अपने ही विधायक के आरोपों पर घिरी कांग्रेस

महाकौशल की डायरी….

अविनाश दीक्षित

जबलपुर की नगर सत्ता में डेढ़ दशक बाद वापसी करने वाली कांग्रेस में नया द्वंद छिड़ गया है। यह द्वंद बरगी विधायक संजय यादव क़े आरोपों से उपजा है। संजय यादपर उनकी बात को तवज्जो नहीं दिए जाने का बड़ा आरोप लगाया है। हालांकि संजय यादव के तीखे आरोपों पर महापौर जगत बहादुर सिंह ने सधे अंदाज में कहा कि एमआईसी का गठन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, राज्यसभा सांसद विवेक तंखा तथा सभी विधायकों की रायशुमारी उपरांत संतुलित एमआईसी का गठन किया गया है। दरअसल महापौर जगत बहादुर की काउंसिल में पश्चिम विधानसभा का पलड़ा भारी रहा है, इस विधानसभा से 4 पार्षदों को, जबकि पूर्व विधानसभा से तीन, उत्तर मध्य से दो तथा पनागर विधानसभा जहां कांग्रेस का विधायक नहीं है , वहां से एक पार्षद को एमआईसी में स्थान मिला है।

विभाग बंटवारे मेँ भी मलाईदार विभाग पश्चिम और पूर्व विधानसभा के पार्षदों को मिले हैं। एक पार्षद गुलाम हुसैन पर भ्रष्टाचार के आरोप होने पर भी एमआईसी में शामिल किए जाने का विरोध कांग्रेस नेताओं और अन्य पार्षदों ने किया, बावजूद इसके गुलाम हुसैन को महापौर परिषद में शामिल किया गया। दूसरी ओर बरगी विधानसभा के एकमात्र शहरी क्षेत्र पार्षद ओबीसी महिला ज्योति विनोद लोधी को मेयर काउंसिल में शामिल नहीं किया गया। बकौल विधायक संजय यादव उन्होंने ज्योति लोधी के जरिए एमआईसी में बरगी को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ राज्यसभा सांसद विवेक तंखा सहित पार्टी के हर मंच पर की थी। उनकी इस मांग को ना तवज्जो दी गई और ना ही एमआईसी गठन के लिए आहुत बैठक के बारे में कोई सूचना उन्हें दी गई। विधायक यादव ने गंभीर आरोप लगाया कि कांग्रेस में किसी भी स्तर पर सुनवाई का चलन खत्म हो गया है और पार्टी को कमजोर करने वाले नेताओं का सम्मान हो रहा है जबकि इमानदार कार्यकर्ता दरकिनार किए जा रहे हैं।

कांग्रेस खो देगी वजूद

अपनी उपेक्षा से नाराज विधायक संजय यादव ने कांग्रेस के भविष्य पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को मिल रही सफलताओं के पीछे महज कांग्रेस की मेहनत नहीं बल्कि भाजपा की खामियां हैं, जिसके चलते कांग्रेस अनेक स्थानों पर विजयी रही। किंतु ऐसे ही हालात रहे और आने वाले चुनाव में तीसरे मोर्चे का उदय हुआ तो कांग्रेसी अपना वजूद खो देगी, और उसका कोई नाम लेवा तक नहीं बचेगा।

लंबे अर्से से नाराजगी की चर्चा बरगी

विधायक संजय यादव की नाराजगी की बातें पहली बार सामने आई हैं ऐसा नहीं है, इसके पहले उनके नाराज होने की चर्चा तब भी हुई थी जब जगत बहादुर अन्नू की नामांकन रैली में संजय यादव शामिल नहीं हुए थे, तब चर्चा थी कि टिकट मिलने के बाद जगत बहादुर सिंह ने उन्हें ना फोन किया और ना ही मिलने आए। यद्यपि निकाय चुनाव के दौरान उन्होंने ज्यादा मुखरता नहीं दिखाई थी और यह कहा था कि वह उस वक्त पंचायत चुनाव के कारण अपने विधानसभा क्षेत्र में व्यस्त थे। एक चर्चा यह भी थी कि पिछले नगर निगम चुनाव में संजय यादव के भतीजे को बनारसीदास भानोट वार्ड से कांग्रेस ने टिकट दी थी किंतु पश्चिम विधानसभा के इस वार्ड से पार्टी के कुछ नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशियों को उतारकर उनके भतीजे को चुनाव में हरवा दिया था। इस बात को संजय यादव संभवत अब तक भुला नहीं पाए हैं। फिलहाल संजय यादव के तेवरों को लेकर राजनीतिक हल्कों में नई चर्चाएं जन्म ले चुकी हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के शीर्ष नेता अपने विधायक की बातों को नजर अंदाज करते रहे तो संजय यादव जल्दी कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष के लिए जारी है जोर आजमाइश

जबलपुर नगर निगम में सर्वाधिक 44 भाजपा पार्षदों के बहुमत के साथ नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए जबलपुर से भोपाल तक जोर आजमाइश जारी है। चर्चा है कि शनैः शनैः प्रतिद्वंदी बन रहे कमलेश अग्रवाल के नाम पर कैंट विधायक अशोक रोहाणी रजामंद हो गए हैं। इसके पीछे दो वजह बताई जा रही हैं। पहली यह कि अपने पसंदीदा रिंकू विज को भाजपा विधायक अशोक रोहाणी निगम अध्यक्ष की कुर्सी दिला चुके हैं। दूसरा कारण यह है कि इस बार कमलेश अग्रवाल का विधानसभा क्षेत्र ही बदल गया है। इस मर्तबा कैंट की जगह उत्तर मध्य विधानसभा के अग्रसेन वार्ड से कमलेश अग्रवाल पार्षद चुने गए हैं। यहां कांग्रेस का विधायक है, लिहाजा कैंट विधायक खुलकर कमलेश का विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं, हालांकि नेता प्रतिपक्ष के लिए महिला पार्षद लवलीन आनंद, महेश राजपूत के नाम भी भोपाल भेजे गए हैं और इन नामों में कौनसा नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए चयनित होता है इस पर सभी की निगाहें लगी हुई है।

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