान्त कैदियों को अब अंतिम साँस तक जेल की सजा काटनी होगी। जेल विभाग ने समय पूर्व रिहाई और सजा में छूट संबंधी नवीन संशोधित दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार नवीन दिशा-निर्देश एसीएस होम की अध्यक्षता में गठित 4 सदस्यीय समिति द्वारा 10 राज्यों के दिशा-निर्देशों के‍ विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार की गई अनुशंसात्मक रिपोर्ट पर जारी किये गये हैं। डॉ मिश्रा ने बताया है कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे आतंकवादियों, दुष्कर्मियों, ड्रग्स तस्करों, जहरीली शराब के निर्माता और विक्रेताओं को अंतिम साँस तक जेल में ही रहना होगा। जेल में बंद ऐसे दुर्दान्त कैदियों को अब सजा में छूट की भी पात्रता नहीं होगी।
अपर मुख्य सचिव गृह डॉ राजौरा ने बताया है कि बंदियों को वर्ष में 4 बार 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 14 अप्रैल (डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती) और 2 अक्टूबर (गाँधी जयंती) को पात्रता अनुसार समय पूर्व रिहाई और सजा में छूट (परिहार) संबंधी पात्रता-अपात्रता के नवीन दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्होंने बताया है कि पूर्व में 10 जनवरी, 2012 को जेल विभाग द्वारा जारी निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।
एसीएस डॉ. राजौरा ने कहा है कि नवीन दिशा-निर्देशानुसार जिला स्तरीय समिति को पात्र श्रेणी के बंदियों के नामों पर विचार कर अनुशंसा जेल मुख्यालय को भेजना होगी और जेल मुख्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार की अनुमति प्राप्त होने पर ही समय पूर्व रिहाई हो सकेगी। उन्होंने बताया कि नवीन दिशा-निर्देशानुसार आजीवन कारावास काट रहे (अपात्र श्रेणी के अपराधों के अलावा अन्य अपराधों में दण्डित) 70 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूष बंदियों को 12 वर्ष की सजा पूर्ण कर लेने पर और 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिला बंदियों को 10 वर्ष की सजा पूर्ण होने पर समय पूर्व रिहा किया जा सकेगा।

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