विश्व फोटोग्राफी दिवस आज

आज के दौर में महज शौक ही नहीं बल्कि दीवानगी भी बन चुकी है फोटोग्राफी

(कैलाश मित्तल)
तस्वीर बहुत कुछ कह जाती है बिना कहे ,लेकिन जब इन्हीं तस्वीरों पर कुछ बात कहनी हो तो शब्द मानों कम से रह जाते हैं। हर साल 19 अगस्त को पूरी दुनियाँ में विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में इसे उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिग्गज और शौकीन फोटोग्राफरों के लिए यह दिन विशेष है।डिजिटल के इस दौर में तेजी से दुनिया आगे बढ़ रही है, आज के दौर में फोटोग्रॉफी का प्रचलन इस कदर तेजी बढ़ा है कि सोशल साइट्स पर आपको देश और दुनिआ की खूबसूरत तस्वीरें देखने को मिल जाएंगी।

आज यह केवल महज शौक ही नहीं बल्कि युवाओ में मोबाइल फोटोग्राफी दीवानगी भी बन चुकी हैमोबाईल ने यूं तो बहुत क्रांति की हैं और लोगों के जीने के अंदाज़ को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. , मोबाईल में जिस चीज़ का सर्वाधिक इस्‍तेमाल किया जाता है, बिना शक कह सकते हैं वो कैमरा है. कैमरे का उपयोग बच्चे -बूढ़े-जवान सभी

लोग करते हैं,मेरा मानना हे की अच्छी तस्वीर खींचने के लिए फ्रेम में क्या लेना है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हमें क्या छोड़ना है। एक तस्वीर में जब तक मानवीय संवेदनाएं नहीं दिखेंगी तब तक उसे बेहतर तस्वीर नहीं माना जा सकता। इन्हीं संवेदनाओं की वजह से कहा जाता है कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है।साधारण कैमरे, यहां तक कि साधारण स्मार्ट फोन से भी ली गई तस्वीर धूम मचा सकती है यदि उसका आधार कोई दमदार सार्थक सब्जेक्ट हो या जिसके पीछे कोई मजबूत कहानी हो, या कोई ऐसा भाव या कोई ऐसा सौंदर्य जो देखने वाले के मन को छू ले।

तस्वीर ऐसी होनी चाहिए जिसमें कोई स्टोरी हो, या जिसे देखकर भावनात्मक अनुभूति मिले, या कुछ ऐसा जो जीवन के किसी अनदेखे पक्ष को उजागर करता हो।फोटोग्राफी के जरिए व्यक्ति और समाज के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है, सार्थक संदेश दिया जा सकता है, और यह फोटोग्राफी की सबसे बड़ी ताकत भी है।

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