गोपाल मंदिर पर मनाया जा रहा भव्य जन्माष्टमी महोत्सव

ग्वालियर: नगर निगम ग्वालियर द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्ठमी महोत्सव फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर पर आज हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी महोत्सव में गोपाल मंदिर स्थित कृष्ण एवं राधा को उनके प्राचीन आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। करोड़ों के गहने तथा भगवान के सोने-चांदी के बर्तन व सजावट का सम्पूर्ण सामान भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैंक लाॅकर से लाकर भगवान का श्रृंगार किया गया।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुलिस बल के साथ बैंक लाॅकर से भगवान के आभूषण तथा श्रृंगार सामग्री एवं पात्र निकालकर लाये गए तथा इनकी सफाई इत्यादि कर भगवान का श्रृंगार किया जा रहा है। दोपहर 2 बजे से भगवान के दर्शन आम नागरिकों के लिये खोले जायेंगे। रात्रि में 1 बजे के बाद भगवान के उक्त आभूषण पुलिस बल के साथ जिला कोषालय में जमा कराये जायेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से सम्पूर्ण मंदिर में पुलिस बल तथा क्लाॅज सर्किट कैमरे लगाकर पल-पल की वीडियोंग्राफी की जा रही है। वहीं इस अवसर पर नगर निगम के इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन के लिये गोपाल मंदिर पर विशेष साज-सज्जा व आर्कषक विद्युत व्यवस्था की गई है।

मनोहारी हुआ भगवान राधा कृष्ण का श्रंगार
राधाकृष्ण के श्रृंगार में नगर निगम द्वारा बैंक लाॅकर में संचित करोड़ों रू. कीमत के गहने उपयोग किये जायेंगे जिसमें सफेद मोती वाला पंचगढ़ी हार लगभग ढाई लाख कीमत का, सात लढ़ी हार जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने होंगे। सन् 2007 मंे इनकी अनुमानित कीमत लगभग 8 से 10 लाख रू. आंकी गई थी, इसके अलावा सोने के तोड़े तथा सोने का मुकुट कृष्ण पहनेंगे जिनकी कीमत भी लगभग 20 लाख रू. है। गोपाल मंदिर की राधाजी का ऐतिहासिक मुकुट जिसमें पुखराज और माणिक जणित के पंख है तथा बीच में पन्ना लगा है, तीन किलो वजन के इस मुकुट की कीमत आज की दरों पर लगभग 80 से 90 लाख के बीच आंकी गई है तथा इसमे लगे 16 ग्राम पन्ने की कीमत लगभग 6,46,000/- आंकी गई।

राधाकृष्ण के नकसिक श्रृंगार के लिये लगभग साढ़े पांच लाख रू. के जेबर उपलब्ध हैं जिनमें श्रीजी तथा राधा के झुमके, सोने की नथ, कण्ठी, चूड़ियां, कड़े इत्यादि से भगवान को सजाया जायेगा। भगवान के भोजन इत्यादि के लिये भी प्राचीन बर्तनों की सफाई कर इस दिन भगवान का भोग लगाया जावेगा। लगभग 25 लाख रू. कीमत के चांदी के विभिन्न बर्तनों से भगवान का भोग अराधना की गई। जिनमें भगवान की समई, इत्र दान, पिचकारी, धूपदान, चलनी, सांकड़ी, छत्र, मुकुट, गिलास, कटोरी, कुंभकरिणी, निरंजनी आदि सामग्रियों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

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