खण्डहर में तब्दील हो रहे लाखों के सामुदायिक शौंचालय

जिले में दो वर्षों से तालों में कैद हैं दो सैकड़ा से ज्यादा सामुदायिक शौंचालय, बनने के बाद से ही शुरू नहीं हो सके सामुदायिक शौंचालय

सीधी : जिले की ग्राम पंचायतों में दो सैकड़ा से ज्यादा सामुदायिक शौंचालयों का निर्माण कराया गया है। किन्तु प्रशासनिक लापरवाही के चलते कोई भी सामुदायिक शौंचालय दो वर्ष बाद भी संचालित नहीं हो सके। देखरेख के अभाव में कई सामुदायिक शौंचालय खण्डहरों में तब्दील होते जा रहे हैं।बतातें चलें कि जिले में सामुदायिक शौंचालयों के निर्माण के लिये मुख्य सड़कों से लगी ग्राम पंचायतों का चयन किया गया था। लाखों की लागत से सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक शौंचालयों का निर्माण आनन-फानन में जनपद पंचायतों के माध्यम से करा दिया गया। बाद में सामुदायिक शौंचालयों के संचालन के लिये ग्राम पंचायतों ने हांथ खड़े कर लिये। जिसके बाद जिला पंचायत सीधी के अधिकारियों द्वारा स्वसहायता समूहों के माध्यम से सामुदायिक शौंचालयों के संचालन की पहल की गई।

बिडम्बना यह रही कि शौंचालयों के संचालन के लिये कोई समूह भी तैयार नहीं हुआ। लाखों की लागत से निर्मित कराये गये दो सैकड़ा से ज्यादा सामुदायिक शौंचालय मुख्य सड़कों के आसपास सालों से शो-पीस बने हुये हैं। देखरेख के अभाव में इनमें कई सामुदायिक शौंचालय खण्डहर में तब्दील होते जा रहे हैं। यह स्थिति जिले के सभी जनपद पंचायत क्षेत्रों में समान रूप से बनी हुई है। सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक शौंचालयों के निर्माण को लेकर सीधी जिले में जनपद पंचायत कुसमी को प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है। जानकारों का कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद सामुदायिक शौंचालयों का संचालन कर पाना सीधी जिले की ग्राम पंचायतों के लिये आसान नहीं है। इसमें सफाई कर्मचारी से लेकर, बिजली बिल, साफ-सफाई की सामग्री के व्यवस्था की जिम्मेदारी संचालन करने वाले के ऊपर रहनी है। सामुदायिक शौंचालयों का उपयोग करने वालों से निर्धारित राशि लेनी है, इसी वजह से खर्च की व्यवस्था नहीं बन पा रही है।

दुकान को लेकर भी नहीं बना आकर्षण
सामुदायिक शौंचालयों के संचालन करने वालों के लिये मौके पर दुकान देने का निर्णय भी लेते हुए व्यवस्थाएं बनाई गई थी। फिर भी लोग मुफ्त की दुकान लेने के लिये भी सामुदायिक शौंचालयों के संचालन के लिये तैयार नहीं हुये। कई सामुदायिक शौंचालय कस्बाई क्षेत्रों एवं बाजार के नजदीक बनाये गये हैं, जिसके चलते यहां लोगों की आवाजाही बनी रहे। बावजूद इसके इसका संचालन करना घाटे का सौदा माना जा रहा है। लोग इसे प्रशासन का अदूरदर्शी पूर्ण निर्णय बताते हुये करोड़ों की राशि का दुरूपयोग बता रहे हैं।

नव भारत न्यूज

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