स्व सहायता समूह अब मजबूत ताकत बने : मोदी


कराहल में आयोजित स्व-सहायता समूह सम्मेलन में शामिल हुए मोदी

राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री चौहान, नरेंद्र सिंह, सिंधिया, भूपेंद्र यादव, प्रहलाद सहित राज्य सरकार के मंत्रिगण भी रहे मौजूद

ग्वालियर:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि महिलाओं के संकल्प व पुरूषार्थ की बदौलत स्व-सहायता समूह अब राष्ट्र की मजबूत ताकत बन गए हैं। प्रधानमंत्री महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भर भारत की नई इबारत लिख रहे स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा देश की महिलाओं ने हर चुनौती का अपनी उद्यमशीलता से सामना किया है और देश में विश्वास पैदा कर नारी शक्ति का परिचय दिया है।श्योपुर जिले के कराहल के मॉडल स्कूल परिसर में आयोजित स्व-सहायता समूह सम्मेलन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्रिगण नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेन्द्र कुमार,प्रहलाद पटेल व श्री फग्गन सिंह कुलस्ते मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जहाँ महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता है वहाँ सफलता अपने आप तय हो जाती है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता इसका उदाहरण है। इसी बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा अधिक से अधिक क्षेत्रों में महिलाओं को प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से पूरे देश में अब तक 8 करोड़ से अधिक बहनें स्व-सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। अर्थात इससे 8 करोड़ परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर परिवार से एक महिला इस अभियान से जुड़े। उन्होंने कहा स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलायें खेती, डिजिटल सेवा, शिक्षा, बीमा, बैंकिंग व भण्डारण व्यवस्था से लेकर पोषण आहार निर्माण व वितरण में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। सरकार ने स्व-सहायता समूहों को दी जाने वाली सहायता में बीते 7 साल में 13 गुनी बढ़ोत्तरी की है। सरकार अब बिना गारंटी के महिला स्व-सहायता समूहों को 20 लाख रूपए तक की आर्थिक सहायता मुहैया करा रही है। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत मूर्तरूप ले रहीं नल-जल योजनाओं के संचालन व रख-रखाव में भी महिलायें बड़ी भूमिका निभा रही हैं। सरकार ने पिछले तीन वर्षों में जल जीवन मिशन के तहत 7 करोड़ नए नल कनेक्शन दिए हैं। जिनमें मध्यप्रदेश के 40 लाख घरों को मिले नल कनेक्शन शामिल हैं।

समूहों के उत्पादों को बाजार मुहैया कराने के लिए मप्र सरकार को सराहाप्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने के लिये किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समूहों के लिये खासतौर पर बनाए गए हाट बाजारों के माध्यम से समूहों ने अपने उत्पादों की 500 करोड़ रूपए से अधिक की बिक्री की है। उन्होंने कहा आदिवासी अंचल में वनोपज को बेहतरीन उत्पादों में बदलने के लिये अनुसूचित जनजाति की बहनें अच्छा काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री वन – धन योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का लाभ भी समूहों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सम्मेलन में मौजूद महिलाओं का आह्वान किया कि वे सरकार द्वारा बनाए गए गवर्नमेंट-ई-मार्केट पोर्टल पर अपना पंजीयन जरूर कराएँ। इस पोर्टल के सरस लिंक पर पंजीयन करके स्व-सहायता समूह अपने उत्पादों को बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने श्योपुर जिले के प्रसिद्ध लकड़ी उत्पादों को भी सरस पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिये कहा। ।

हर मुसीबत झेलेंगे पर चीतों पर आँच नहीं आने देंगे
उन्होंने स्व-सहायता समूह सम्मेलन में मौजूद प्रतिभागियों के दोनों हाथ उठवाकर संकल्प दिलाया कि हम सब अपने ऊपर मुसीबत झेल लेंगे पर सुदूर देश नामीबिया से आए चीतों पर आँच नहीं आने देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विश्वास के साथ दक्षिणअफ्रीकी देश नामीबिया से आए चीतों को कूनो-पालपुर के लिये सुपुर्द किया है कि चीते यहाँ पूरी तरह सुरक्षित है।

मेरी माताजी को भी इससे प्रसन्नता मिलेगी
मोदी ने भावुक होकर कहा कि जन्मदिन पर मेरी इच्छा रहती है कि अपनी माँ के चरण छूकर आशीर्वाद लूँ। पर आज मुझे इस सम्मेलन के माध्यम से हजारों हजार माताओं, बहनों व बेटियों का आशीर्वाद मिला है। यह आशीर्वाद हमारे लिए बहुत बड़ी ताकत, ऊर्जा व प्रोत्साहन है। मेरी माताजी को भी इससे बड़ी प्रसन्नता मिलेगी।

प्रधानमंत्री मप्र में रोजगार की अपार संभावनायें लेकर आए हैं – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोजगार की अपार संभावनायें लेकर आज मध्यप्रदेश की धरती पर पहुँचे हैं। उन्होंने वन्य जीव अभयारण्य में चीते छोड़कर देश ही नहीं समूची दुनिया में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इससे खासतौर पर श्योपुर सहित सम्पूर्ण ग्वालियर चंबल अंचल में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रोजगार के नए – नए अवसर पैदा होंगे।

महिलाओं ने मोदी को सुनाई सफलता की दास्तां
स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी सफलता की दास्तां साझा की। श्योपुर जिले के ग्राम गोरस की निवासी श्रीमती सुनीता आदिवासी का कहना था कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले कई बार हमारे परिवार को भूखे पेट तक सोना पड़ा। लेकिन जैसे ही हम स्व-सहायता समूह से जुड़े हमारे परिवार के दिन फिर गए। हमने समूह से 70 हजार रूपए का ऋण लेकर आटा चक्की लगाई। इससे हमें अच्छी-खासी आमदनी होने लगी। हमने समूह का ऋण भी चुकता कर दिया। इसके बाद समूह से ही सहायता लेकर अपने खेत में ट्यूबवेल लगाकर उन्नत खेती की और ढ़ाई बीघा में अमरूद का बगीचा लगाया। खेती से अब हमें 3 से 4 लाख रूपए सालाना आमदनी हो रही है। सुनीता अपनी खुशी जाहिर करते हुए बोलीं कि अब हमने आजीविका एक्सप्रेस चार पहिया गाड़ी खरीद ली है।

प्रधानमंत्री ने देखी स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्व-सहायता समूह सम्मेलन परिसर में लगाई गई समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी देखी। साथ ही उन्होंने समूहों के उत्पादों की सराहना की और समूहों के सदस्यों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर विभिन्न समूहों ने अपने उत्पाद भी प्रधानमंत्री को भेंट किए। समूहों के उपहार पाकर प्रधानमंत्री ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि समूहों द्वारा दिए गए यह उपहार पूरे देश के लिये अनमोल है।

कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्रों का किया ई-लोकार्पण
मोदी ने कराहल में आयोजित हुए महिला स्व-सहायता समूह के सम्मेलन के मंच से शिवपुरी, मंडला, शहडोल और तामिया के विशेष पिछड़ी जनजाति समूह कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्रों का ई-लोकार्पण भी किया।

रंगीन परिधानों में लोकनृत्य करती हुईं आईं आदिवासी महिलाएँ

रंग-बिरंगे परिधानों में सजीधजीं जन-जाति वर्ग की महिलाएँ जब अपने-अपने क्षेत्र की खूबियों से ओत-प्रोत लोकनृत्य करती हुईं स्व-सहायता सम्मेलन की ओर बढ़ीं तो फिजा लोकरंगो से सराबोर हो गई। कराहल के मॉडल स्कूल परिसर में बने विशाल एवं भव्य पंडाल में आयोजित हुए स्व-सहायता सम्मेलन में हाथों में तिरंगा थामे समूहों की दीदियों ने प्रवेश किया और भारत माता एवं प्रधानमंत्री जी के जयकारे लगाए। आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों से जुड़ने के बाद हुए आर्थिक सशक्तिकरण की झलक महिलाओं के चेहरे पर साफ झलक रही थी।

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